अगर किसी ग्लेशियर पर आप लाल रंग का झरना बहता हुए देखें तो आपके दिमाग में सबसे पहला सवाल क्या आएगा? शायद आप भी भ्रम में पड़ जाएंगे और ये सोच सकते हैं कि ये कहीं खून का झरना तो नहीं?
दरअसल ये चर्चा इसलिए शुरू हुई है क्योंकि बर्फीली चट्टान से लाल रंग की धार बहते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
इस वीडियो को देखकर लोग हैरान हैं और इस भ्रम में हैं कि ये खून का झरना कहां से आ रहा है। जबकि सच्चाई ये है कि ये खून नहीं है बल्कि लाल पानी है, जिसे ब्लड फॉल्स भी कहा जाता है। दरअसल सफेद बर्फ पर ऐसा लग रहा है कि जैसे खून की नदी बह रही हो, बर्फीली चट्टान से ऐसा लग रहा है कि खून का झरना बह रहा हो। जिस जगह से ये गुजर रहा है, लाल लाल खून जैसा नजर आने लगता है।
क्या है ये लाल रंग का रहस्य?
दरअसल बर्फ पर दिख रहा ये लाल रंग कुछ और नहीं लाल पानी है, इसलिए इसे ब्लड फॉल्स भी कहा जाता है। अंटार्कटिका के 5 मंजिला ऊंचे टेलर ग्लेशियर पर ब्लड फॉल्स बहता है। दरअसल टेलर ग्लेशियर के नीचे एक झील है। 20 लाख साल से झील पूरी तरह सतह से कटी है। रोशनी और ऑक्सीजन के बिना झील का पानी सामान्य से ज्यादा नमकीन है। अंटार्कटिका के माइनस टेंपरेचर की वजह से भी झील जमती नहीं है।
जब खारा पानी ग्लेशियर की दरारों से रिसकर बाहर आकर ऑक्सीजन के संपर्क में आता है, तो इसमें मौजूद आयरन ऑक्सीडाइज हो जाते है। ये प्रोसेस ठीक वैसा है, जैसे लोहे पर जंग लगने से उसका रंग लाल हो जाता है। ठीक उसी तरह सफेद बर्फ पर गिरता पानी गहरा लाल दिखने लगता है। इसलिए इसे ब्लड फॉल्स कहा जाता है और 1911 में वैज्ञानिक थॉमस गिफिथ टलेर ने इसे खोजा था।
कुल मिलाकर बात ये है कि इस लाल रंग के पानी को रक्त जलप्रपात भी कहा जाता है। ये पानी आयरन से भरपूर है। हवा के संपर्क में आने की वजह से इसका रंग लाल है। इसलिए कभी इस तरह का नजारा देखें तो उसे खून समझने की भूल ना करें, वह लाल पानी है।
(डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पर किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)
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