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Krishna Janmashtami Aarti Pdf: मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण की आरती जरूर करें, यहां देखें आरती कुंजबिहारी के लिरिक्स

Written By: Laveena Sharma @laveena1693
Published : Sep 14, 2025 08:30 am IST, Updated : Sep 14, 2025 08:33 am IST

Krishna Janmashtami Aarti Pdf Download: हर महीने में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व मनाया जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और शुभ मुहूर्त में भगवान कृष्ण की विधि विधान पूजा करते हैं। साथ ही कृष्ण भगवान की आरती भी जरूर गाते हैं। यहां आप देखेंगे आरती कुंजबिहारी की...के लिरिक्स।

krishna janmashtami aarti- India TV Hindi
Image Source : CANVA कृष्ण जन्माष्टमी आरती

Krishna Janmashtami Aarti Pdf: सनातन धर्म में कृष्ण जन्माष्टमी पर्व का विशेष महत्व माना जाता है। पंचांग अनुसार प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक जन्माष्टमी मनाई जाती है। इस तरह से 1 साल में कुल 12 या 13 जन्माष्टमी व्रत पड़ते हैं। कहते हैं जो कोई इस व्रत को सच्चे मन से रखता है उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। साथ ही भगवान कृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस दिन की पूजा में श्रीकृष्ण जी की आरती जरूर की जाती है। इसलिए हम आपके लिए लेकर आए हैं कृष्ण आरती के लिरिक्स।

आरती कुंजबिहारी की लिरिक्स (Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics)

आरती कुंजबिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

गले में बैजंती माला,
बजावै मुरली मधुर बाला ।
श्रवण में कुण्डल झलकाला,
नंद के आनंद नंदलाला ।
गगन सम अंग कांति काली,
राधिका चमक रही आली ।
लतन में ठाढ़े बनमाली
भ्रमर सी अलक,
कस्तूरी तिलक,
चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

कनकमय मोर मुकुट बिलसै,
देवता दरसन को तरसैं ।
गगन सों सुमन रासि बरसै ।
बजे मुरचंग,
मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग,
अतुल रति गोप कुमारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

जहां ते प्रकट भई गंगा,
सकल मन हारिणि श्री गंगा ।
स्मरन ते होत मोह भंगा
बसी शिव सीस,
जटा के बीच,
हरै अघ कीच,
चरन छवि श्रीबनवारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

चमकती उज्ज्वल तट रेनू,
बज रही वृंदावन बेनू ।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद,
चांदनी चंद,
कटत भव फंद,
टेर सुन दीन दुखारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

Krishna Janmashtami Aarti Pdf Download

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