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चार साल का बच्चा बना ‘भारत का सबसे कम उम्र का लेखक’

 Reported By: Bhasha
 Published : Jun 05, 2018 03:28 pm IST,  Updated : Jun 05, 2018 03:28 pm IST

अयान अपने दादा के साथ रहते हैं और उनके माता पिता मिजोरम में रहते हैं। बच्चे ने बताया कि वह प्रतिदिन अपने चारों तरफ दिखने वाली चीजों को शब्दों में ढालते हैं...

ayan gogoi- India TV Hindi
ayan gogoi

लखीमपुर (असम): जिस उम्र में बच्चे तोतली जुबान में बातचीत करते है, उस उम्र में असम के उत्तरी लखीमपुर जिले के चार वर्षीय अयान गोगोई गोहैन ने ‘भारत का सबसे कम उम्र का लेखक’ होने का खिताब हासिल किया है। इस साल जनवरी में प्रकाशित किताब ‘हनीकॉम्ब’ के लिए ‘इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड’ ने गोहैन को इस खिताब से नवाजा। यह नन्हा लेखक उत्तरी लखीमपुर के सेंट मेरी स्कूल में पढ़ता है।

इस किताब में नन्हे लेखक की 30 छोटी कहानियों और चित्रों को शामिल किया गया है। इसकी कीमत 250 रूपये है। ‘इंडिया बुक आफ रिकॉर्ड’ देश में असाधारण उपलब्धियां हासिल करने वालों के नाम अपने रिकार्ड में दर्ज करता है। उसने अयान को जनवरी में एक पट्टिका और प्रमाणपत्र दिया। किताब में लिखे गए परिचय में बताया गया है कि अयान ने एक साल की उम्र में चित्रकारी शुरू कर दी थी। उसने ‘कहानी लिखना’ मात्र तीन साल की उम्र में शुरू कर दिया था।

अयान अपने दादा के साथ रहते हैं और उनके माता पिता मिजोरम में रहते हैं। बच्चे ने बताया कि वह प्रतिदिन अपने चारों तरफ दिखने वाली चीजों को शब्दों में ढालते हैं। यह कुछ भी हो सकता है दादा जी के साथ बातचीत या कोई ऐसी बात जिसे मैंने अभी सीखा है। चार साल के अयान अपने दादा पूर्ण कांत गोगोई को अपना ‘सबसे अच्छा दोस्त’ और ‘हीरो’ बताते हैं। अयान ने बताया, ‘‘हर दिन कुछ नया लिखने और चित्र बनाने के बारे में मुझे प्रेरित करते हैं। वह मुझे कहानियां सुनाने वाले, रॉक स्टार और फुटबाल प्रेमी है। वह मेरे सबसे अच्छे दोस्त हैं।’’

बतौर बैंक अधिकारी सेवानिवृत्त हुए गोगोई ने कहा, ‘‘वह (अयान) अद्भुत बच्चा है। मुझे याद है एक दफा उसने इंद्रधनुष देखा और उसने कविता के रूप में उसे उतारा। उसने सात रंगों के साथ संगीत के सात सुरों की तुलना की।’’ गोगोई ने बताया कि यहां तक कि ‘हनीकॉम्ब’ का मुख्य पृष्ठ भी अयान ने ही डिजाइन किया है।

अयान को योग करने, कार्टून देखने, बैडमिंटन और फुटबाल खेलने तथा बागवानी का भी शौक है। लेखक और कवि दिलीप महापात्र सहित कई साहित्यकारों ने ‘हनीकॉम्ब’ की समीक्षा की है और उनकी प्रतिक्रिया किताब के आखिरी पृष्ठ पर छपी है।

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