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मुंबई ब्लास्ट केस: बॉम्बे हाई कोर्ट के 12 लोगों को बरी करने के फैसले को महाराष्ट्र ATS ने SC में दी चुनौती, कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार

Reported By : Atul Bhatia Written By : Rituraj Tripathi Published : Jul 22, 2025 11:48 am IST, Updated : Jul 22, 2025 12:07 pm IST

7/11 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया था। अब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।

SC- India TV Hindi
Image Source : PTI/FILE सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली: 7/11 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया था। अब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को महाराष्ट्र ATS ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और सुप्रीम कोर्ट मामले पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है।

गुरुवार को होगी मामले में सुनवाई

CJI की बेंच में SG तुषार मेहता ने मामले पर सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि इस मामले में जल्द सुनवाई की जरूरत है। CJI ने कहा कि गुरुवार को मामले पर सुनवाई होगी। बता दें कि सोमवार को ही बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई ट्रेन ब्लास्ट मामले में आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया है, जिसके खिलाफ महाराष्ट्र ATS ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है।

7/11 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस क्या है?

7/11 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस 11 जुलाई 2006 को मुंबई के उपनगरीय रेल नेटवर्क से जुड़ा है। यहां 11 मिनट में 7 बम विस्फोट हुए थे, जिसमें 189 लोग मारे गए थे और 827 लोग घायल हुए थे। बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले में सोमवार को फैसला सुनाया और 12 आरोपियों को बरी कर दिया। इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा था?

671 पन्नों के निर्णय में हाई कोर्ट ने कहा, ‘‘किसी अपराध के वास्तविक अपराधी को सजा देना, आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने, कानून के राज को बनाए रखने और नागरिकों की सुरक्षा व संरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस और आवश्यक कदम है, लेकिन किसी मामले को हल करने का झूठा दिखावा करना, यह दिखाना कि आरोपियों को न्याय के कठघरे में लाया गया है, केवल एक भ्रमपूर्ण समाधान की भावना पैदा करता है। ऐसा भ्रामक निष्कर्ष न केवल जनता के विश्वास को कमजोर करता है, बल्कि समाज को झूठी तसल्ली देता है, जबकि वास्तव में असली खतरा अब भी आजाद घूम रहा होता है। मूल रूप से, यही इस मामले की सच्चाई को दर्शाता है।’’

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