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NIRBHAYA GANGRAPE CASE 2012: चारों दोषियों की फांसी सुप्रीम कोर्ट से भी बरकरार

 Written By: India TV News Desk
 Published : May 05, 2017 02:26 pm IST,  Updated : May 05, 2017 03:26 pm IST

सुप्रीम कोर्ट ने आज निर्भया कांड में बड़ा फैसला देते हुये चारो दोषियों मुकेश, अक्षय, पवन और विनय की फांसी की सजा बरकरार रखी है। जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस आर भानूमति और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच फैसला सुनायी।

Nirbhaya Case- India TV Hindi
Nirbhaya Case

नई दिल्ली: निर्भया गैंगरेप मामले में चार दोषियों की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए फांसी की सजा को बरकरार रखा है। फैसले के दौरान निर्भया के माता-पिता कोर्ट में मौजूद थे। फैसला सुनकर निर्भया की मां की आंखों में आंसू आ गए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा-सेक्स और हिंसा की भूख के चलते बड़ी वारदात को अंजाम दिया। दोषी अपराध के प्रति आसक्त थे। जैसे अपराध हुआ, ऐसा लगता है अलग दुनिया की कहानी है। जजों के फैसला सुनाने के बाद कोर्ट में तालियां बजीं। (कोर्ट का फैसला सुनते ही रो पड़ी निर्भया की मां, कहा फैसले से हुई खुशी)

गैंगरेप के चार दोषियों मुकेश, अक्षय, पवन और विनय को साकेत की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी, जिस पर 14 मार्च  2014 को दिल्ली हाईकोर्ट ने भी मुहर लगा दी थी। दोषियों की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा पर रोक लगा दी थी। इसके बाद तीन जजों की बेंच को मामले को भेजा गया और कोर्ट ने केस में मदद के लिए दो एमिक्‍स क्यूरी नियुक्त किए गए थे। (SC ने बरकरार रखी निर्भया के कातिलों की सजा, जानें कौन हैं ये गुनहगार)

इस कांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था और निर्भया कांड नाम से चर्चित रहा था। शीर्ष अदालत ने चारों दोषियों- मुकेश, पवन, विनय शर्मा और अक्षय कुमार सिंह की अपीलों पर 27 मार्च को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। चारों ने 13 मार्च, 2014 को उच्च न्यायालय द्वारा दोषी ठहराये जाने और सुनाई गयी मौत की सजा के खिलाफ अपील की थी। (निर्भया के बाद कितना कुछ बदला, जानिए कितनी सुरक्षित हैं महिलाएं...)

साल 2012 में 16 दिसंबर की रात को 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा के साथ दक्षिण दिल्ली में एक चलती बस में जघन्य तरीके से सामूहिक दुष्कर्म किया गया था और उसे उसके एक दोस्त के साथ बस से बाहर फेंक दिया गया था। उसी साल 29 दिसंबर को सिंगापुर के एक अस्पताल में लड़की की मौत हो गयी थी।

दिल्ली पुलिस ने दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की थी, वहीं बचाव पक्ष के वकील ने कहा था कि गरीब पारिवारिक पृष्ठभूमि के होने और युवा होने की वजह से नरमी बरती जानी चाहिए।

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