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February Kalashtami Vrat 2026: कल रखा जाएगा कालाष्टमी का व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, मंत्र और महत्व

Kalashtami Vrat 2026: कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की पूजा करने से सभी तरह के भय से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन व्रत करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है साथ ही भैरव भगवान की कृपा से शत्रुओं से छुटकारा मिल जाता है।

Written By: Vineeta Mandal
Published : Feb 08, 2026 05:11 pm IST, Updated : Feb 08, 2026 05:43 pm IST
कालाष्टमी व्रत 2026- India TV Hindi
Image Source : FILE IMAGE कालाष्टमी व्रत 2026

Kalashtami Vrat 2026: 9 फरवरी को कालाष्टमी का व्रत किया जाएगा। इस दिन भगवान शिव के भैरव स्वरूप की उपासना की जाती है। कालाष्टमी के दिन किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करने के बाद भैरव जी की पूजा करनी चाहिए। जो लोग किसी नदी या तालाब में स्नान के लिए नहीं जा सकते वो घर पर ही अपने स्नान के पानी में पवित्र नदियों का आह्वान करके स्नान कर लें। इस दिन ऐसा करने से आपके जीवन से सारी परेशानियां दूर होंगी, हर प्रकार के भय से छुटकारा मिलेगा और सुख-साधनों में बढ़ोतरी होगी। तो आइए जानते हैं कालाष्टमी पूजा शुभ मुहूर्त, मंत्र और महत्व के बारे में।

कालाष्टमी 2026 शुभ मुहूर्त

फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 9 फरवरी को पूरा दिन पूरी रात पार कर के  10 फरवरी को सुबह 7 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। कालाष्टमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 21 मिनट से सुबह 6 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। वहीं गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 4 मिनट से शाम 6 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। अमृत काल रात 10 बजकर 4 मिनट से रात 11 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।

कालाष्टमी व्रत महत्व

कालाष्टमी के दिन भगवान शंकर के काल भैरव स्वरूप की उपासना करने से जीवन की सारी परेशानियां दूर हो जाती हैं। साथ ही सभी मनोकामनाओं की भी पूर्ति होती है। इसके साथ ही रोग, भय और जीवन में आने वाली बाधाओं से भी छुटकारा मिलता है ।कालाष्टमी के दिन आपको दिन के समय काले कुत्ते को रोटी भी खिलानी चाहिए, ऐसा करने से भगवान काल भैरव का आशीर्वाद आपको मिलता है। 

कालाष्टमी पूजा मंत्र

  1. धर्मध्वजं शङ्कररूपमेकं शरण्यमित्थं भुवनेषु सिद्धम्। द्विजेन्द्र पूज्यं विमलं त्रिनेत्रं श्री भैरवं तं शरणं प्रपद्ये।।
  2.  ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा
  3. ॐ भैरवाय नमः.
  4. ॐ कालभैरवाय नमः.
  5. ॐ ह्रीं बटुक भैरवाय नमः
  6. ॐ भ्रां कालभैरवाय फट्

 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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