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Gita Jayanti 2025: गीता जयंती कब मनाई जाएगी? नोट कर लें डेट और पूजा विधि

Written By: Naveen Khantwal Published : Nov 26, 2025 01:42 pm IST, Updated : Nov 26, 2025 01:42 pm IST

Geeta Jayanti 2025: गीता जयंती हर साल मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। साल 2025 में दिसंबर के महीने में गीता जयंती मनाई जाएगी। आइए जान लेते हैं गीता जयंती की डेट और पूजा विधि।

Geeta Jayanti 2025- India TV Hindi
Image Source : CANVA गीता जयंती 2025

Geeta Jayanti 2024: गीता जयंती का पवित्र त्योहार हर साल मार्गशीर्ष माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। गीता का पाठ करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है इसलिए मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी भी कहा जाता है। साल 2025 में गीता जयंती किस दिन मनाई जाएगी और इस दिन आपको किस विधि से पूजा करनी चाहिए, आइए जानते हैं विस्तार से।  

गीता जयंती 2025

हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 30 नवंबर को रात्रि 9 बजकर 29 मिनट से शुरू होगी, वहीं एकादशी तिथि की समाप्ति 1 दिसंबर को शाम 7 बजकर 1 मिनट पर होगी। ऐसे में उदयातिथि की मान्यता के अनुसार गीता जयंती का पवित्र त्योहार 1 दिसंबर को ही मनाया जाएगा। इसी दिन मोक्षदा एकादशी का व्रत भी भक्त रखेंगे। 

गीता जयंती 2024 पूजा विधि

गीता जयंती के दिन गीता का पाठ करने के साथ ही व्रत और पूजन भी आप कर सकते हैं। हिंदू धर्म के पवित्र दिनों में से एक गीता जयंती के दिन व्रत, पूजन और गीता पाठ करने से भक्त मोक्ष प्राप्त करते हैं। इस दिन आपको सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करना चाहिए और उसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद गंगाजल का छिड़काव आपको पूजा स्थल पर करना चाहिए और वहां गीता का उपदेश अर्जुन को देते हुए भगवान कृष्ण की फोटो लगानी चाहिए। ऐसी तस्वीर या प्रतिमा न हो तो आप श्रीकृष्ण जी की सामान्य तस्वीर भी लगा सकते हैं। 

इसके बाद पूजा स्थल पर धूप-दीप जलाना चाहिए। भगवान कृष्ण को फूल, चंदन, तुलसी, अक्षत और मिठाई आदि आपको अर्पित करना चाहिए। इसके बाद आपको गीता के किसी एक अध्याय का पाठ करना चाहिए। गीता जयंती के दिन गीता के 18 वें अध्याय का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है। गीता पाठ करने के बाद आपको श्रीकृष्ण और भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करना चाहिए और अंत में श्रीकृष्ण जी की आरती गानी चाहिए। आरती के बाद प्रसाद का वितरण परिवार के लोगों में करें। इस तरह आपकी पूजा समाप्त हो जाती है। इसी तरह आपको शाम के समय भी गीता जयंती के दिन श्रीकृष्ण की पूजा करनी चाहिए।  

गीता जयंती का महत्व

गीता ज्ञान का सागर है और गीता जयंती के दिन हम गीता के ज्ञान को अंगीकार करने की कोशिश करते हैं। यूं तो गीता का पाठ आपको हमेशा ही करना चाहिए लेकिन मार्गशीर्ष एकादशी पर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था इसलिए यह दिन गीता जयंती के रूप में खास बन जाता है। भगवान कृष्ण ने अर्जुन को धर्म, कर्म और मोक्ष का ज्ञान दिया था जो गीता में निहित है। गीता का पाठ करना आपके आध्यात्मिक ज्ञान को तो बढ़ाता ही है साथ ही आपके ज्ञान चक्षु भी इसका पाठ करने से खुलते हैं। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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