नवरात्रि के तीसरे दिन तक जौ नहीं हुए हैं अंकुरित, तो तुरंत करें ये काम, जानिए हरे-भरे जौ क्या देते हैं संकेत
नवरात्रि के तीसरे दिन तक जौ नहीं हुए हैं अंकुरित, तो तुरंत करें ये काम, जानिए हरे-भरे जौ क्या देते हैं संकेत
Written By: Laveena Sharma@laveena1693
Published : Sep 24, 2025 10:47 am IST,
Updated : Sep 24, 2025 10:59 am IST
नवरात्रि में हरे-भरे और घने जौ उगना बेहद शुभ माना जाता है। कहते हैं ऐसे जौ धन-धान्य में वृद्धि होने का संकेत देते हैं। लेकिन अगर जौ उग नहीं रहे हैं तो ये अशुभ संकेत माना जाता है। नवरात्रि का तीसरा दिन लग गया है अगर अभी तक आपके जौ अंकुरित नहीं हुए हैं तो ये उपाय तुरंत अपनाएं।
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नवरात्रि में जौ नहीं उग रहे तो क्या करें
Navratri Mein Jau Nhi Uge Toh Kya Kare: नवरात्रि में जौ का सही तरह से उगना सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए हर कोई चाहता है कि घर में बोए गए जौ हरे-भरे उगें। ऐसा मान्यता है कि अगर नवरात्रि में घर में लगाए गए जौ सही से नहीं उगते हैं तो इसका नकारात्मक असर पड़ता है। इससे भविष्य में आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। अगर नवरात्रि के तीसरे दिन तक जौ अंकुरित होना शुरू नहीं हुए हैं तो आपको कुछ उपाय तुरंत अपना लेने चाहिए जिससे नवरात्रि के आखिरी दिन तक आपके जौ हरे-भरे हो सकें।
जौ नहीं उग रहे तो करें ये काम
मिट्टी में ज्यादा पानी न डालें क्योंकि इससे जौ के बीज सड़ने लगते हैं।
मिट्टी के ऊपर हल्का सा गीला कपड़ा या पत्ता ढक दें जिससे बीजों में गर्माहट और नमी बनी रहेगी और इससे बीज जल्दी अंकुरित हो जाएंगे।
मिट्टी में रोज थोड़ा-थोड़ा जल जरूर छिड़कते रहें।
अगर लगता है बीज पुराने हैं जिस कारण वो उग नहीं रहे हैं तो आप नए बीज उसमें डाल सकते हैं।
अगर आपको ऐसा लगता है कि मिट्टी या पात्र खराब है, तो नया पात्र लें और उसमें मिट्टी डालकर फिर से बीज बो दें। (ऐसा करने से पहले किसी पंडित से सलाह जरूर ले लें)।
नवरात्रि में जौ का उगना क्या संकेत देता है?
जौ लंबे और सीधे बढ़ रहे हैं तो यह अच्छे स्वास्थ्य, काम में सफलता और घर में शांति का संकेत होता है।
पीले या हल्के जौ हैं तो इसका मतलब है कि मेहनत अधिक करनी पड़ेगी या आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है।
जौ छोटे या कम अंकुरित हुए है तो इसका अर्थ है कि कामों में देरी या बाधाएं आ सकती हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)