रजत शर्मा के डीपफेक वीडियो 36 घंटे में यू-ट्यूब से हटाएं, पढ़ें दिल्ली हाईकोर्ट का पूरा आदेश
रजत शर्मा के डीपफेक वीडियो 36 घंटे में यू-ट्यूब से हटाएं, पढ़ें दिल्ली हाईकोर्ट का पूरा आदेश
Edited By: Niraj Kumar@nirajkavikumar1
Published : Nov 08, 2025 08:56 pm IST,
Updated : Nov 08, 2025 09:31 pm IST
इंडिया टीवी के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा के हक़ में फैसला सुनाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने Google LLC को रजत शर्मा के डीपफेक वीडियो वाले यूट्यूब चैनल 36 घंटे में हटाने का आदेश दिया है।
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इंडिया टीवी के चेयरमैन और एडिटर इन चीफ रजत शर्मा
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने पर्सनैलिटी राइट्स से जुड़े एक मामले में इंडिया टीवी के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा के हक़ में फैसला सुनाते हुए Google LLC को रजत शर्मा के डीपफेक वीडियो वाले यूट्यूब चैनल 36 घंटे में हटाने का आदेश दिया है। दरअसल, कुछ लोग यूट्यूब पर लगातार रजत शर्मा के बारे में फर्जी डीपफेक वीडियो पोस्ट कर रहे थे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के इस्तेमाल से रजत शर्मा के ओरिजनल वीडियो को डॉक्टर्ड कर रहे थे और उनके नाम से दर्शकों को गलत खबरें और सलाह दे रहे थे। आइये जानते हैं कि दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा
दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वादी (रजत शर्मा) ने अपने हलफनामे में कहा है कि ये एडिटेड वीडियो हैं। वादी (रजत शर्मा) के द्वारा प्रतिवादियों (डीफफेक वाले यूट्यूब चैनल्स और Google LCC ) के खिलाफ मांगी गई टेक-डाउन (वीडियो हटाने के संबंध में) के निर्देश जारी करने का मामला बनाया गया है। प्रतिवादी नंबर 17 (Google LCC) को निर्देश दिया जाता है कि वह इस आदेश के अपलोड होने के 36 घंटे के भीतर प्रतिवादी नंबर 14 और 16 (जिन दो यूट्यूब चैनल पर रजत शर्मा के डीपफेक वीडियो हैं) के YouTube चैनल हटा दे।
इसके साथ ही, कोर्ट ने गूगल से यह भी कहा कि वह इन चैनलों की जानकारी BSI, कॉन्टेक्ट डिटेल्स और मोनेटाइजेशन डेटा भी एक हफ्ते के भीतर वादी (रजत शर्मा) को मुहैया कराएं।
इसके अलावा, वादी (रजत शर्मा) के वकील का कहना है कि वादी को बार-बार इस कोर्ट में आने की ज़रूरत न पड़े, इसके लिए प्रतिवादी नंबर 17 (Google LCC) को इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 [‘IT Rules, 2021’] के रूल 4(4) के अनुसार ऐसे कंटेंट को अपलोड होने से रोकने के लिए निर्देश दिया जा सकता है।
अदालत ने आदेश के पैराग्राफ 27 में यह भी कहा कि वादी (रजत शर्मा) इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 [‘IT Rules, 2021’] के रूल 4(4) को लागू करने में मदद करने के लिए प्रतिवादी नंबर 17 (Google LCC) के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं। अदालत ने वादी (रजत शर्मा) और प्रतिवादी नंबर 17(Google LCC) को एक आपसी मीटिंग करने का निर्देश दिया। इस मीटिंग में वादी (रजत शर्मा) उन्हें सीधे बता सकें कि यूट्यूब में उनके और कौन-कौन से डीपफेक वीडियो हैं जिन्हें अदालत द्वारा पारित आदेश के द्वारा रोक दिया गया है। अदालत ने प्रतिवादी नंबर 17 (Google LCC) को यह सुनिश्चित करने का प्रयास करने का निर्देश दिया कि डीपफेक से जुड़े कंटेंट उसके कंप्यूटर रिसोर्स से हटा दिए जाएं ताकि वादी (रजत शर्मा) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और YouTube चैनलों पर अपलोड किए गए ऐसे डीप फेक कंटेंट को ढूंढते रहने का प्रयास न करना पड़े।
अदालत ने अपनी राय दी कि यह न केवल वादियों के अधिकारों और वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक है, बल्कि यह ऐसे कंटेंट का उपभोग करने वाले अनजान यूजर्स तक गलत सूचना फैलने से रोकने में भी मदद करेगा।
अदालत ने कहा कि प्रतिवादी नंबर 17 (Google LCC) के वकील का कहना है कि अगर पैराग्राफ 27 में दिए गए निर्देशों को लागू करने में कोई तकनीकी दिक्कत आती है, तो उन्हें एफिडेविट फाइल करने की आज़ादी दी जाए। उन्हें इस तरह की आजादी दी जाती है।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि वादी (रजत शर्मा) को किसी भी अन्य झूठे/फर्जी वीडियो/कंटेंट के संबंध में प्रतिवादी नंबर 17 (Google LCC) से संपर्क करने की आज़ादी होगी, ताकि उन्हें प्रतिवादी नंबर 17 (Google LCC) के ध्यान में लाया जा सके और इस मामले में पेश होने वाले वकील को भी इसकी कॉपी दी जा सके, जो इस तरह के अनुरोध की समीक्षा करने के बाद उन्हें हटा देगा। अगर प्रतिवादी नंबर 17 (Google LCC)को कोई आपत्ति है तो वह इसकी जानकारी वादी (रजत शर्मा) को देगा ताकि वह अपने उपाय कर सकें।