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'सद्गुरु की झूठी गिरफ्तारी के फर्जी विज्ञापनों पर लगाम लगाएं', दिल्ली हाई कोर्ट का गूगल को आदेश

 Published : Oct 21, 2025 05:13 pm IST,  Updated : Oct 21, 2025 05:13 pm IST

दिल्ली हाई कोर्ट ने गूगल को आदेश दिया है कि वह सद्गुरु की झूठी गिरफ्तारी वाले डीपफेक और भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाए। अदालत ने गूगल और ईशा फाउंडेशन को मिलकर समाधान निकालने को कहा है।

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दिल्ली हाई कोर्ट ने गूगल से सद्गुरु की गिरफ्तारी के फर्जी विज्ञापनों पर लगाम लगाने को कहा है। Image Source : PTI

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने 14 अक्टूबर को गूगल को एक बड़ा आदेश देते हुए कहा कि वह सद्गुरु की AI से बनी तस्वीरों का इस्तेमाल करने वाले फर्जी विज्ञापनों से निपटने के लिए अपनी तकनीक का उपयोग करे। यह फैसला सद्गुरु और ईशा फाउंडेशन की शिकायत के बाद आया, जिसमें कहा गया कि गूगल, सद्गुरु के नाम, तस्वीर और वीडियो के लगातार गलत इस्तेमाल को रोकने में नाकाम रहा है। इन भ्रामक AI डीपफेक विज्ञापनों में सद्गुरु की झूठी गिरफ्तारी का दावा भी शामिल है, जो यूट्यूब पर चल रहे थे।

कोर्ट ने दिया संयुक्त समाधान निकालने का निर्देश

जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की एकल जज बेंच ने कहा, 'सद्गुरु की झूठी गिरफ्तारी दिखाने वाले ऐसे विज्ञापनों का प्रकाशन रोका जाना चाहिए।' कोर्ट ने गूगल को इस मुद्दे से निपटने के लिए अपनी तकनीक का इस्तेमाल करने का आदेश दिया। अगर गूगल को अपनी तकनीक में कोई सीमा या आपत्ति है, तो उसे अदालत में हलफनामा दायर करके कारण बताने को कहा गया है। साथ ही, कोर्ट ने गूगल और ईशा फाउंडेशन को मुलाकात करने और संयुक्त रूप से एक समाधान निकालने का भी निर्देश दिया, ताकि ईशा को बार-बार शिकायत न करनी पड़े।

कोर्ट को बताई गई गूगल की विज्ञापन पॉलिसी

कोर्ट को बताया गया कि गूगल की एक नीति है, जो गिरफ्तारी या मौत जैसे नकारात्मक घटनाओं का इस्तेमाल करने वाले क्लिकबेट विज्ञापनों को प्रकाशित करने के खिलाफ है, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा। मध्यस्थ नियमों (Intermediary rules) के तहत, गूगल को तकनीक-आधारित उपाय लागू करना जरूरी है, जिसमें स्वचालित तरीके से ऐसी जानकारी को पहचाना जाए जो पहले हटाई जा चुकी हो।

'डीपफेक, भ्रामक विज्ञापनों से भ्रम और चिंता'

इससे पहले, 30 मई 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट ने सद्गुरु के व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए आदेश दिया था और गूगल को उल्लंघनकारी चैनलों को हटाने का निर्देश दिया था। लेकिन इसके बावजूद, यूट्यूब पर फर्जी विज्ञापनों में बढ़ोतरी हुई है। इनमें सद्गुरु की झूठी गिरफ्तारी के दावे और नकली निवेश योजनाओं को बढ़ावा देने वाले वीडियो शामिल हैं। ये विज्ञापन अनजान लोगों को ऐसी वेबसाइटों पर ले जाते हैं, जो व्यक्तिगत और वित्तीय डेटा चुराने या घोटाले फैलाने के लिए बनी हैं। ईशा फाउंडेशन के मुताबिक, इन डीपफेक और भ्रामक विज्ञापनों से भ्रम और चिंता फैली है।

'सद्गुरु के काम को नुकसान पहुंचा रही गलत सूचना'

ईशा फाउंडेशन ने कहा कि हजारों स्वयंसेवक और लोग सद्गुरु की 'गिरफ्तारी' के झूठे दावों की पुष्टि के लिए संपर्क कर रहे हैं। यह सुनियोजित गलत सूचना सद्गुरु के काम को नुकसान पहुंचा रही है और डिजिटल संवाद की अखंडता को खतरे में डाल रही है। ईशा फाउंडेशन ऐसी धोखाधड़ी वाली सामग्री को हटाने और लोगों को जागरूक करने के लिए सक्रिय है। फाउंडेशन ने जनता से अपील की है कि वे सतर्क रहें और यूट्यूब पर ऐसे फर्जी विज्ञापनों या वीडियो की रिपोर्ट करें, जो झूठा दावा करते हैं कि सद्गुरु को गिरफ्तार किया गया है। इन्हें 'घोटाला' (Scam) या 'भ्रामक' (Misleading) के रूप में चिह्नित करने का आग्रह भी किया गया है।

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