इसी साल मई से अब तक चार बार डूम्सडे फिश को समुद्री किनारे पर देखा जा चुका है जबकि यह मछली समुद्र की गहराई में रहती है। इसको देखने के बाद लोग युद्ध, अकाल और सबसे ज्यादा भूंकप जैसी संभावित आपदाओं की चेतावनी देने लगते हैं। सोशल मीडिया पर इस मछली की फोटो को शेयर करते हुए लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या कोई आपदा आने वाली है। अब तमिलनाडु में मछुआरों द्वारा इस मछली को पकड़े जाने के बाद से ही यह मछली सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
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तमिलनाडु के बाद शुरु हुई श्रंखला
आपको बता दें कि इस मछली को देखने की शुरुआत तमिलनाडु में हुई जहां इसी साल मई महीने के अंत में कुछ मछुआरों ने ओअरफिश को पकड़ा। वो मछली लगभग 30 फीट लंबी थी और इसके साथ फोटो लेने के लिए 7 लोगों को साथ में खड़े होकर इसे पकड़ना पड़ा। कुछ ही समय में उसकी तस्वीर और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पहली बार देखे जाने के कुछ ही दिनों बाद 2 जून को तस्मानिया के पश्चिमी तट पर निवासी सिबिल रॉबर्टसन ने 3 मीटर लंबी ओअरफिश देखी।
न्यूजीलैंड के तट पर दिखी दो ओअरफिश
इतना ही नहीं न्यूजीलैंड के तटों पर भी जून के शुरुआत में ही दो ओअरफिश की लाशें मिलने से लोगों की चिंता बढ़ गई। न्यूजीलैंड में 2 ओअरफिश की लाशें किनारे पर बहकर आईं जिनमें से एक ओअरफिश का सिर कटा हुआ था, जिससे भ्रम और चिंता और बढ़ गई। सिर वाली लाश डुनेडिन के नज़दीक मिली थी और बिना सिर वाली मछली की लाश क्राइस्टचर्च इलाके में मिली थी।
ओअरफ़िश के आने से आती है तबाही?
आपको बता दें कि ओअरफ़िश लंबी रिबन जैसी मछली होती है जो टेम्परेट और ट्रॉपिकल यानी समशीतोष्ण और उष्णकटिबंधीय ओशियन की सतह में 200-1,000 मीटर नीचे रहती है। वे सबसे लंबी बोनी मछली होती हैं जिनकी लंबाई लगभग 30 फीट (9 मीटर) होती है। वे ज़्यादातर प्लवक और क्रस्टेशियन जैसे छोटे जलीय जीवों को खाते हैं और मनुष्यों के लिए कोई ख़तरा नहीं पैदा करती हैं। जहां तक रही इस मछली के आने से तबाही आने की बात तो आपको बता दें कि इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि ओअरफिश किसी तबाही या फिर आपदा का संकेत है।
नोट: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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