नई दिल्ली। सरकारी क्षेत्र की कंपनी तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) गैस कारोबार के लिए एक अलग अनुषंगी कंपनी का गठन कर रही है। यह कंपनी उसकी (ओएनजीसी की) परियोजनाओं की गैस खरीद सकती है। ओएनजीसी के निदेशक मंडल ने नई कंपनी के गठन के प्रस्ताव को 13 फरवरी को मंजूरी दी। इसके शत प्रतिशत शेयर ओएनजीसी के पास होंगे। यह जानकारी कंपनी की तिमाही वित्तीय रिपोर्ट में दी गई है। यह कंपनी गैस, एलएनजी, बायोगैस, मीथेन जैसे ईंधनों की खरीद, विपणन एवं व्यापार करेगी।
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इस घटनाक्रम के जानने वाले लोगों ने कहा कि ओएनजीसी की यह अनुषंगी केजी बेसिन की उनकी केजी-डी5 जैसी परियोजनओं की गैस खरीदने के लिए भी बोली लगा सकती है। सरकार ने अक्टूबर 2020 के एक नीतिगत निर्णय के तहत गैस उत्पादकों से जुड़ी कंपनियों को उनसे खुली बोली के तहत गैस की खरीद की छूट दे दी है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की सम्बद्ध कंपनी रिलायंस ओ2सी लि. ने इसी नीति के तहत पांच फरवरी को हुई नीलामी में गैस खरीदी थी।
पॉलिसी में हुए बदलाव की वजह से रिलायंस केजी-डी6 ब्लॉक में नए फील्ड से इस साल यूके की बीपी पीएलसी के साथ मिलकर अतिरिक्त 75 करोड़ स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रति दिन गैस उत्पादन में से दो तिहाई की खरीद करेगी। ओएनजीसी भी अब इस विकल्प पर विचार कर सकती है। नई इकाई भी अब ओएनजीसी द्वारा केजी-डी5 ब्लॉक में अतिरिक्त गैस के उत्पादन के लिए बोली में भाग ले सकती है। प्रतिस्पर्धा और सही मूल्य को सुनिश्चित करने के अलावा ओएनजीसी की सब्सिडियरी खरीदी गई गैस को मैंगलौर रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड को एक मार्जिन पर बेच सकेगी।
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विप्रो कंज्यूमर केयर ने वनलाइफ न्यूट्रीसाइंस में किया निवेश
एफएमसीजी कंपनी विप्रो कंज्यूमर केयर एंड लाइटिंग ने सोमवार को कहा कि उसकी वेंचर कैपिटल इकाई ने हेल्थकेयर ब्रांड वनलाइफ न्यूट्रीसाइंस में निवेश किया है। हालांकि, कंपनी ने यह नहीं बताया कि उसने कितना निवेश किया है।
विप्रो कंज्यूमर केयर एंड लाइटिंग ने एक बयान में कहा कि कंज्यूमर हेल्थकेयर ब्रांड वनलाइफ का स्वामित्व रखने वाली कंपनी वनलाइफ न्यूट्रीसाइंस ने विप्रो कंज्यूमर केयर एंड लाइटिंग की वेंचर कैपिटल शाखा विप्रो कंज्यूमर केयर वेंचर्स से धन जुटाया है। वनलाइफ न्यूट्रीसाइंस की स्थापना 2019 में गौरव अग्रवाल ने की थी। कंपनी इस धन का इस्तेमाल अगले स्तर की वृद्धि में करेगी।