Wednesday, February 25, 2026
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Rajat Sharma's Blog | चैंपियंस ट्रॉफी के जश्न के वक्त किसने दंगे करवाये?

Written By: Rajat Sharma @RajatSharmaLive Published : Mar 11, 2025 06:20 pm IST, Updated : Mar 12, 2025 06:22 am IST

महू में क्रिकेट फैन्स ने तिरंगा लेकर विजय जुलूस निकाला था, आतिशबाजी की थी, ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम’ के नारे लगा कर सड़कों पर निकले थे। लेकिन जामा मस्जिद रोड पर अचानक माहौल बदला। मस्जिद में तरावीह नमाज़ का वक्त था। कुछ लोग मस्जिद से निकले और जुलूस को वापस लौटने को कहा।

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Image Source : INDIA TV इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।

चैंपियंस ट्रॉफी लेकर हमारे चैंपियन क्रिकेटर स्वदेश लौट आए हैं। मुंबई एयरपोर्ट पर खिलाडियों का शानदार स्वागत हुआ। देश भर में चैंपियंस की वाहवाही हो रही है, लेकिन हैरानी की बात है कि मध्य प्रदेश के महू में ट्रॉफी जीतने के कुछ ही मिनट बाद दंगा हुआ। कई दुकान, गाड़ियां फूंक दी गई, पथराव हुआ। महू में क्रिकेट फैन्स ने तिरंगा लेकर विजय जुलूस निकाला था, आतिशबाजी की थी, ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम’ के नारे लगा कर सड़कों पर निकले थे। लेकिन जामा मस्जिद रोड पर अचानक माहौल बदला। मस्जिद में तरावीह नमाज़ का वक्त था। कुछ लोग मस्जिद से निकले और जुलूस को वापस लौटने को कहा। मारपीट, पत्थरबाज़ी शुरू हुई। पथराव करने वाले पूरी तैयारी के साथ आए थे। उनके हाथों में पत्थर और डंडे थे, मुंह पर कपड़ा बंधा हुआ था, दंगाइयों ने पेट्रोल बम फेंके। सड़क पर खड़ी बाइक्स को जलाया, दुकानों और वाहनों को आग के हवाले किया। मुझे नहीं लगता कि महू में ये हिंसा इसीलिए हुई कि टीम इंडिया की जीत से किसी को मिर्ची लगी। चैंपियंस ट्रॉफी का जश्न तो बहाना था। महू में टकराव का माहौल पहले से बनाया गया था और इसमें दोष किसी एक पक्ष का नहीं है। जीत का जश्न मनाने वाले ‘भारत माता की जय’ के नारे लगा रहे थे। ये बात मस्जिद में मौजूद लोगों को बुरी लगी। उन्होंने इसे अपनी तौहीन समझा। नाराज हो गए, भीड़ इकट्ठी की और हिंदुओं पर हमला कर दिया। भावनाओं से भड़की हुई भीड़ जब दंगा करती है तो वो बेकाबू हो जाती है। फिर कोई उसे रोक नहीं पाता। इसीलिए लोग घायल हुए, दुकानें जलीं, गाड़ियां फूंक दी गईं। फिर दूसरे पक्ष ने भी जवाब देने की कोशिश की। अच्छी बात ये कि पुलिस ने समझदारी से काम लिया। बात को बढ़ने नहीं दिया। हिंदुओं को टकराव करने से रोका और दोनों तरफ के लोगों को शांत किया।

मैं महू के लोगों को जानता हूं। यहां ज्यादातर लोग शांति से रहना चाहते हैं पर गिने-चुने लोग ऐसे हैं जिनकी दुकान दंगों से चलती है। ऐसे लोगों को पहचानने की जरूरत है। अलग-थलग करने की जरूरत है। अब टीम इंडिया भारत लौट आई है तो महू में भी सबको मिलकर खिलाडियों का स्वागत करना चाहिए। जीत का जश्न सबको मिलकर मनाना चाहिए। कुछ दिन पहले तक जो लोग टीम इंडिया के खिलाडियों को निशाना बना रहे थे, चैंपियन्स ट्रॉफी जीतने के बाद वो भी तारीफ में कसीदे पढ़ रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने कैप्टन रोहित शर्मा को मोटा और सबसे Un-Impressive कैप्टन बताया था लेकिन जीत के बाद टीम इंडिया को उन्होंने बधाई दी, खासतौर पर रोहित शर्मा की 76 रनों की शानदार पारी की तारीफ की। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने तो चैंपियन्स ट्रॉफी में मैच के दौरान रोज़ा न रखने पर मोहम्मद शमी को जमकर कोसा था, इस्लाम से खारिज करने की बात कही थी लेकिन उन्हीं मौलाना ने मोहम्मद शमी को देश का नाम ऊंचा करने वाला बताया, और कहा कि टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन किया, अब मोहम्मद शमी जब घर लौटें तो रमजान के दौरान जो रोज़े छूट गए हैं उनकी भरपाई कर लें। सोशल मीडिया पर बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो टीम इंडिया में हिंदू और मुसलमान देखते हैं। किसी प्लेयर में ब्राह्मण, तो किसी में सिख नजर आता है। ऐसे विभाजनकारी लोगों का बायकॉट करना चाहिए। उन्हें वो तस्वीर दिखानी चाहिए, जब जीत के बाद विराट कोहली ने मोहम्मद शमी की मां के पैर छुए। उन्हें वो तस्वीर दिखानी चाहिए जब ऋषभ पंत ने शुभमन गिल के पिता के साथ डांस किया। उन्हें वो तस्वीर भी दिखानी चाहिए जब सुनील गावस्कर झूमकर नाच उठे। जैसे शमा मोहम्मद ने रोहित की तारीफ की, जैसे मौलाना बरेलवी शमी के मामले में पलट गए, वैसे ही अगर किसी के मन में दुर्भावना है, तो उसे भूलकर जीत का जश्न मनाना चाहिए। अगर किसी को पुरानी दुश्मनी मिटाने का बहाना चाहिए, तो चार दिन बाद होली का त्योहार है। इस बार की होली पर सबको मिलकर चैंपियंस ट्रॉफी की जीत को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाना चाहिए।

RJD को बागेश्वर धाम बाबा से डर क्यों लगता है?

बिहार में बागेश्वर धाम वाले पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की पांच दिन की कथा में लाखों श्रद्धालु आए। गोपालगंज में सोमवार को धीरेंद्र शास्त्री की कथा का आखिरी दिन था। पिछले दो दिन में कथा में भारी भीड़ जुटी, लाखों लोग कथा सुनने पहुंच गए। खुद धीरेन्द्र शास्त्री को वीडियो जारी करके भक्तों से अपील करनी पड़ी कि वो कथा में न आएं, घर पर बैठकर टीवी पर उनकी कथा सुनें क्योंकि इतनी भारी भीड़ के इंतजाम नहीं हैं। धीरेन्द्र शास्त्री की अपील के बावजूद लाखों लोग सोमवार को उनकी कथा में पहुंचे। लोगों का उत्साह देखकर धीरेन्द्र शास्त्री ने कहा कि उन्हें पूरा यकीन है कि वो दिन दूर नहीं जब भारत हिंदू राष्ट्र बनेगा और बिहार पहला राज्य होगा जो हिंदू राज्य बनकर उभरेगा। धीरेंद्र शास्त्री ने वादा किया कि वो बहुत जल्द फिर बिहार आएंगे। लेकिन आरजेडी, सीपीएम और कांग्रेस के नेताओं ने धीरेन्द्र शास्त्री की कथा का विरोध किया। वे बाबा को बीजेपी का एजेंट बता रहे हैं। लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने कहा कि बीजेपी चाहे जितना जोर लगा ले, कितने भी स्वयंभू चोलाधारी बाबाओं को उतार दे, लेकिन बिहार में धार्मिक सौहार्द्र बिगाड़ने का उसका मंसूबा कामयाब नहीं होगा। नोट करने वाली बात ये है कि जब रोहिणी आचार्य का ये ट्वीट आया, उस वक्त उनके मामा सुभाष यादव के बेटे रणधीर यादव और बेटी अलका यादव बाबा बागेश्वर का आशीर्वाद ले रहे थे।

सुभाष यादव के बेटा-बेटी तो बाबा का आशीर्वाद लेकर चुपचाप निकल गए लेकिन पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने धीरेंद्र शास्त्री को नटवरलाल, फ्रॉड, पाखंडी कह दिया। पप्पू यादव ने कहा कि बाबा चुनाव से पहले नफरत की दुकान लगाने आए हैं, अगर उनका बस चलता तो ऐसे बाबाओं को जेल भेज देते। आज के ज़माने में जब नेता भीड़ जुटाने के लिए लाखों रुपये खर्च करते हैं, बागेश्वर धाम वाले बाबा की कथा सुनने के लिए लाखों लोग अपने आप आ रहे हैं, ये वाकई हैरान करने वाली बात है। नेता तो रिक्वेस्ट करके भीड़ को बुलाते हैं और ये बाबा भीड़ से रिक्वेस्ट कर रहे हैं कि वो घर वापस चले जाएं, क्योंकि जगह कम पड़ गई है। ये चमत्कार से कम नहीं है। अब सवाल ये है कि जिसके प्रति लोगों का इतना आकर्षण है, RJD के नेता उन पंडित धीरेंद्र शास्त्री का विरोध क्यों कर रहे हैं? ये समझना भी कोई रॉकेट साइंस नहीं है। RJD की राजनीति में मुस्लिम वोट बैंक एक बड़ी जगह है और बाबा बागेश्वर हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं। इसीलिए उनका विरोध करना RJD की राजनीति को सूट करता है। बिहार में चुनाव आने वाले हैं। कोई भी पक्ष इन बातों को हल्के से नहीं ले सकता। इसीलिए जैसे-जैसे चुनाव करीब आएंगे, ये स्वर और तीखे होते जाएंगे।

राज ठाकरे को गंगाजल क्यों गंदा लगा?

महाराष्ट्र  में महाकुंभ और गंगाजल पर सियासत हो रही है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने महाकुंभ में गंगाजल पीने वालों का मज़ाक़ उड़ाया था। पुणे में अपनी पार्टी के 19वें स्थापना दिवस के अवसर पर राज ठाकरे ने कहा कि गंगा जल साफ़ नहीं, पीने लायक़ नहीं है। राज ठाकरे ने कहा कि उनकी पार्टी के नेता बाला नंदगांवकर महाकुंभ गए थे, वहां से गंगाजल लाए और उन्हें पीने के लिए कहा तो उन्होंने साफ़ मना कर दिया। राज ठाकरे ने कहा कि लोगों को अंधश्रद्धा से बचना चाहिए, इससे नुक़सान होता है। राज्य के मंत्री नीतेश राणे ने राज ठाकरे के बयान को हिंदुओं की आस्था का अपमान बताया। नीतेश राणे ने कहा कि राज ठाकरे में हिम्मत है, तो किसी और मज़हब के बारे में इस तरह की बात बोलकर दिखाएं।

गंगाजल से जुड़ी नई बात आपको बता दूं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट आई है। ये रिपोर्ट नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल को भेजी गई है। इसमें कहा गया है कि गंगा का पानी महाकुंभ के दौरान नहाने के लिए योग्य था। अब ऐसा लगता है कि राज ठाकरे ने जोश में आकर गंगा का पानी दूषित होने की बात कह तो दी, लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि गलती हो गई क्योंकि ये मामला लोगों की श्रद्धा से जुड़ा है। मां गंगा का जल लोगों की आस्था और विश्वास से जुड़ा है और जब उद्धव ठाकरे की तरफ से प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि वो प्रयागराज गईं थीं, उन्हें तो पानी से दिक्कत नहीं हुई और जब रोहित पवार ने कहा कि उन्होंने भी महाकुंभ में डुबकी लगाई है और वो गंगाजल लेकर आए, तब जाकर राज ठाकरे को समझ में आया कि दांव उल्टा पड़ गया और उन्होंने अपनी पार्टी के प्रवक्ता से सफाई दिलवाई कि उनका इरादा किसी के अपमान का नहीं था। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। तीर कमान से निकल चुका था। राज ठाकरे को इसका नुकसान तो होगा। (रजत शर्मा)

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 10 मार्च, 2025 का पूरा एपिसोड

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