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Uttar Pradesh New Jail Manual: अंग्रेजों के जमाने के जेल नियमों में बदलाव, कालापानी की सजा खत्म, अब कैदियों को मिलेंगी ये सुविधाएं

Uttar Pradesh New Jail Manual: उत्‍तर प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को करीब 81 साल पुराने अंग्रेजों के जमाने से चले आ रही जेल नियमावली में बदलाव करते हुए उत्तर प्रदेश जेल मैनुअल-2022 को जारी किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

Edited By: Swayam Prakash @@SwayamNiranjan
Published : Aug 16, 2022 09:28 pm IST, Updated : Aug 16, 2022 09:28 pm IST
New Jail Manual approved in Uttar Pradesh- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV New Jail Manual approved in Uttar Pradesh

Highlights

  • यूपी में बदल गए करीब 81 साल पुराने जेल नियम
  • अंग्रेजों के जमाने से चले आ रही थी जेल नियमावली
  • उत्तर प्रदेश जेल मैनुअल-2022 के प्रस्ताव को मंजूरी

Uttar Pradesh New Jail Manual: उत्‍तर प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को करीब 81 साल पुराने अंग्रेजों के जमाने से चले आ रही जेल नियमावली में बदलाव करते हुए उत्तर प्रदेश जेल मैनुअल-2022 को जारी किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। नयी व्यवस्था में बंदियों, विशेष तौर से महिला बंदियों को विशेष सुविधाएं देने का फैसला किया गया है और कालापानी की सजा के लिए ट्रांसफर की व्यवस्था अब समाप्त कर दी गई है। लोकभवन में मंत्रिमंडल की बैठक के बाद फैसले की जानकारी देते हुए कारागार और होमगार्ड राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) धर्मवीर प्रजापति ने पत्रकारों को बताया कि मंत्रिमंडल ने उप्र जेल मैनुअल-2022 को जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

सभी राज्यों के कारागारों में ये प्रिजन मैनुअल हो लागू

मंगलवार को जारी एक सरकारी बयान के अनुसार वर्तमान में जारी जेल मैनुअल का संस्करण 1941 में लागू हुआ था, जिसमें समय-समय पर आवश्यकतानुसार बदलाव किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर बीपीआर एंड डी (ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट नई दिल्ली) द्वारा देश के सभी राज्यों के कारागारों में एक समान जेल मैनुअल लागू किए जाने के लिये मॉडल प्रिजन मैनुअल-2003 और 2016 की संरचना की गयी। बयान में कहा गया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा इस मॉडल प्रिजन मैनुअल को देश के सभी राज्यों में लागू करने की अपेक्षा की गयी है। इसके अनुसार, उत्तर प्रदेश जेल मैनुअल के कुछ अप्रासंगिक नियमों को खत्म करते हुए, कई नियमों में संशोधन और नई व्यवस्थाओं को शामिल करते हुए उत्तर प्रदेश जेल मैनुअल-2022 को जारी किए जाने का मंत्रिमंडल ने मंगलवार को निर्णय किया है। 

कालापानी की सजा के लिए कैदी नहीं होंगे ट्रांसफर
मंत्री ने पत्रकारों को बताया कि कालापानी की सजा के लिए ट्रांसफर की व्यवस्था अब समाप्त कर दी गई है। (अंग्रेजों के जमाने से कालापानी की सजा के बाद बंदी को अंडमान निकोबार की जेल में भेजने का प्रावधान था।) उन्होंने कहा कि नये मैनुअल में लॉकप जेल की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है और इसके अलावा यूरोपीय बंदियों के लिए अलग जेल, रजवाड़ों के बंदी के लिये निर्धारित रिहाई और ट्रांसफर और नेपाल, भूटान, सिक्किम और कश्‍मीर के बंदियों की रिहाई और स्थानांतरण की पुरानी व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। उन्होंने बताया कि नई नियमावली के अनुसार बंदियों की सहभागिता के लिए बंदी पंचायत आयोजित करने की व्यवस्था की गई है। मंत्री ने कहा कि जेलों से सीधे कैदियों की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये हो सके ऐसी व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि ई-प्रिजन प्रणाली के अंतर्गत बंदियों से सम्बंधित सभी सूचनाओं का अनिवार्य कंप्यूटरीकरण किया जाएगा और कारागार मुख्यालय में सूचना प्रौद्योगिकी प्रकोष्ठ की स्थापना की जाएगी और इसके तहत कमांड सेंटर और वीडियो वाल स्थापित होगा। 

महिला कैदियों को अब मिलेंगी ये सुविधाएं 
मंत्री ने बताया कि महिला बंदियों को सलवार सूट पहनने और मंगल सूत्र धारण करने की इजाजत दी गई है। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं और माताओं के लिए पुष्टाहार और मेडिकल सर्विसेस का प्रावधान किया गया है। बयान के अनुसार जेल मैनुअल-2022 में प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कारागार में महिला बंदी के साथ रह रहे तीन से छह साल तक की आयु के बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिये शिशु सदन, समुचित शिक्षा, चिकित्सा, टीकाकरण और चार साल से छह साल तक की उम्र के बच्चों को, उनकी माता की सहमति प्राप्त करने के बाद कारागार के बाहर किसी शिक्षण संस्थान में प्रवेश दिलाया जाएगा। इसमें कहा गया है कि वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप कारागारों में डिटेन्ड महिला बंदियों को सेनेटरी नैपकिन देने का प्रावधान किया गया है। 

सरकार उठाएगी जेल में पैदा हुए बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा  
बंदियों की मानवीय आवश्यकताओं के मद्देनजर उनके परिवारजन और पति/पत्नी की मृत्यु होने पर अंतिम दर्शन का भी प्रावधान किया गया है। प्रत्येक जेल में एक बंदी कल्याण कैंटीन और बंदी कल्याण कोष होगा। बयान में कहा गया है कि नई नियमावली के तहत जेल में जो बच्चा पैदा होगा उसका नामकरण संस्कार वहीं होगा और नामकरण उसके धर्म के मुताबिक धर्मगुरु करेंगे। इसमें कहा गया है कि इतना ही नहीं सरकार इन बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और खानपान की व्यवस्था भी करेगी। 

चार कैटेगरी में बांटी जाएंगी जेलें
प्रजापति ने बताया कि जेलों का निर्धारण पहले जिले के हिसाब से होता था लेकिन अब बंदियों की संख्या के आधार पर जेलों की चार श्रेणी तय होगी। उन्होंने बताया कि A श्रेणी की कारागार 2000 से अधिक बंदियों की होगी और B श्रेणी की कारागार 1500 से 2000 बंदियों की होगी। उन्होंने कहा कि C श्रेणी की एक हजार से 1500 की संख्या और श्रेणी D की कारागार एक हजार तक की बंदियों की संख्या के आधार पर निर्धारित होगी। जेलों में प्रयुक्त होने वाले असलहों के बदलाव की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि जेलों में अब थ्री नॉट थ्री की राइफल की जगह नाइन एमएम की कारबाइन, पिस्टल और इंसास राइफल का उपयोग किया जाएगा। 

त्योहारों पर मिलेगा विशेष खाना
मंत्री ने बताया कि जेल में त्योहार के मौके पर खीर और सेवइयां भी बनाई जाएगी। एक अधिकारी ने बताया कि अगर हिंदू धर्म का कोई त्यौहार होगा तो खीर और इस्लाम धर्म के लोगों को त्यौहार पर सेवई, खजूर और फल दिए जाएंगे। नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने पत्रकारों को बताया कि मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश रक्षा एवं एयरोस्पेस इकाई एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2018 (यथासंशोधित) में संशोधन के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।

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