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यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने लव जिहाद अध्यादेश को मंजूरी दी

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने लव जिहाद अध्यादेश को मंजूरी दे दी। इससे पहले उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने 'लव जिहाद' की घटनाओं को रोकने के लिए 24 नवंबर को अध्यादेश को मंजूरी कर इसे राज्यपाल के पास भेजा था।

Edited by: IndiaTV Hindi Desk
Published : Nov 28, 2020 10:59 am IST, Updated : Nov 28, 2020 10:59 am IST
यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने लव जिहाद अध्यादेश को मंजूरी दी- India TV Hindi
Image Source : PTI यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने लव जिहाद अध्यादेश को मंजूरी दी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने लव जिहाद अध्यादेश को मंजूरी दे दी। इससे पहले उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने 'लव जिहाद' की घटनाओं को रोकने के लिए 24 नवंबर को अध्यादेश को मंजूरी कर इसे राज्यपाल के पास भेजा था। इस अध्यादेश के तहत विवाह के लिए छल, कपट, प्रलोभन या बलपूर्वक धर्मांतरण कराए जाने पर अधिकतम 10 वर्ष कारावास और जुर्माने की सजा का प्रावधान है। राज्य सरकार के प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने यह जानकारी दी थी कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में 'उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020' को मंजूरी दे दी गई। .

उन्होंने बताया कि इस अध्यादेश के तहत ऐसे धर्म परिवर्तन को अपराध की श्रेणी में लाया जाएगा जो छल, कपट, प्रलोभन, बलपूर्वक या गलत तरीके से प्रभाव डालकर विवाह या किसी कपट रीति से एक धर्म से दूसरे धर्म में लाने के लिए किया जा रहा हो। उन्होंने बताया कि इसे गैर जमानती संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखने और उससे संबंधित मुकदमे को प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के न्यायालय में विचारणीय बनाए जाने का प्रावधान किया जा रहा है। सिंह ने बताया कि सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामले में संबंधित सामाजिक संगठनों का पंजीकरण रद्द कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

उन्होंने बताया कि कोई धर्मांतरण छल, कपट, जबरन या विवाह के जरिए नहीं किया गया है, इसके सबूत देने की जिम्मेदारी धर्म परिवर्तन कराने वाले तथा करने वाले व्यक्ति पर होगी। उन्होंने बताया के अध्यादेश का उल्लंघन करने पर कम से कम एक साल और अधिकतम पांच साल कैद तथा 15,000 रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है, जबकि नाबालिग लड़की, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की महिला के मामले में यह सजा तीन साल से 10 वर्ष तक की कैद और 25,000 रुपये जुर्माने की होगी। इसके अलावा सामूहिक धर्म परिवर्तन के संबंध में अधिकतम 10 साल की कैद और 50,000 रुपये जुर्माने की सजा का प्रावधान किया गया है। प्रवक्ता ने बताया कि अध्यादेश में धर्म परिवर्तन के इच्छुक लोगों को जिला अधिकारी के सामने एक निर्धारित प्रोफार्मा पर दो माह पहले इसकी सूचना देनी होगी। उन्होंने बताया कि इजाजत मिलने पर वे धर्म परिवर्तन कर सकेंगे। इसका उल्लंघन करने पर छह माह से तीन साल तक की कैद और 10,000 रुपये जुर्माने की सजा तय की गई है। 

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बाद में पत्रकारों से कहा कि प्रदेश के अंदर ऐसी घटनाओं पर अब पूर्ण विराम लगेगा। राज्य सरकार द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक झूठ बोलकर, छल-प्रपंच करके धर्म परिवर्तन करने-कराने वालों से उत्तर प्रदेश सरकार पूरी सख्ती से निपटेगी। बयान के मुताबिक महज शादी के लिए अगर लड़की का धर्म बदला गया तो न केवल ऐसी शादी अमान्य घोषित कर दी जाएगी, बल्कि धर्म परिवर्तन कराने वालों को दस साल तक जेल की सजा भी भुगतनी पड़ सकती है। 

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों कथित ‘लव जिहाद’ के खिलाफ कानून बनाने का ऐलान किया था। उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने कानून विभाग को 'लव जिहाद' के खिलाफ सख्त कानून लाने का प्रस्ताव हाल में भेजा था। पिछले महीने जौनपुर और देवरिया में हुए उपचुनावों के लिए रैलियों को संबोधित करते हुए, योगी ने कहा था, ‘‘उनकी सरकार 'लव जेहाद' से निपटने के लिए एक कानून लेकर आएगी और उन्‍होंने ऐसे तत्‍वों को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर महिलाओं और बेटियों के साथ अत्‍याचार करने वाले नहीं सुधरे तो उनका राम नाम सत्‍य होगा।’’ 

पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश राज्‍य विधि आयोग ने सरकार को एक रिपोर्ट पेश की थी जिसमें जबरन धर्मांतरण के लिए एक नया कानून बनाने की पेशकश की गई थी। उस रिपोर्ट में कहा गया कि आयोग का विचार है कि मौजूदा कानूनी प्रावधान पर्याप्‍त नहीं है इसलिए इस पर नये कानून की जरूरत है। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि प्रेम विवाह के नाम धर्म परिवर्तन के लिए महिलाओं के साथ क्रूरता और यहां तक कि हत्‍या की कुछ घटनाएं प्रकाश में आई हैं। उन्‍होंने कहा कि अक्‍सर यह देखा गया है कि इस तरह‍ का कृत्‍य संगठित तरीके से किया जा रहा है। उन्‍होंने दावा किया कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऐसे अपराधों की जाँच की जाए और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाए। उन्‍होंने कहा कि कानपुर में पुलिस ने ‘लव जेहाद’ के एक मामले में एक विशेष जांच दल का गठन किया था।

इनपुट-भाषा

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