सोने और चांदी की कीमत सातवें आसमान पर हैं। रिकॉर्ड हाई के बाद बीते दो-तीन सत्रों से इसमें गिरावट देखी जा रही है।
रिकॉर्ड हाई से चांदी की कीमत गिरकर करीब 2.9 लाख रुपये प्रति किलो के लेवल पर है, जबकि सोना 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया है। जानकारों का मानना है कि इन दोनों बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव अभी और देखने को मिल सकते हैं।
सरकार की तरफ से हर साल 1 फरवरी को बजट पेश करना तय है, दिन चाहे कोई हो। इसी हिसाब से शेयर बाजार भी ट्रेडिंग को लेकर फैसला लेते हैं। हालांकि,ऐसा इतिहास में यह दूसरी बार होने जा रहा है जब बजट के दिन रविवार है।
कई महीनों की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट के साथ सोने और चांदी का जोश ठंडा पड़ गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना सहित अन्य कीमती धातुओं में भारी बिकवाली देखी गई।
जानकारों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन, सौर ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों से 2025-2030 के बीच चांदी की मांग में 15-20% की वृद्धि होने की उम्मीद है।
वर्ष की शुरुआत से अब तक सोने की कीमतों में करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि चांदी की कीमतें लगभग 60 फीसदी उछल चुकी हैं।
सोने का भाव ग्लोबल मार्केट में भी नया रिकॉर्ड बना गया है। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अस्थिरता के चलते निवेशक सोने का रुख कर रहे हैं। आने वाले दिनों में भी इसमें तेजी के आसार हैं।
वैश्विक संकेतों और भू-राजनीतिक तनाव ने सोने और चांदी की कीमतों को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में इसमें और भी तेजी देखने को मिल सकती है।
वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता के चलते निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाकर सोना जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं, जिससे कीमती धातुओं की मांग बढ़ गई है।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बुधवार को सोने की कीमतें 4,630 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच गईं, जिससे एक नया रिकॉर्ड है। आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक तनाव आर वैश्विक उथल-पुथल से सोने और चांदी दोनों की कीमत को सपोर्ट मिलने की संभावना है।
फेडरल रिज़र्व को लेकर बनी अनिश्चितता और ईरान में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते सेफ-हेवन डिमांड में इज़ाफ़ा हुआ, जिससे सोने की कीमतों को समर्थन मिला। आने वाले समय में भी बहुमू्ल्य धातु की कीमत में उछाल देखने को मिल सकता है।
विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता और राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंकाओं के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर सोने की ओर रुख कर रहे हैं। इस वजह से इन धातुओं को सपोर्ट जारी है।
वायदा बाजार में सोने के भाव में हाल के दिनों में लगातार तेजी का रुझान देखा गया है। चांदी तो और भी तेजी से लगातार नए रिकॉर्ड बनाती देखी जा रही है। जानकारों का मानना है कि इस साल भी दोनों धातुओं में तेजी का रुख देखने को मिल सकता है।
जानकारों का मानना है कि डॉलर में कमजोरी और US ट्रेजरी यील्ड में नरमी के कारण स्पॉट गोल्ड में पॉजिटिव रुझान के साथ ट्रेड होने और $4500 के लेवल तक बढ़ने की संभावना है।
ग्लोबल मार्केट में भी सोना लगभग $4,480 प्रति औंस पर आ गया, जिससे पिछले दो दिनों की तेजी रुक गई। निवेशक जियोपॉलिटिकल जोखिमों को नज़रअंदाज करते हुए अमेरिकी आर्थिक डेटा, खासकर दिसंबर जॉब्स रिपोर्ट पर ध्यान दे रहे हैं।
वायदा बाजार में चांदी ने आज 2.50 लाख रुपये का आंकड़ा भी पार कर लिया। उधर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें बढ़कर 4,460 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच गईं।
सोने और चांदी फ्यूचर मार्केट में भी लगातार आगे बढ़ते जा रहे हैं। ग्लोबल मार्केट में भी सोमवार को सोने की कीमतें 1% से ज्यादा बढ़कर 4,400 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच गईं।
जानकार कहते हैं कि लंबे समय के अनुमान मोटे तौर पर पॉजिटिव बने हुए हैं। आने वाले सालों में सोने की कीमतें बढ़ेंगी, जिसके लिए वे सेंट्रल बैंक की लगातार डिमांड, जियोपॉलिटिकल जोखिम और बड़ी इकॉनमी में धीरे-धीरे आसान मॉनेटरी पॉलिसी को सपोर्टिंग फैक्टर बता रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना पहली बार 4,400 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गया और अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक संकेतकों के चलते घरेलू बाजार में सोने के दामों में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है।
चांदी की कीमत में तेजी का सिलसिला लगातार जारी है। आने वाले साल में भी इसमें तेजी का रुझान देखने को मिल सकता है। सोने की वायदा कीमत भी उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रही है।
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