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डीके से तनातनी के बीच सिद्धारमैया का कमाल, आज की इस रिकॉर्ड की बराबरी, कल तोड़ देंगे

Edited By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX Published : Jan 06, 2026 02:59 pm IST, Updated : Jan 06, 2026 03:02 pm IST

कर्नाटक CM सिद्धारमैया ने देवराज उर्स के सबसे लंबे कार्यकाल के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। डीके शिवकुमार से तनातनी के बीच उन्होंने 5 साल पूरे करने का भरोसा जताया, लेकिन फैसला कांग्रेस हाईकमान पर छोड़ा। कैबिनेट बदलाव पर भी उन्होंने चुप्पी साधी।

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Image Source : PTI कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया।

मैसूर: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ चल रही तनातनी के बीच मंगलवार को देवराज उर्स का सबसे लंबे समय तक सीएम रहने का रिकॉर्ड तोड़ दिया। उन्होंने साथ ही पूरे 5 साल का कार्यकाल पूरा करने का भरोसा जताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यह फैसला कांग्रेस हाईकमान को करना है। सिद्धारमैया ने कैबिनेट में बदलाव पर भी बात की और कहा कि जब हाईकमान बुलाएगा, तब चर्चा करेंगे। बता दें कि सिद्धारमैया अपनी दूसरी पारी में मुख्यमंत्री हैं। 6 जनवरी को उन्होंने देवराज उर्स के 2,792 दिनों के रिकॉर्ड की बराबरी की और 7 जनवरी को इसे पार कर जाएंगे।

'मैंने रिकॉर्ड तोड़ने के लिए राजनीति नहीं की'

बता दें कि यह रिकॉर्ड ऐसे समय आया है जब सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी में सत्ता की खींचतान बढ़ गई है। राज्य में मुख्यमंत्री बदलने की अफवाहें हैं, क्योंकि सरकार का आधा कार्यकाल 20 नवंबर को पूरा हो चुका है। ये अफवाहें 2023 में सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच कथित 'पावर-शेयरिंग' समझौते से जुड़ी हैं। सिद्धारमैया ने मैसूर में कहा, 'मैंने रिकॉर्ड तोड़ने के लिए राजनीति नहीं की। यह बस एक संयोग है। मुझे पता भी नहीं था कि देवराज उर्स कितने साल और दिन मुख्यमंत्री रहे। आज लोगों की दुआओं से मुझे देवराज उर्स का रिकॉर्ड बराबर करने का मौका मिला। कल इसे तोड़ दूंगा।'

'मुझे नहीं पता कि हाईकमान कब फैसला करेगा'

जब सिद्धारमैया से पूछा गया कि क्या वे पूरे 5 साल का कार्यकाल पूरा करके एक और रिकॉर्ड बनाएंगे, तो उन्होंने कहा, 'यह फैसला कांग्रेस हाईकमान को करना है। मुझे नहीं पता कि हाईकमान कब फैसला करेगा।' लेकिन जब पूछा गया कि क्या उन्हें भरोसा है कि वे मौजूदा कार्यकाल पूरा करेंगे और हाईकमान उनके पक्ष में फैसला करेगा, तो उन्होंने जवाब दिया, 'मुझे भरोसा है। अगर भरोसा नहीं होता, तो मैं मुख्यमंत्री कैसे होता? सब कुछ हाईकमान के फैसले पर निर्भर है।' सोमवार को मैसूर में AICC महासचिव केसी वेणुगोपाल से उनकी मुलाकात पर सिद्धारमैया ने कहा कि वेणुगोपाल वायनाड से बेंगलुरु होते हुए दिल्ली जा रहे थे और मैसूर से गुजर रहे थे। उन्होंने कहा, 'वे मैसूर में थे और मैं भी यहां था, इसलिए हम मिले।'

जानें कितने दिन तक मुख्यमंत्री रहे थे देवराज उर्स

सिद्धारमैया ने कैबिनेट में बदलाव पर कोई चर्चा होने से इनकार किया। बदलाव कब होगा, इस पर उन्होंने कहा, 'देखते हैं, जब वे मुझे चर्चा के लिए बुलाएंगे, तब मैं चर्चा करूंगा।' बता दें कि देवराज उर्स को कर्नाटक में सामाजिक न्याय और भूमि सुधारों का प्रतीक माना जाता है। वे 2 बार मुख्यमंत्री रहे, पहली बार 20 मार्च 1972 से 31 दिसंबर 1977 तक 2,113 दिन, और दूसरी बार 28 फरवरी 1978 से 7 जनवरी 1980 तक 679 दिन। सिद्धारमैया उर्स के बाद इकलौते मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने 5 साल पूरे किए। उनकी पहली पारी 13 मई 2013 से 15 मई 2018 तक 1,829 दिन चली। उनकी दूसरी पारी 20 मई 2023 से अब तक 963 दिन हो चुकी है।

'मैंने एक बार विधायक बनने के बारे में सोचा था'

सिद्धारमैया ने कहा, 'मैंने ज्यादा से ज्यादा एक बार विधायक बनने के बारे में सोचा था। मैं विधायक बना, मुझे मंत्री, उपमुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता बनने का मौका मिला और मुख्यमंत्री भी बना। मुझे मौके मिले और मैंने अपना काम किया। देवराज उर्स और मैं दोनों मैसूर से हैं, लेकिन अलग-अलग समय के हैं। वे 1972 से 1980 तक थे। मैं 2013-18 और 2023 से अब तक 2 बार मुख्यमंत्री रहा।' सिद्धारमैया ने अपनी राजनीतिक यात्रा पर संतोष जताया और कहा कि लोगों की सेवा करना उन्हें खुशी देता है। उन्होंने कहा, 'राजनीति का मतलब है गरीबों, दलितों, पिछड़ों को न्याय दिलाना और उनका काम करना।'

सिद्धारमैया के जन्मदिन पर देसी मुर्गे की दावतें

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि वह लोगों की दुआओं से राजनीति में आगे बढ़े हैं। सिद्धारमैया के प्रशंसकों ने उनकी इस उपलब्धि पर कई जगहों पर जश्न मनाया। उन्होंने उनके पसंदीदा 'नाटी कोली' या देसी मुर्गे के व्यंजन बनाकर दावतें दीं। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे 'नाटी कोली' के ब्रांड एंबेसडर बन गए हैं, तो सिद्धारमैया ने कहा, 'मुझे इसके बारे में पता नहीं और कौन दावतें दे रहा है। मैं गांव से हूं और हमारे गांव में रिश्तेदार आने पर नाटी कोली के व्यंजन बनते थे। गांव के कई लोग इसे पसंद करते हैं, लेकिन मैं मुख्यमंत्री हूं तो थोड़ी पब्लिसिटी हो रही है।'

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