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26 January: गणतंत्र दिवस परेड में 2500 कलाकार करेंगे प्रदर्शन, जानिए इस बार की क्या है थीम?

 Published : Jan 19, 2026 08:59 pm IST,  Updated : Jan 19, 2026 09:39 pm IST

Republic Day parade: कर्तव्य पथ पर परेड की तैयारियां चल रही हैं। इस बार की परेड बहुत खास होने वाली है। वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर खास संगीत भी तैयार किया गया है।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
सांकेतिक तस्वीर Image Source : PTI

गणतंत्र दिवस के परेड की तैयारियों जोरों से चल रही हैं। भारत के विभिन्न नृत्य रूपों का प्रतिनिधित्व करते हुए लगभग 2,500 कलाकारों का एक विशाल समूह 77वीं गणतंत्र दिवस परेड के दौरान कर्तव्य पथ पर प्रदर्शन करने के लिए तैयार है, जिसका मुख्य विषय ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ है। प्रदर्शन का व्यापक विषय ‘स्वतंत्रता का मंत्र - वंदे मातरम’ और ‘समृद्धि का मंत्र - विकसित भारत’ होगा। 

इस पर काम करने वाली रचनात्मक टीम के सदस्यों में संगीत निर्देशक के रूप में एम.एम. कीरावनी, गीतकार के रूप में सुभाष सहगल, प्रस्तोता के रूप में अनुपम खेर और कोरियोग्राफर के रूप में संतोष नायर शामिल हैं। संपूर्ण पर्यवेक्षण और निर्देशन संध्या पुरेचा के अधीन है। 

संध्या रमन को मिली ये जिम्मेदारी

उन्होंने कहा कि रचनात्मक डिजाइन और परिधान की जिम्मेदारी संध्या रमन संभालेंगी। कीरावनी को विशेष पहचान तब मिली जब ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘आरआरआर’ में उनकी रचना ‘नाटु नाटु’ गीत ने 2023 में सर्वश्रेष्ठ मौलिक गीत श्रेणी में ऑस्कर पुरस्कार जीता। रक्षा मंत्रालय ने पिछले शुक्रवार को गणतंत्र दिवस समारोह पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में घोषणा की थी कि कीरावनी उस सांस्कृतिक प्रदर्शन की रचनात्मक टीम का हिस्सा हैं, जिसका आयोजन 26 जनवरी को औपचारिक रूप से कर्तव्य पथ पर किया जाएगा। 

 भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी, कुचिपुड़ी नृत्य

संस्कृति मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि लगभग 2,500 कलाकार भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी, कुचिपुड़ी और मणिपुरी जैसे देश के विभिन्न नृत्य रूपों का प्रतिनिधित्व करेंगे। कीरावनी ने दिन की शुरुआत में ‘एक्स’ पर टीम का हिस्सा बनने को लेकर अपनी खुशी साझा की। उन्होंने पोस्ट किया, ‘प्रिय देशवासियो, वंदे मातरम! प्रतिष्ठित गीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित 26 जनवरी की गणतंत्र दिवस परेड के लिए संगीत तैयार करने का अवसर पाकर मैं अत्यंत सम्मानित और गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। इस भव्य प्रस्तुति में भारत भर के 2,500 कलाकार भाग लेंगे। हमारे राष्ट्रवाद की भावना का जश्न मनाने के लिए हमारे साथ जुड़ें।’ 

 राष्ट्र गीत के पुराने चित्र किए जाएंगे प्रदर्शित

विषयवस्तु के अनुरूप, कर्तव्य पथ के किनारे बने आवरणों में राष्ट्र गीत के आरंभिक छंदों को दर्शाने वाले पुराने चित्र प्रदर्शित किए जाएंगे और इसके रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी को श्रद्धांजलि देने के लिए मुख्य मंच पर पुष्पों से बनी कलाकृतियां होंगी। पारंपरिक प्रथा से हटकर इस बार परेड स्थल पर पहले इस्तेमाल किए जाने वाले ‘वीवीआईपी’ (अति विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति) और अन्य नामों का प्रयोग नहीं किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को कहा कि इसके बजाय सभी स्थानों का नाम भारतीय नदियों के नाम पर रखा गया है। 

अधिकारियों ने कहा कि इन नामों में ब्यास, ब्रह्मपुत्र, चंबल, चिनाब, गंडक, गंगा, घाघरा, गोदावरी, सिंधु, झेलम, कावेरी, कोसी, कृष्णा, महानदी, नर्मदा, पेन्नार, पेरियार, रावी, सोन, सतलुज, तीस्ता, वैगई और यमुना शामिल हैं। 

'बीटिंग रिट्रीट’ समारोह के लिए भी खास तैयारियां

इसी तरह, 29 जनवरी को ‘बीटिंग रिट्रीट’ समारोह के लिए बैठने के स्थानों का नाम भारतीय वाद्ययंत्रों - बांसुरी, डमरू, एकतारा, एसराज, मृदंगम, नगाड़ा, पखावज, संतूर, सारंगी, सरिंदा, सरोद, शहनाई, सितार, सुरबहार, तबला और वीणा के नाम पर रखा जाएगा। 

 ‘वंदे मातरम’ थीम वाले बैनर उड़ाए जाएंगे

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा परेड में मुख्य अतिथि होंगे। रक्षा सचिव आर के सिंह ने 16 जनवरी को साउथ ब्लॉक में प्रेस वार्ता में बताया कि निमंत्रण कार्ड पर राष्ट्र गीत की 150वीं वर्षगांठ का ‘लोगो’ होगा और परेड के अंत में ‘वंदे मातरम’ थीम वाले बैनर के साथ गुब्बारों का एक गुच्छा हवा में छोड़ा जाएगा। 

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