किस उम्र में प्रेगनेंसी रहती है सही, क्या लंबी सिटिंग जॉब का पड़ता है असर? जानें

Pregnancy and Infant Loss Remembrance Day: महिलाओं की उम्र जब अधिक होने लगती है, तो मां बनने में कई जटिलताएं आ सकती हैं। वहीं, प्रेग्नेंट महिलाओं को लंबे समय तक बैठकर काम करने से तनाव, प्रीमैच्योर बर्थ, मिसकैरेज का खतरा बना रहता है। साथ ही उनकी सेहत पर भी इसका बुरा असर पड़ता है।

IndiaTV Hindi Desk Edited By: IndiaTV Hindi Desk
Published on: October 15, 2022 20:35 IST
Pregnancy and Infant Loss Remembrance Day- India TV Hindi
Pregnancy and Infant Loss Remembrance Day

Pregnancy and Infant Loss Remembrance Day: महिलाओं की उम्र जैसे-जैसे बढ़ती है। वैसे-वैसे ही फर्टिलिटी भी कम होने लगती है। इसके चलते उन्हें कंसीव करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उम्र जब अधिक होने लगती है, तो मां बनने में कई जटिलताएं आ सकती हैं। आपने अक्सर लोगों को यह कहते हुए सुना होगा कि 35 के बाद कंसीव करने के चांसेज खत्म हो जाते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है, क्योंकि मां बनना कई चीजों पर निर्भर करता है। महिलाओं के लिए शादी के बाद जल्दी बच्चा करने का प्रेशर बना रहता है। 

मां बनने के लिए सही उम्र

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि 20-30 साल तक की उम्र में कंसीव करना सबसे सुरक्षित और सही रहता है। बताया जाता है कि सही उम्र में मां बनने से शिशु और माता दोनों के ही फायदे मिलते हैं। माना जाता है कि 30 साल की उम्र हो जाने के बाद औरतों की फर्टिलिटी कम होती रहती है। ऐसे में 30 से पहले कंसीव कर लेना सही और हल्दी होता है। जो महिलाएं 35 के बाद मां नहीं बन पाती हैं। जरूरी नहीं कि केवल महिलाओं में ही फर्टिलिटी गिरती है, बल्कि पुरुषों में भी यह समस्या देखने को मिलते हैं। यही कारण है कि आजकल लोग एग फ्रिज करवाने लगे हैं, लेकिन इसमें भी 20 प्रतिशत ही सफलता के चांसज होते हैं। 

कंसीव न कर पाने की वजहें

जो कपल पेरेंट्स बनना चाहते हैं यदि उनमें से कोई भी अधिक स्मोकिंग करता है, तो रिप्रोडक्टिव सिस्टम पर इसका खराब असर पड़ता है। इसकी वजह से भी कंसीव नहीं करने की दिक्कत होती है। एक रिसर्च में पाया गया था कि जो महिलाएं हैवी वर्क आउट करती हैं। उन्हें भी इस समस्या से गुजरना पड़ता है। ऐसी महिलाओं में गर्भवती होने के चांसेज एक तिहाई कम हो जाते हैं। ‌पीसीओडी या पीसीओएस मरीजों में भी यह दिक्कत होती है, क्योंकि उनकी ओवरी में छोटे-छोटे फॉलिकल बन जाते हैं, जिसकी वजह से सही समय पर एग रिलीज नहीं हो पाता है। इसके लिए डॉक्टर से मिलकर सही जांच करवाना ज़रूरी होता है।

लंबी सिटिंग जॉब का प्रेग्नेंसी पर प्रभाव

महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान भी जॉब छोड़ना नहीं चाहती हैं। ऐसे में उन्हें घंटों एक ही पोजीशन में बैठना पड़ता है, जिसके चलते बदन दर्द, पीठ में दर्द जैसी कई परेशानियां हो सकती हैं।  जिसका असर उनके गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ सकता है। ‌जॉब करना यदि आपकी मजबूरी है, तो आप कुछ खास बातों का ध्यान जरूर रखें। 

  • लंबे समय तक लैपटॉप कंप्यूटर या मोबाइल को इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
  • काम करते समय लंबे समय तक लगातार न बैठें। 
  • ऐसी पोजीशन लें जिसके चलते आप कंफर्टेबल महसूस कर सकें। 
  • तनाव लेने से बचें। 
  • कॉफी और चाय का इस्तेमाल कम से कम करें। 
  • काम के चक्कर में भूखे पेट नहीं रहें। 
  • बीच-बीच में अपनी कुर्सी से उठें और थोड़ी देर टहलें। 
  • अपने कंप्यूटर टेबल पर सब्जियां, फ्रेश फल, ड्राइ फ्रूट्स, स्प्राउट्स रखें और थोड़े-थोड़े समय बाद इसका सेवन करते रहें।

 

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