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कश्मीर में सक्रिय जेईम आतंकियों के हाथों लगी NATO आर्मी की M4 राइफल

Edited by: IndiaTV Hindi Desk Published : Sep 18, 2020 07:21 pm IST, Updated : Sep 18, 2020 07:21 pm IST

अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र में आतंकवाद से लड़ने के लिए NATO सेना द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली कई अमेरिका निर्मित एम 4 स्नाइपर राइफलें जम्मू एवं कश्मीर में अजहर के गुरिल्ला समूह जेईएम के हाथों में पड़ गई हैं।

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Image Source : AP FILE लिए NATO सेना द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली कई अमेरिका निर्मित एम 4 स्नाइपर राइफलें जम्मू एवं कश्मीर में मसूद अजहर के गुरिल्ला समूह जेईएम के हाथों में पड़ गई हैं।

नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की ओर से घोषित अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) संस्थापक मौलाना मसूद अजहर के 3 भतीजों को पिछले 3 वर्षों के दौरान कश्मीर में अलग-अलग मुठभेड़ों में मार गिराया गया था। इन तीनों के पास अमेरिका निर्मित खतरनाक एम 4 स्नाइपर राइफल थी। अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र में आतंकवाद से लड़ने के लिए NATO सेना द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली कई अमेरिका निर्मित एम 4 स्नाइपर राइफलें जम्मू एवं कश्मीर में अजहर के गुरिल्ला समूह जेईएम के हाथों में पड़ गई हैं। 

अमेरिकी सेना करती है M4 का इस्तेमाल

दिसंबर 1999 में कंधार में IC-814 विमान के बंधकों को छोड़ने के बदले में भारत द्वारा छोड़े गए अजहर को मई 2019 में UNSC की ओर से एक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी के रूप में नामित किया गया। एम4 कार्बाइन का बड़े पैमाने पर अमेरिकी सशस्त्र बलों द्वारा उपयोग किया जाता है और यह प्राथमिक पैदल सेना के हथियार और सर्विस राइफल के रूप में यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी और यूनाइटेड स्टेट्स मरीन कॉर्प्स की लड़ाकू इकाइयों में एम 16 राइफल की जगह ले रही हैं। एम4, एम203 और एम320 ग्रेनेड लांचर को असेंबल करने (माउंट) में भी सक्षम है।

बेहद ही खतरनाक हथियार है M4
एम4 में अर्ध-स्वचालित और तीन-राउंड बर्स्ट फायरिंग मोड (जैसे एम16 ए2 और एम16 ए4) हैं, जबकि एम4 ए1 में अर्ध-स्वचालित और पूरी तरह से स्वचालित फायरिंग मोड (जैसे ट16 ए1 और एम16 ए3) हैं। यह एम16 ए2 असॉल्ट राइफल का हल्का और छोटा वेरिएंट है। पिछले 3 वर्षों में कश्मीर में सुरक्षा बलों के साथ अलग-अलग मुठभेड़ों में अजहर के 3 भतीजों तलहा रशीद, उस्मान इब्राहिम और उमर फारूक को ढेर कर दिया गया। इन तीनों के पास एम4 राइफलें थीं, जो मुठभेड़ वाले स्थान से अन्य हथियारों के साथ बरामद की गई थीं। अब तक रूस निर्मित एके-सीरीज राइफल्स के विभिन्न वेरिएंट 1988 से जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी और पाकिस्तानी आतंकवादियों के साथ प्रमुख हमलावर हथियार रहे हैं।

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Image Source : TWITTERM4 राइफल एक बेहद ही खतरनाक हथियार है और इसे चलाना काफी सुविधाजनक है।

‘हमारी रडार पर हैं M4 रखने वाले आतंकी’
एम4 ने ऐसी आशंकाओं के बीच प्रवेश किया है कि अफगानिस्तान में अमेरिकियों और तालिबान के बीच एक समझौते के बाद जिहादी गुरिल्लाओं का वर्ग कश्मीर में अपना आधार बदल सकते हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजी दिलबाग सिंह भी आतंकवादियों के पास एम4 राइफलें होने की बात को मानते हैं। उनका कहना है कि आतंकवादियों के पास से 6 एम4 और 10 अमेरिका निर्मित राइफलें जब्त की गई हैं। उन्होंने कहा, ‘5 से 6 जेईएम कमांडर एम 4 राइफल के साथ सक्रिय हैं, लेकिन वे अच्छी तरह से हमारी रडार पर हैं।’

’10-15 कमांडर हैं M4 राइफल से लैस’
हालांकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के कुछ वरिष्ठ अधिकारी, जो पिछले 2 वर्षों में हाई-प्रोफाइल आतंकी हमलों की जांच से जुड़े हैं, उनका कहना है कि 10 से 15 JeM कमांडर वर्तमान में M4 राइफल से लैस हैं। NIA के एक अधिकारी ने कहा, ‘3 से 4 आतंकियों के प्रत्येक JeM मॉड्यूल के कमांडर के पास एक M4 है, लेकिन वे पुलिस या सुरक्षा बलों को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाए हैं।’

3 साल में कश्मीर में घुसे थे 60 आतंकी
जांच के दौरान, एनआईए को पता चला है कि जून 2017 से जनवरी 2020 के बीच जम्मू में अंतर्राष्ट्रीय सीमा के माध्यम से 60 जेईएम के आतंकवादियों ने कश्मीर में घुसपैठ की थी। वे सांबा और हीरानगर इलाकों में 3 से 5 के समूहों में घुसे थे। कहा जाता है कि कुछ अज्ञात घुसपैठियों ने एक भूमिगत सुरंग के माध्यम से भी प्रवेश किया है। अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक समूह के पास तीन से चार एके सीरीज की राइफलें और एक एम 4 राइफल है। (IANS)

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