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जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन 6 महीने बढ़ाने के प्रस्ताव को राज्यसभा की मंजूरी

कांग्रेस को एक बात बतानी चाहिए कि 1949 को जब एक तिहाई कश्मीर पाकिस्तान के कब्जें में था तो आपने सीजफायर क्यों कर दिया। ये सीजफायर न हुआ होता ये झगड़ा ही न होता, ये आतंकवाद ही नहीं होता, करीब 35 हजार जानें नहीं गई होती। इन सबका मूल कारण सीजफायर ही था।

Edited by: IndiaTV Hindi Desk
Published : Jul 01, 2019 08:15 pm IST, Updated : Jul 01, 2019 11:44 pm IST
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Image Source : PTI जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन 6 महीने बढ़ाने के प्रस्ताव को राज्यसभा की मंजूरी

नई दिल्ली: सोमवार को राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की अवधि को छह महीने बढ़ाने के प्रस्ताव को पेश किया। इस विधेयक को गहन चर्चा के बाद राज्यसभा की मंजूरी मिल गयी। इस विधेयक को समाजवादी पार्टी, बीजू जनता दल, तृणमूल कांग्रेस सहित कई और दलों ने भी समर्थन किया।

हमारी सरकार की नीति जम्हूरियत, इंसानियत और कश्मीरियत की - अमित शाह

इससे पहले  गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर राज्यसभा जवाब देते हुए सोमवार को कहा कि हमारी सरकार की नीति जम्हूरियत, इंसानियत और कश्मीरियत की है। उन्होनें कहा कि मैं नरेन्द्र मोदी सरकार की तरफ से सदन के सभी सदस्यों तक ये बात रखना चाहता हूं कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग हैं और इसे कोई देश से अलग नहीं कर सकता। मैं फिर दोहराना चाहता हूं कि नरेन्द्र मोदी सरकार की आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति है।

अमित शाह ने कहा कि जम्हूरियत सिर्फ परिवार वालों के लिए ही सीमित नहीं रहनी चाहिए। जम्हूरियत गांव तक जानी चाहिए, चालीस हज़ार पंच, सरपंच तक जानी चाहिए और ये ले जाने का काम हमने किया। जम्मू कश्मीर में 70 साल से करीब 40 हजार लोग घर में बैठे थे जो पंच-सरपंच चुने जाने का रास्ता देख रहे थे। क्यों अब तक जम्मू-कश्मीर में चुनाव नहीं कराये गये, और फिर जम्हूरियत की बात करते हैं। मोदी सरकार ने जम्हूरियत को गांव-गांव तक पहुंचाने का काम किया है।

शाह ने कहा कि जो भारत को तोड़ने की बात करेगा उसको उसी भाषा में जवाब मिलेगा और जो भारत के साथ रहना चाहते है उसके कल्याण के लिए हम चिंता करेंगे। जम्मू कश्मीर के किसी भी लोगों को डरने की जरुरत नहीं है। उन्होनें कहा कि कश्मीर की आवाम की संस्कृति का संरक्षण हम ही करेंगे। एक समय आएगा जब माता क्षीर भवानी मंदिर में कश्मीर पंडित भी पूरा करते दिखाई देंगे और सूफी संत भी वहां होंगे। मैं निराशावादी नहीं हूं। हम इंसानियत की बात करते हैं। गृह मंत्री ने कहा कि गुलाम नबी साहब ने बोला कि चुनाव आप करा दीजिए। हम कांग्रेस नहीं हैं कि हम ही चुनाव करा दें। हमारे शासन में चुनाव आयोग ही चुनाव कराता है। हमारे शासन में हम चुनाव आयोग को नहीं चलाते।

गृहमंत्री ने कहा कि राम गोपल जी ने कहा कि कश्मीर विवादित है तो मैं बताना चाहूंगा कि न कश्मीर विवादित है, न POK कश्मीर विवादित है ये सब भारत का अभिन्न अंग हैं। मैं सदन के माध्यम से सभी को बताना चाहता हूं कि हम जम्मू कश्मीर में पीडीपी के साथ गठबंधन करें, ये हमारा नहीं बल्कि वहां की जनता का फैसला था। तब एक खंडित जनादेश मिला था। मगर जब हमें लगा कि अलगाववाद को बढ़ावा मिल रहा है और पानी सिर के ऊपर जा रहा है तो हमने सरकार से हटने में तनिक भी देर नहीं की।

उन्होनें कहा कि कांग्रेस को एक बात बतानी चाहिए कि 1949 को जब एक तिहाई कश्मीर पाकिस्तान के कब्जें में था तो आपने सीजफायर क्यों कर दिया। ये सीजफायर न हुआ होता ये झगड़ा ही न होता, ये आतंकवाद ही नहीं होता, करीब 35 हजार जानें नहीं गई होती। इन सबका मूल कारण सीजफायर ही था। गृह मंत्री अमित शाह कि जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर राज्यसभा जवाब देते हुए सोमवार को कहा कि हमारी सरकार की नीति जम्हूरियत, इंसानियत और कश्मीरियत की है। उन्होनें कहा कि मैं नरेन्द्र मोदी सरकार की तरफ से सदन के सभी सदस्यों तक ये बात रखना चाहता हूं कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग हैं और इसे कोई देश से अलग नहीं कर सकता। 

गृहमंत्री ने कहा कि मैं फिर दोहराना चाहता हूं कि नरेन्द्र मोदी सरकार की आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति है। शाह ने कहा कि जम्मू कश्मीर के लिए 80 हजार करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने घोषणा कि थी। भारत सरकार के 15 मंत्रालयों की 63 परिजानाएं दी गई थी। 63 में से 16 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। 80 हजार करोड़ रुपये में से 80 प्रतिशत धनराशि वहां पहुंच चुकी है।

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