Interesting Facts : जब भी आप एक शहर से दूसरे शहर जाते होंगे तो आपको हाईवे या एक्सप्रेसवे से गुजरना पड़ता होगा। हाईवे से गुजरते समय बीच में टोल जैसी कई जगहें पड़ती होंगी जहां आपको अपना वाहन रोकना पड़ता होगा। दिन में तो एक एक जगह साफ और स्पष्ट दिख जाती है मगर रात में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है इसीलिए रात में हाईवे पर लाइटों का समुचित प्रबंधन किया जाता है। रात में यात्रा करने वाले यात्रियों की सबसे बड़ी परेशानी दृश्यता यानी विजिबिलटी होती है। ये तो आपने भी महसूस किया होगा कि, स्ट्रीट लाइट न चलने की दिशा में हाईवे की सड़क पर लगे टिमटिमाते रिफ्लेक्टर काम आते हैं जिनकी रोशनी में आगे के रास्ते का पता चलता है। मगर क्या आपने कभी सोचा है कि, हाईवे पर लगे रिफ्लेक्टर में लाइट कहां से आती है ? यदि आपको नहीं पता है तो आज हम आपको इसका जवाब देने वाले हैं।
हाईवे पर सुरक्षा के लिए क्या-क्या किया जाता है
हाईवे पर सफर करने वाले यात्री तो सुरक्षा दृष्टि से लेन अनुशासन, निर्धारित गति सीमा, सीट बेल्ट/हेलमेट का उपयोग, और ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन करते हैं। इसके अलावा हाईवे के निकट क्रैश बैरियर, बेहतर मार्किंग, साइनेज, प्रकाश व्यवस्था, और पेट्रोलिंग वाहन सुरक्षा का पूरा ख्याल रखते हैं।
इन बिंदुओं का भी रखना पड़ता है ध्यान
- निर्धारित गति सीमा
- इंडिकेटर/हॉर्न का उपयोग
- फोन का उपयोग न करना
- शराब जैसे मादक पदार्थों का सेवन न करना
सड़क पर रिफ्लेक्टर क्यों लगाए जाते हैं
गौरतलब है कि, रोड रिफ्लेक्टर लोगों को रास्ता देखने में मदद करते हैं। ये कई प्रकार के होते हैं। जैसे- प्लास्टिक रिफ्लेक्टर, मेटल रिफ्लेक्टर, डॉट्स रिफ्लेक्टर, उभरे हुए रिफ्लेक्टर आदि। इनकी सबसे ज्यादा जरूरत रात, खराब मौसम या कोहरे में महसूस होती है। इनके अंदर कांच के डॉट्स या क्रिस्टल से बने पुर्जे दिखाई देते हैं। रिफ्लेक्टर को सड़क, सेंटरलाइन या लेन के किनारे लगाया जाता है। ये मोड़ को इंगित करने के अलावा ड्राइवरों को सड़क में होने वाले बदलावों से अलर्ट करते हैं। इनका उपयोग अक्सर राजमार्गों, क्रॉसिंग जैसे उन क्षेत्रों में किया जाता है जहां अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं।

हाईवे पर लगे रिफ्लेक्टर में लाइट कहां से आती है
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सड़क पर लगे रिफ्लेक्टर वाहनों की हेडलाइट्स से आने वाली रोशनी को चालक की ओर वापस रिफ्लेक्ट करके काम करते हैं। इसके अंदर मौजूद पदार्थों को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि वे प्रकाश को उसी दिशा में मोड़कर वापस रिफ्लेक्ट कर दें, जिससे हेडलाइट्स पड़ने पर रिफ्लेक्टर चमकने लगता है। इनमें भी दो कैटेगरी होती है एक्टिव और पैसिव रिफ्लेक्टर। एक्टिव रिफ्लेक्टर बिजली से चलते करते हैं, जिसमें LED जलती है जो कि रात होने पर खुद ही जलती हैं और दिन में बंद रहती हैं। पैसिव रिफ्लेक्टर रेडियम वाले रिफ्लेक्टर्स होते हैं। इनके दोनों ओर रेडियम की पट्टी होती है। अंधेरे में वाहनों की लाइट पड़ते ही ये चमकते हैं। ये इलेक्ट्रिसिटी के बिना काम करते हैं। आपको बता दें कि, लाइट वाले रिफ्लेक्टर्स सौलर पैनल व बैट्री द्वारा चालित होते हैं। दिन में सौर ऊर्जा से चार्ज होने के बाद ये खुद ही जलते हैं। इसे जमीन पर लगी सोलर लाइट कहें तो अतिश्योक्ति न होगी। रिफ्लेक्टर की लाइट्स ऑटोमेटिक होती हैं और लाइट में लगे एलडीआर और सेंसर से काम करती हैं। खास बात ये है कि, अंधेरा होते ही ये सेंसर के माध्यम से खुद ही जल जाती हैं और उजाला होने पर खुद ही बंद हो जाती हैं।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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