छोटी दिवाली का ये उजाला सिर्फ दीपों में ही नहीं जगमगाता रूह को भी रौशन कर देता है और इसके साथ, जब आप गहरी सांस लेते हैं जब 'ओम' की ध्वनि में खुद को घोलते हैं तो हवा के साथ-साथ पॉजिटिव एनर्जी भी आपके भीतर उतरने लगती है। और ये पॉजिटिविटी अगर आपको भी अपनी लाइफ में चाहिए तो हर दिन कुछ मिनट आपको अपने लिए निकालने होंगें। इसके लिए माइंडफुल ब्रीदिंग करना बेहद जरूरी है। जो बिना किसी खर्च के, आपके मन को शांत और शरीर को मजबूत बना देगी। इसके लिए आपको बस सीधा बैठना है सांस पर ध्यान देना है और खुद से जुड़ना है। सांस पर ध्यान देने से स्ट्रेस घटता है। स्लीप पैटर्न बेहतर होता है और फोकस बढ़ता है। ये छोटी-सी आदत, आपके पूरे दिन को पॉजिटिव बना देती है। और यही पॉजिटिविटी, यही सांसों की साधना त्योहार की रौनक में, आपको बीमारियों से बचाने की ढाल भी बन जाती है। क्योंकि जैसे ही दिवाली पर पटाखे फूटते हैं हवा में जहर घुलने लगता है। लोग सोचते हैं ग्रीन पटाखे 'सेफ' हैं लेकिन सच ये है ये भी हवा को खराब करते हैं। इससे भी सूक्ष्म जहरीले कण निकलते हैं जो सीधे हमारे फेफड़ों को चोट पहुंचाते हैं। और रिसर्च डेटा से भी ये साफ हो चुका है कि दिवाली के बाद पॉल्यूशन का लेवल 30% तक बढ़ता है। जिसका सीधा असर रेस्पिरेटरी सिस्टम पर दिखता है। वायु प्रदूषण की वजह से सांस लेने में दिक्कत, अस्थमा और एलर्जी जैसी परेशानी बढ़ जाती है।
वैसे भी ठंडी और प्रदूषित हवा से सांस की नली में सिकुड़न आ जाती है जिससे फेफड़ों की क्षमता घटती है इंफेक्शन का रिस्क बढ़ता है। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, एलर्जी यहां तक कि शुगर, बीपी, थायराइड और आर्थराइटिस जैसी लाइफस्टाइल बीमारियां सिर उठाने लगती हैं। ऐसे में छोटी दिवाली के शुभ मौके पर स्वामी रामदेव से जानेंगे माइंडफुल ब्रीदिंग कैसे करें और रेस्पिरेटरी सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए कौन सा योग करें।
स्वामी रामदेव से जानें फेफड़ों को मजबूत बनाने के लिए योगासन
ताड़ासन
ताड़ासन (Tadasana), जिसे पर्वत मुद्रा (Mountain Pose) भी कहा जाता है, खड़े होकर किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण योगासन है। ये फेफड़ों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। इसे करने के लिए सीधे खड़े हो जाएं और अपने पैरों के बीच लगभग 2 इंच की दूरी रखें। अपने शरीर का भार दोनों पैरों पर समान रूप से रखें। अब सांस लेते हुए, अपने दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसाएं (इंटरलाक करें)। हथेलियों को बाहर की ओर घुमाएं। धीरे-धीरे श्वास भरते हुए, अपने फंसे हुए हाथों को सिर के ऊपर सीधा आसमान की ओर उठाएं। कोहनियों को सीधा रखें और बाजुओं को कान के पास सटाकर रखें। एक और गहरी श्वास लें और छोड़ते हुए, अपने शरीर को ऊपर की ओर खींचना शुरू करें। अब अपनी एड़ियों को जमीन से ऊपर उठाएं और पंजों (अंगूठों) के बल संतुलन बनाने की कोशिश करें, जैसे आप ताड़ के पेड़ की तरह ऊंचे हो रहे हों। इस स्थिति में 10 से 30 सेकंड (या जितनी देर सहजता से रुक सकें) तक बने रहें, पूरे शरीर में खिंचाव महसूस करें। अपनी आंखें किसी एक बिंदु पर केंद्रित रखें ताकि संतुलन बना रहे। श्वास-प्रश्वास सामान्य रखें। धीरे-धीरे श्वास छोड़ते हुए, अपनी एड़ियों को वापस जमीन पर लाएं। हाथों की पकड़ खोलें और हाथों को बगल से नीचे लाते हुए प्रारंभिक स्थिति में वापस आ जाएं।
उष्ट्रासन
उष्ट्रासन की मुद्रा में छाती आगे की ओर खुलती है, जिससे फेफड़ों को पूरी तरह फैलने के लिए जगह मिलती है। इससे गहरी सांस लेने में मदद मिलती है और फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ सकती है। गहरी सांस लेने के कारण शरीर में ऑक्सीजन का संचार बेहतर होता है। यह योगासन सांस की नली और छाती की मांसपेशियों को खींचता है, जिससे उन्हें आराम मिलता है। यह आसन फेफड़ों को शुद्ध करने और बलगम जैसी समस्याओं को दूर करने में भी सहायक हो सकता है।
भुजंगासन
यह छाती और फेफड़ों को फैलाता है, जिससे ऑक्सीजन का सेवन बेहतर होता है।
लाइफस्टाइल से जुड़ी है ये बीमारी
बीपी-शुगर
हाई कोलेस्ट्रॉल
ओबेसिटी
थायराइड
लंग्स प्रॉब्लम
इनसोम्निया
आर्थराइटिस
डेफिशियेंसी
लाइफ स्टाइल डिजीज से कैसे बचें ?
रेगुलर वर्कआउट
वजन कंट्रोल
सही डाइट
8 घंटे की नींद
कम स्ट्रेस-टेंशन
डायबिटीज के पीछे की वजह
तनाव
बेवक्त खानपान
जंकफूड
पानी कम पीना
समय पर न सोना
वर्कआउट न करना
मोटापा
जेनेटिक
हार्ट मज़बूत बनाने के लिए खाएं ये सुपरफूड अलसी
लहसुन
दालचीनी
हल्दी
किडनी की बीमारी से कैसे बचें
वर्कआउट करें
वजन कंट्रोल करें
स्मोकिंग ना करें
खूब पानी पीएं
जंकफूड से बचें
ज्यादा पेनकिलर ना लें
थायराइड प्रॉब्लम में क्या खाएं
अलसी
नारियल
मुलेठी
मशरूम
हल्दी दूध
दालचीनी
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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