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भाजपा ने आर के सिंह को किया सस्पेंड, ये सुनते ही उन्होंने दे दिया इस्तीफा, जानें क्या लिखा

 Edited By: Kajal Kumari @lallkajal
 Published : Nov 15, 2025 06:58 pm IST,  Updated : Nov 15, 2025 06:58 pm IST

बिहार चुनाव के दौरान भाजपा और एनडीए के खिलाफ बयानबाजी करने वाले बीजेपी नेता आर के सिंह को पार्टी ने सस्पेंड कर दिया। लेकिन उसके बाद आर के सिंह ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। जानें उन्होंने क्या लिखा....

आर के सिंह ने भाजपा से दिया इस्तीफा- India TV Hindi
आर के सिंह ने भाजपा से दिया इस्तीफा Image Source : FILE PHOTO (PTI)

पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता आर.के. सिंह को पार्टी ने “पार्टी-विरोधी गतिविधियों” को लेकर छह साल तक निलंबित कर दिया। सबसे बड़ी बात ये है कि यह फैसला एनडीए गठबंधन की बिहार विधानसभा चुनाव में भारी जीत के एक दिन बाद लिया गया है। पार्टी से निकाले जाने के कुछ ही देर बाद आर के सिंह ने शनिवार को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।

भाजपा ने क्यों आर के सिंह को पार्टी से निकाला

बता दें कि आर के सिंह, बिहार के आरा से पूर्व सांसद रहे हैं और बीते कुछ महीनों से वो लगातार भाजपा और एनडीए की कड़ी आलोचना कर रहे थे और उन्होंने नीतीश कुमार सरकार पर कई तरह के आरोप भी लगाए थे, जिसमें बिहार में एक पावर प्लांट के कमीशनिंग में घोटाले को लेकर उनके आरोपों ने राज्य में चुनाव से कुछ दिन पहले ही बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था। उस वक्त चुनाव को लेकर भाजपा ने उनपर कोई एक्शन नहीं लिया, लेकिन चुनाव का रिजल्ट आते ही पार्टी से निकाल दिया। 

आर के सिंह ने पार्टी से दिया इस्तीफा, जानें क्या लिखा

प्रिय नड्डा जी,

मुझे मीडिया के कुछ सदस्यों द्वारा एक पत्र मिला है (प्रति संलग्न) जिसमें कहा गया है कि पार्टी ने मुझे पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निलंबित करने का निर्णय लिया है। साथ ही, मुझसे पूछा गया है कि मुझे पार्टी से क्यों न निष्कासित कर दिया जाए। पत्र में उन पार्टी विरोधी गतिविधियों का उल्लेख नहीं है जिनका मुझ पर आरोप लगाया गया है। मैं उन आरोपों के लिए कारण बताओ नोटिस नहीं दे सकता जिनका उल्लेख नहीं किया गया है।

कारण बताओ नोटिस संभवतः आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को टिकट वितरण के खिलाफ मेरे बयान के कारण है। यह बयान पार्टी विरोधी नहीं है। राजनीति के अपराधीकरण को रोकना और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना राष्ट्र, समाज और पार्टी के हित में है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि पार्टी के कुछ लोग इससे सहमत नहीं हैं। मैंने राज्य भाजपा कार्यालय को एक उत्तर दे दिया है (प्रति संलग्न)।
मैं भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूं।
सादर

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