उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जहां प्रेम, साहस और कानून के सहारे एक बालिग प्रेमी युगल ने तमाम सामाजिक दबावों को पीछे छोड़ते हुए अपने रिश्ते को नया नाम दिया। परिजनों के विरोध, लगातार मिल रही धमकियों और थाने तक की दौड़ के बाद आखिरकार मामला विवाह तक पहुंचा। रॉबर्ट्सगंज में मुस्लिम समुदाय की युवती ने हिंदू रीति-रिवाज के साथ अपने प्रेमी संग सात फेरे लेकर नई जिंदगी की शुरुआत की है।
क्या है पूरा मामला?
तमाम विवादों और संघर्षों के बाद सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज स्थित दंडित बाबा मंदिर परिसर में एक प्रेम कहानी का सुखद अंत हुआ। मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाली युवती ने अपने हिंदू प्रेमी के साथ हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह किया। दोनों बालिग हैं और आपसी सहमति से साथ रहने का फैसला उन्होंने सार्वजनिक रूप से लिया। दरअसल, बीते दिनों यह प्रेमी युगल परिजनों के विरोध और जान से मारने की धमकियों के चलते रॉबर्ट्सगंज कोतवाली पहुंचा था, जहां उन्होंने पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई थी। मामला लगातार विवाद का रूप लेता गया, सामाजिक दबाव बढ़ता गया, लेकिन प्रेमी युगल अपने फैसले पर अडिग रहा। कई दिनों तक चली जद्दोजहद, असुरक्षा और तनाव के माहौल के बाद आखिरकार आज मंदिर में विवाह संपन्न कराया गया।
विरोध और धमकियों के बावजूद हुई शादी
मीडिया और गणमान्य लोगों की मौजूदगी में दोनों ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई और सात फेरे लेकर सात जन्मों के बंधन में बंध गए। परिजनों के विरोध और धमकियों के बावजूद प्रेमी युगल ने कानून के दायरे में रहकर अपने अधिकारों का प्रयोग किया और अपने रिश्ते को नई पहचान दी। विवाह के दौरान सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। यह पूरा घटनाक्रम रॉबर्ट्सगंज-करमा थाना क्षेत्र से जुड़ा है और इस विवाह के बाद मामला शांतिपूर्ण तरीके से सुलझता नजर आ रहा है।
युवक-युवती ने क्या बताया?
वहीं, शादी के बंधन में बंधी प्रेमिका जेहा खातून ने बताया कि "यह शादी का बंधन हमने अपनी मर्जी से स्वीकार किया है। इस दौरान हमारे परिवार से हमें तमाम धमकियों भी मिलीं जिसके लिए हमें थाने तक का चक्कर भी लगाना पड़ा। किंतु अंत में हम दोनों अपनी मर्जी से आज मंदिर में शादी करके खुश हैं।" वहीं, प्रेमी प्रदीप कुमार ने बताया कि "डेढ़ वर्ष पहले काम के दौरान हुई जान पहचान अब शादी तक के सफर तक सुखद अंत में पहुंची जिसके लिए हम दोनों खुश हैं। इस दौरान तमाम दुश्वारियां भी आई पर अंत में हम दोनों ईश्वर को साक्षी मान कर सात जन्मों तक साथ रहने की शपथ ली।" (रिपोर्ट: परमेश्वर दयाल)
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