Interesting Facts: सर्दियों के मौसम में बाजार में नाना प्रकार की सब्जियां मिलती हैं, जैसे- हरी मटर, बथुआ, पालक, सोया-मेथी, मूली इत्यादि। ऐसी मौसमी सब्जियां खरीदते समय लोगों को विशेष ध्यान भी देना होता है। मगर कुछ सब्जियां साल के 12 महीनों बिकती हैं जिनमें आलू, प्याज और टमाटर शामिल हैं। इनमें से अगर अकेले प्याज की बात करें तो आमतौर पर लोग इनमें सड़न को चेक करते हैं और जो प्याज ठीक दिखते हैं उसे खरीद लेते हैं। मगर क्या आपने कभी सब्जियां चुनते समय गौर किया है कि कुछ प्याज ऐसे होते हैं जिन पर काले रंग के धब्बे या लकीरें बनी होती हैं। कभी सोचा है, आखिर प्याज पर ये धब्बे कहां से आते हैं ? इन धब्बों को कहते हैं क्या हैं ? यदि आपको नहीं पता है तो चलिए फिर आज हम आपको इसके बारे में बताते हैं।
onionsusa.org की रिपोर्ट के मुताबिक, प्याज में सल्फ्यूरिक यौगिक होता है जो आंखों से आंसू लाने का काम करता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्याज पर काली फफूंद Aspergillus niger (एस्परगिलस नाइजर) नामक कवक (फंगस) के कारण होती है, जो मिट्टी में पाया जाने वाला एक सामान्य कवक है। उच्च तापमान और ह्यूमिडिटी फफूंद के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाती हैं। इसके अलावा कटाई और कटाई के दौरान प्याज को लगने वाली चोटें फंगस के प्रवेश द्वार बन सकती हैं। ऐसा माना जाता है कि, ये काला फंगस हमारे शरीर में कोई रोग तो उत्पन्न नहीं करता है मगर हानिकारक हो सकता है। यही वजह है कि, एलर्जी के रोगियों को इसे न खाने की सलाह दी जाती है।

ask.usda.gov की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन्हें एस्परगिलस नाइजर से एलर्जी है, उन्हें काली फफूंद वाले प्याज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। रिपोर्ट में प्याज को फफूंद से बचाने के लिए निम्न उपाय बताए गए हैं:
डिस्क्लेमर: इस खबर में बताए गए सभी तथ्य रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। इंडिया टीवी किसी दावे के प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है। जानकारी में उल्लिखित किसी तथ्य को विचार में लाने से पहले चिकित्सकीय सलाह अवश्य लें।
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