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कितना खतरनाक हो सकता है डायबिटीज का टाइप 1.5? स्वामी रामदेव के आयुर्वेदिक उपायों से कंट्रोल में रहेगी शुगर

 Written By: Sajid Khan Alvi Edited By: Vanshika Saxena
 Published : Oct 04, 2025 09:46 am IST,  Updated : Oct 04, 2025 09:46 am IST

क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज को नेचुरली भी मैनेज किया जा सकता है? आइए बाबा रामदेव से जानते हैं कि ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए क्या करना चाहिए...

डायबिटीज- India TV Hindi
डायबिटीज Image Source : FREEPIK

मोबाइल की नोटिफिकेशन्स तो तुरंत लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच लेते हैं। लेकिन जब हमारा शरीर हमें वक्त-वक्त पर बीमारियों के नोटिफिकेशन्स देता है, तब इन अलार्मिंग अलर्ट्स पर कोई ध्यान नहीं देता। तभी तो लोग बीमारियों की गिरफ्त में आ जाते हैं और पता तब चलता है जब मामला सीरियस हो चुका होता है। जैसे लेटेंट ऑटो-इम्यून डायबिटीज बीमारी के अलर्ट्स बॉडी हमें देती है लेकिन लोग या तो समझ नहीं पाते या फिर नजरअंदाज कर देते हैं। नतीजा बीमारी खतरनाक होती जाती है।

लेटेंट ऑटो-इम्यून डायबिटीज

हेल्थ एक्सपर्ट्स लेटेंट ऑटो-इम्यून डायबिटीज को टाइप 1.5 बता रहे हैं। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन और यूरोपियन हेल्थ एजेंसी के मुताबिक इसके शुरुआती लक्षण कुछ-कुछ टाइप-2 डायबिटीज की तरह होते हैं और मरीज को दवाइयां भी टाइप-2 के हिसाब से दी जाती हैं। लेकिन बाद में कंडीशन बिगड़ने पर जब डीप डायग्नोस होता है, तब असली बीमारी पकड़ में आती है इसलिए इसे 'मिस-डायग्नोसिस डिजीज' भी कहते हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि टाइप 1.5 के पेशेंट्स पर लंबे वक्त में हार्ट डिजीज, किडनी डैमेज और आंखों की रोशनी जाने का खतरा बढ़ जाता है। हमारे देश में इस तरह के शुगर पेशेंट्स की तादाद 1 करोड़ से भी ज्यादा है। कुल डायबिटीज के मरीजों में करीब 10% टाइप 1.5 के पेशेंट हैं।

कैसे करें पहचान?

डायबिटीज के इस रूप से जंग जीतने के लिए स्वामी रामदेव के बताए उपायों पर अमल करें। डायबिटीज के लक्षणों में ज्यादा प्यास लगना, बार-बार यूरिन आना, बहुत भूख लगना, वजन घटना, चिड़चिड़ापन, थकान, कमजोरी और धुंधला दिखना शामिल हैं। हाई शुगर न केवल ब्रेन, आंख, हार्ट, लिवर, किडनी, जॉइंट्स पर बुरा असर डालती है बल्कि जानलेवा भी हो सकती है। तनाव, बेवक्त खाना, जंकफूड, पानी कम पीना, वक्त पर न सोना, वर्कआउट न करना, मोटापा और जीन्स डायबिटीज का कारण बन सकते हैं। 

क्या है इलाज?

सर्दी में शुगर रोगियों को अपनी डाइट पर खास ध्यान देना चाहिए, खुद को गर्म रखना चाहिए, हाई कैलोरी फूड से बचना चाहिए, वर्कआउट जरूर करना चाहिए और आधा घंटा धूप में बैठना चाहिए। एक हफ्ते में 150 मिनट वर्कआउट करने से शुगर का खतरा 60% तक कम हो सकता है। आपको हर रोज 20-25 मिनट एक्सरसाइज करनी चाहिए। डब्लूएचओ की गाइडलाइन के मुताबिक डायबिटीज के खतरे को कम करने के लिए 1 दिन में 5 ग्राम यानी एक स्पून से ज्यादा चीनी नहीं खानी चाहिए। शुगर कंट्रोल करने के लिए खीरा-करेला-टमाटर का जूस लें, गिलोय का काढ़ा पिएं, मंडूकासन-योगमुद्रासन करें और 15 मिनट कपालभाति करें। शुगर पर काबू पाने के लिए मोटापा घटाना, सिर्फ गुनगुना पानी पीना, सुबह खाली पेट नींबू-पानी पीना, लौकी का सूप-जूस-सब्जी कंज्यूम करना और अनाज-चावल कम कर देना फायदेमंद साबित होगा। शुगर कंट्रोल करने के लिए रोज 1 चम्मच मेथी पाउडर खाएं, सुबह लहसुन की 2 कली खाएं और गोभी-करेला-लौकी खाएं। एलोवेरा, स्टीविया प्लांट और इंसुलिन प्लांट भी शुगर को कंट्रोल करने में कारगर साबित हो सकते हैं।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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