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NGT ने यमुना तट को हुए नुकसान के लिए श्री श्री की संस्था 'आर्ट ऑफ लिविंग' को जिम्मेदार ठहराया

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने पिछले साले मार्च में विश्व सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित करने के कारण यमुना डूब क्षेत्र को हुए नुकसान के लिए श्री श्री रविशंकर के संगठन आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन (AOL) को आज जिम्मेदार ठहराया।

Edited by: IndiaTV Hindi Desk
Published : Dec 07, 2017 07:05 pm IST, Updated : Dec 07, 2017 07:05 pm IST
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नयी दिल्ली: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने पिछले साले मार्च में विश्व सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित करने के कारण यमुना डूब क्षेत्र को हुए नुकसान के लिए श्री श्री रविशंकर के संगठन आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन (AOL) को आज जिम्मेदार ठहराया। अधिकरण के अध्यक्ष जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने हालांकि एओएल पर पर्यावरण मुआवजा बढ़ाने से इनकार करते हुए कहा कि उसके द्वारा पहले जमा कराए गए पांच करोड़ रुपयों का इस्तेमाल डूब क्षेत्र में पूर्व स्थिति की बहाली के लिए किया जाएगा। 

विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर पीठ ने यमुना डूब क्षेत्र के नुकसान के लिए एओएल को जिम्मेदार ठहराया। पीठ में न्यायमूर्ति जे रहीम और विशेषज्ञ सदस्य बी एस सजवान भी शामिल थे। पीठ ने दिल्ली विकास प्राधिकार को निर्देश दिया कि वह डूब क्षेत्र को हुए नुकसान और विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के अनुसार उसे बहाल करने में आने वाले खर्च का आकलन करे। 

पीठ ने कहा कि अगर नुकसान को दुरूस्त करने में आने वाला खर्च पांच करोड़ रूपये से ज्यादा होता है तो उसे एओएल से वसूल किया जाएगा। उसने कहा कि अगर लागत पांच करोड़ रूपए से कम आती है तो शेष राशि फाउंडेशन को वापस कर दी जाएगी। पीठ ने कहा कि यमुना के डूब क्षेत्र का इस्तेमाल किसी ऐसी गतिविधि के लिए नहीं होनी चाहिए जिससे पर्यावरण को नुकसान हो। 

पीठ ने हालांकि यह फैसला करने से इंकार कर दिया कि क्या एओएल यमुना तट पर समारोह आयोजित करने के लिए अधिकृत था या नहीं। पीठ ने कहा कि यह उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। अधिकरण ने यमुना तट को बचाने के अपने कर्तव्य का पालन करने में नाकाम रहने के लिए डीडीए की खिंचाई की लेकिन उसने कोई पेनाल्टी नहीं लगायी। 

फैसला सुनाए जाने के पहले बताया गया कि विगत में मामले की सुनवाई करने वाले न्यायमूर्ति आर एस राठौड़ ने खुद को पीठ से अलग कर लिया है। एओएल के वकील ने कहा कि इस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय जायेंगे। एओएल ने कहा कि हम फैसले से सहमत नहीं हैं और अधिकरण के फैसले से आर्ट आफ लिविंग निराश है। संगठन ने कहा कि हमारी दलीलों पर विचार नहीं किया गया। संगठन ने कहा कि उसे उम्मीद है कि उन्हें उच्चतम न्यायालय से न्याय मिलेगा। 

अधिकरण ने मनोज मिश्र की याचिका पर सुनवाई के बाद इस मामले में अपना आदेश 13 नवंबर को सुरक्षित रख लिया था। इस याचिका में दावा किया गया था कि इस अयोजन से नदी और उसके तट को भारी नुकसान हुआ है तथा उसे ठीक किया जाना चाहिए। 

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