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For Golden Years: आरामदायक रिटायरमेंट जीवन चाहते हैं जीना, तो अपनाएं यह पांच मंत्र

 Published : Feb 14, 2016 08:08 am IST,  Updated : Sep 21, 2016 08:18 pm IST

आरामदायक रिटायरमेंट जीवन पाना बहुत आसान है। रियारमेंट प्लानिंग आपके फाइनेंशियल लक्ष्यों के लिए सबसे अहम होता है। अक्सर लोग इस पर ध्यान नहीं देते हैं।

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For Golden Years: आरामदायक रिटायरमेंट जीवन चाहते हैं जीना, तो अपनाएं यह पांच मंत्र

नई दिल्‍ली। रियारमेंट प्लानिंग आपके फाइनेंशियल लक्ष्यों के लिए सबसे अहम होता है। अक्सर लोग इस पर ध्यान नहीं देते हैं। भारत में लोग अपने बच्चों पर निर्भर रहते हैं। लोगों को यह समझना चाहिए की बच्चे रिटारमेंट का सोल्यूशन नहीं होते हैं। पहले की तुलना में आज लाइफ एक्‍सपेंटेंशी बढ़ गई है। इसलिए लोग रिटारमेंट के बाद लंबी जिंदगी व्यतीत करते हैं, जिसकी वजह से उनके रिटारमेंट के बाद के जीवन को सुरक्षित रखने के लिए ज्यादा खर्चा होता है। आजकल बीमारियों के इलाज का भी खर्चा बढ़ गया है। जरूरी नहीं है कि बच्चे आपकी अच्छे से देखभाल कर सकें। इन सब चीजों को ध्य़ान में रखकर एक महत्वपूर्ण रिटायरमेंट प्लानिंग बहुत जरूरी है। इसमें आप अपना खुद का रिटायरमेंट कॉर्पस बनाएं ताकि बाद में एक खुशहाल जिंदगी जी सकें।

अपने रिटायरमेंट कॉर्पस की राशि तय करें

सबसे पहले अपने आज के खर्चों को तय करें। इसके बाद रिटारमेंट कॉर्पस की गणना करते समय अनुमानित महंगाई दर, रिटारमेंट के लिए शेष वर्ष, अपने रिटायरमेंट कॉर्पस पर कितना रिटर्न चाहते हैं इन सब को तय कर लें। ये वो कुल राशि है, जो आपके रिटारमेंट कॉर्पस के लिए जरूरी है। उदाहरण के तौर पर मान लीजिए आज आपका मासिक खर्चा 25,000 रुपए है, रिटायरमेंट के लिए 30 वर्ष बाकी हैं, महंगाई दर 6 फीसदी है, रेट ऑफ रिटर्न 8 फीसदी है। यानि कि आपको कुल रिटायरमेंट कॉर्पस के लिए 2.15 करोड़ रुपए की जरूरत है। इसके बाद हर महीने अपने रिटायरमेंट कॉर्पस के लिए करने वाले योगदान को कैलकूलेट करें।

निवेश विकल्पों का चयन

रिटायरमेंट योजना में संपत्ति का निवेश समझदारी से होना बहुत जरूरी है। सभी विकल्पों और इंस्ट्रूमेंट्स का चयन ध्यान से करें। आपके रिटायरमेंट पोर्टफोलियो में इक्विटी और डेट का बराबर मिश्रण होना चाहिए। जब आप निवेश की शुरुआत करते हैं तो आपका फोकस इक्विटी होना चाहिए, क्योंकि ये लंबे समय में ज्यादा रिटर्न देता है। वहीं दूसरी ओर जब आपकी रिटायरमेंट की उम्र पास आ रही होती है तो आपको डेट पर फोकस करना चाहिए, क्योंकि डेट में कम जोखिम होता है। आपको बता दें कि बाजार में ऐसे कम प्रोडक्ट्स होते हैं जिनमें पारदर्शिता नहीं होती। अगर आपको उसके बारे में सही और पूरी जानकारी नहीं है, तो बेहतर है कि आप उसे छोड़ दें।

जल्दी निवेश करना शुरू करें

अधिकांश लोग अपने शुरुआती जीवन में रिटारमेंट प्लानिंग के बारे में नहीं सोचते और जब समय नजदीक आने लगता है तो वो चिंता में आ जाते हैं। छोटी उम्र में निवेश करने के कई लाभ होते हैं। यानि कि आपके पास अपनी रिटायरमेंट के लिए बचत करने के लिए लंबा समय होता है। इसलिए जैसे ही आप कमाना शुरू करते हैं, उसी दिन से निवेश भी शुरू कर दें। फिर चाहे छोटी राशि ही निवेश करें। अगर छोटी उम्र में म्यूचुअल फंड्स में निवेश करते हैं तो लंबे समय में इसका लाभ मिलता है।

रिटारमेंट प्लानिंग को लेकर व्याकुल न हों

अपनी सभी जरूरतों और खर्चों का विश्लेषण अपनी आय को देखते हुए करें। केवल जरूरत की चीजों में ही खर्च करें। अपना मासिक बजट तैयार करें और कोशिश करें कि उसकी सीमा में रहकर की खर्च करें। हमेशा ध्यान रखें कि कभी भी अपना रिटायरमेंट लक्ष्यों से समझौता न करें। अपनी आज की जरूरतों को पूरा करने के लिए रिटारमेंट के गोल्स को न भूलें।

छोटी उम्र में हेल्थ इंश्योरेंस खरीद लें

हेल्‍थ इंश्योरेंस को छटी उम्र में नजर अंदाज न करें। ये सभी के लिए जरूरी है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए तो सबसे ज्यादा, क्योंकि बढ़ती उम्र में सेहत से जुड़ी बीमारियां ज्यादा होती हैं। अगर आप इंश्योरेंस नहीं लेते तो आपको अपनी बचत में से खर्चा करना पड़ता है। वास्तव में आपको छोटी उम्र में, जब आप बीमारियों से मुक्त होते हैं उस वक्त हेल्‍थ इंश्‍योरेंस खरीद लेना चाहिए।

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