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खरमास में बदल जाता है खानपान, क्यों उड़द और राई से किया जाता है परहेज? जानें धार्मिक और आयुर्वेदिक कारण

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Dec 17, 2025 07:04 pm IST,  Updated : Dec 17, 2025 07:04 pm IST

Kharmas Food Rules: खरमास के दौरान उड़द और राई का सेवन वर्जित माना जाता है। चलिए जानते हैं इसके पीछे धार्मिक विश्वास और आयुर्वेदिक कारण क्या हैं और क्यों ये चीजें खाने की मनाही है। साथ ही यह भी जानेंगे कि इस समय कौन-सा भोजन करना सबसे बेहतर होता है।

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खरमास के नियम Image Source : FACEBOOK

Kharmas Food Rules: हिंदू धर्म में मलमास को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। यह समय न तो शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है और न ही भारी या तामसिक खानपान के लिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 16 दिसंबर से धनु मलमास शुरू हो चुका है, जो 14 जनवरी 2026 तक रहेगा। इस दौरान मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं। साथ ही खानपान को लेकर भी कई नियम बताए गए हैं। विशेष रूप से उड़द की दाल और राई का सेवन इस अवधि में नहीं किया जाता। इसके पीछे धार्मिक ही नहीं, बल्कि आयुर्वेदिक कारण भी बताए गए हैं।

मलमास क्या है और क्यों माना जाता है खास 

ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य एक ही राशि में अधिक समय तक ठहरता है, तो उस अवधि को मलमास कहा जाता है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह समय संयम, साधना और आत्मशुद्धि के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

क्यों बदलते हैं खानपान के नियम

मलमास का प्रभाव केवल शुभ कार्यों पर ही नहीं, बल्कि दैनिक जीवन और खानपान पर भी पड़ता है।मान्यता है कि इस दौरान सादा, हल्का और सात्विक भोजन करना चाहिए। इस दौरान मूंग की दाल, चना, जौ, बाजरा, दूध, फल और हरी सब्जियां सुपाच्य मानी जाती हैं। हल्का भोजन शरीर को स्वस्थ और मन को शांत रखने में सहायक होता है।

उड़द की दाल क्यों मानी जाती है भारी

आयुर्वेद के अनुसार उड़द की दाल भारी, तासीर में गर्म और देर से पचने वाली होती है। मलमास के दौरान पाचन शक्ति कमजोर मानी जाती है, ऐसे में उड़द का सेवन गैस, अपच और पेट दर्द जैसी समस्याएं बढ़ा सकता है।

राई के सेवन से क्यों किया जाता है परहेज

राई की तासीर अत्यधिक उष्ण होती है। यह शरीर में गर्मी बढ़ा सकती है और पित्त दोष को उभार सकती है। मलमास में जब शरीर को ठंडे और शांत आहार की आवश्यकता होती है, तब राई का सेवन अनुपयुक्त माना जाता है।

संयम और साधना का समय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मलमास संयम, जप और तप का समय होता है। सूर्य का तेज इस दौरान कमजोर माना जाता है और शुक्र ग्रह अस्त रहते हैं, इसलिए यह काल आत्मिक उन्नति के लिए उपयुक्त समझा जाता है।

खरमास में क्या नहीं करें

  1. खरमास के दौरान वाद-विवाद और झगड़ों से दूर रहना चाहिए, क्योंकि इस समय विवाद से आर्थिक नुकसान और मानहानि हो सकती है।
  2. इस अवधि में धन के लेनदेन से बचना चाहिए। खासकर किसी को उधार पैसा देना अशुभ माना जाता है।
  3. खरमास के 30 दिनों में किसी भी तरह के शुभ या मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए, जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और जनेऊ संस्कार।
  4. इस समय नया काम, व्यापार या निवेश शुरू करना शुभ नहीं माना जाता,।
  5. खरमास में तामसिक भोजन और नशे से दूरी बनाकर सात्विक और संयमित जीवन जीना चाहिए।

खरमास में क्या करना चाहिए

  1. खरमास में सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और उगते सूर्य को जल अर्पित करें।
  2. सूर्य देव की कृपा के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र या 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' मंत्र का जप करें।
  3. इस दौरान दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है। जरूरतमंदों को चना, गुड़, चावल, तिल, कपड़े या धन का दान करें।
  4. खरमास में सात्विक भोजन करें और वाणी और व्यवहार में संयम और विनम्रता रखें।
  5. अगर संभव हो तो गंगा या यमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान करें, अन्यथा स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

 

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