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स्वतंत्रता सेनानियों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण के लिए आगे बढ़ने का समय: राष्ट्रपति

Written by: IndiaTV Hindi Desk
Published : Aug 14, 2017 06:33 pm IST, Updated : Aug 14, 2017 08:02 pm IST

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को स्वतंत्रता सेनानियों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश के लिए अपने जीवन का बलिदान कर देने वाले ऐसे वीर स्वतंत्रता सेनानियों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने और देश के लिए कुछ कर गुजरने की उसी

President Ramnath kovind- India TV Hindi
Image Source : PTI President Ramnath kovind

नई दिल्ली: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को स्वतंत्रता सेनानियों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश के लिए अपने जीवन का बलिदान कर देने वाले ऐसे वीर स्वतंत्रता सेनानियों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने और देश के लिए कुछ कर गुजरने की उसी भावना के साथ राष्ट्र निर्माण में सतत जुटे रहने का समय है। स्वतंत्रता दिवस की 70वीं वर्षगांठ पर देश के नाम अपने संबोधन में राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, "स्वतंत्रा नैतिकता पर आधारित नीतियों और योजनाओं को लागू करने पर उनका जोर, एकता और अनुशासन में उनका ²ढ़ विश्वास, विरासत और विज्ञान के समन्वय में उनकी आस्था, विधि के अनुसार शासन और शिक्षा को प्रोत्साहन, इन सभी के मूल में नागरिकों और सरकार के बीच साझेदारी की अवधारणा थी।"

उन्होंने आगे कहा, "यही साझेदारी हमारे राष्ट्र-निर्माण का आधार रही है - नागरिक और सरकार के बीच साझेदारी, व्यक्ति और समाज के बीच साझेदारी, परिवार और एक बड़े समुदाय के बीच साझेदारी।" उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए ऐसे कर्मठ लोगों के साथ सभी को जुड़ना चाहिए, साथ ही सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का लाभ हर तबके तक पहुंचे इसके लिए एकजुट होकर काम करना चाहिए। इसके लिए नागरिकों और सरकार के बीच साझेदारी महत्वपूर्ण है। कोविंद ने सरकार के 'स्वच्छ भारत' अभियान, 'खुले में शौच से मुक्त' कराना, इंटरनेट का सही उद्देश्य के लिए उपयोग करना, 'बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ' अभियान का जिक्र किया। 

उन्होंने कहा, "सरकार कानून बना सकती है और कानून लागू करने की प्रक्रिया को मजबूत कर सकती है, लेकिन कानून का पालन करने वाला नागरिक बनना, कानून का पालन करने वाले समाज का निर्माण करना - हममें से हर एक की जिम्मेदारी है। सरकार पारदर्शिता पर जोर दे रही है, सरकारी नियुक्तियों और सरकारी खरीद में भ्रष्टाचार समाप्त कर रही है, लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी में अपने अंत:करण को साफ रखते हुए कार्य करना, कार्य संस्कृति को पवित्र बनाए रखना - हममें से हर एक की जिम्मेदारी है।"

कोविंद ने कहा, "सरकार ने कर प्रणाली को आसान करने के लिए जीएसटी लागू किया है, प्रक्रियाओं को आसान बनाया है, लेकिन इसे अपने हर काम-काज और लेन-देन में शामिल करना तथा कर देने में गर्व महसूस करने की भावना को प्रसारित करना - हममें से हर एक की जिम्मेदारी है।"

उन्होंने कहा कि आजादी केवल सत्ता हस्तांतरण नहीं था, बल्कि वह एक बहुत बड़े और व्यापक बदलाव की घड़ी थी। वह हमारे समूचे देश के सपनों के साकार होने का पल था, ऐसे सपने जो हमारे पूर्वजों और स्वतंत्रता सेनानियों ने देखे थे। स्वतंत्र भारत का उनका सपना, हमारे गांव, गरीब और देश के समग्र विकास का सपना था।उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने समाज और राष्ट्र के चरित्र निर्माण पर बल दिया था। गांधीजी ने जिन सिद्धांतों को अपनाने की बात कही थी, वे हमारे लिए आज भी प्रासंगिक हैं। कोविंद ने कहा, "राष्ट्रव्यापी सुधार और संघर्ष के इस अभियान में गांधीजी अकेले नहीं थे। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जब 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूंगा' का आह्वान किया तो हजारों-लाखों भारतवासियों ने उनके नेतृत्व में आजादी की लड़ाई लड़ते हुए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया।"

उन्होंने कहा, "नेहरूजी ने हमें सिखाया कि भारत की सदियों पुरानी विरासतें और परंपराएं, जिन पर हमें आज भी गर्व है, उनका प्रौद्योगिकी के साथ तालमेल संभव है, और वे परंपराएं आधुनिक समाज के निर्माण के प्रयासों में सहायक हो सकती हैं। सरदार पटेल ने हमें राष्ट्रीय एकता और अखंडता के महत्व के प्रति जागरूक किया, साथ ही उन्होंने यह भी समझाया कि अनुशासन-युक्त राष्ट्रीय चरित्र क्या होता है। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर ने संविधान के दायरे मे रहकर काम करने तथा 'कानून के शासन' की अनिवार्यता के विषय में समझाया। साथ ही, उन्होंने शिक्षा के बुनियादी महत्व पर भी जोर दिया।"

 

राष्ट्रपति का संबोधन LIVE

  • आजादी के वीरों को नहीं भुला सकते
  • महात्मा गांधी ने राष्ट्र निर्माण की नींव ऱखी
  • उन्होंने चरित्र निर्माण पर जोर दिया था
  • गांधी के सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं
  • बाबा साहेब ने कानून की अनिवार्यता को बताया
  • नेहरु ने परंपरा और तकनीकी में तालमेल करना सिखाया
  • पटेल ने देश को एकसूत्र में पिरोने का काम किया
  • हमें न्यू इंडिया के लक्ष्य को प्राप्त करना है
  • टोक्यो ओलंपिक में हमें बेहतर प्रदर्शन करना है
  • प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे लाने की कोशिश करें
  • हमारे सैनिक दिन-रात निस्वार्थ भाव से हमारी सुरक्षा करते हैं
  • समाज के गरीब बच्चों की शिक्षा में मदद करें
  • महात्मा बुद्ध ने कहा था, अपना दीपक स्वयं बनो

आपको बता दें कि रामनाथ कोविंद ने पिछले महीने की 25 तारीख को राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। इस अवसर पर उन्होंने कहा था कि देश की विविधता ही इसकी सफलता का मंत्र है। उन्होंने यह भी कहा कि 2022 में देश की आजादी के 75 साल पूरे होने से पहले अंत्योदय का लक्ष्य होना चाहिए। ऐसा माना जा रहा है कि इस मौके पर राष्ट्रपति देश के आगे स्थित मुख्य मुद्दों पर अपने विचार रखेंगे। 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से देश को संबोधित करेंगे।

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