Tuesday, March 10, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. विदेश
  3. अन्य देश
  4. लाल सागर में हूतियों के हमले से ढुलाई लागत और बीमा प्रीमियम के दाम हो सकते हैं बेलगाम, बढ़ेगी महंगाई

लाल सागर में हूतियों के हमले से ढुलाई लागत और बीमा प्रीमियम के दाम हो सकते हैं बेलगाम, बढ़ेगी महंगाई

Edited By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia Published : Jan 06, 2024 05:41 pm IST, Updated : Jan 06, 2024 05:41 pm IST

लाल सागर में हूतियों के आतंक से व्यापार पर विपरीत असर पड़ा है। इससे माल ढुलाई 60 फीसदी और बीमा प्रीमिय में 20 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी की आशंका जाहिर की गई है। इसकी वजह यह है कि हूतियों के हमले से बचने के लिए वाणिज्यिक जहाज अब वैकल्पिक रास्तों का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें काफी दूर घूमकर जाना पड़ रहा है।

लाल सागर। - India TV Hindi
Image Source : AP लाल सागर।

गाजा में इजरायली हमले के खिलाफ लगातार लाल सागर में आतंक मचा रहे हूती विद्रोहियों ने समुद्री व्यापार की व्यवस्था को बेपटरी कर दिया है। इससे महंगाई का संकट गहरा सकता है। लाल सागर में संकट बढ़ने से समुद्री व्यापार पर गहरा असर पड़ने की आशंका है। वैकल्पिक मार्ग से माल ढुलाई पर लागत 60 प्रतिशत तक और बीमा प्रीमियम 20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। एक रिपोर्ट में यह संभावना जताई गई है। आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने शनिवार को एक रिपोर्ट में कहा कि लाल सागर में संकट गहराने से माल ढुलाई में लगने वाले समय में 20 दिन की देरी और लागत में 40-60 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है।

इससे बीमा प्रीमियम में 15-20 प्रतिशत बढ़ने के अलावा चोरी और हमलों से माल को नुकसान पहुंचने की आशंका भी है। लाल सागर और भूमध्य सागर को हिंद महासागर से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति यमन स्थित हूती आतंकवादियों के हमलों के कारण बिगड़ गई है। इन हमलों के कारण, जहाज रास्ता बदलकर ‘केप ऑफ गुड होप’ के माध्यम से आवाजाही कर रहे हैं। इससे लगभग 20 दिनों की देर हो रही है और माल ढुलाई एवं बीमा लागत भी बढ़ रही है।

भारत समेत यहां पड़ा व्यापार पर असर

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने रिपोर्ट में कहा कि हूती हमलों के कारण लाल सागर व्यापारिक मार्ग में व्यवधान आने से भारतीय व्यापार, खासकर पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप के साथ कारोबार पर काफी प्रभाव पड़ा है। इसके मुताबिक, भारत, कच्चे तेल और एलएनजी आयात और प्रमुख क्षेत्रों के साथ व्यापार के लिए बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर बहुत अधिक निर्भर है। ऐसे में इस क्षेत्र में कोई भी गतिरोध आने से भारी आर्थिक और सुरक्षा जोखिमों का सामना करना पड़ता है। जीटीआरआई का अनुमान है कि यूरोप और उत्तरी अफ्रीका के साथ भारत के समग्र उत्पाद व्यापार का लगभग 50 प्रतिशत आयात और 60 प्रतिशत निर्यात यानी कुल 113 अरब डॉलर का कारोबार इसी मार्ग से हुआ है। (भाषा) 

यह भी पढ़ें

जापान में भूकंप से मरने वालों की संख्या पहुंची 126, बारिश और बर्फबारी से बेघरों का जीना हुआ मुहाल

चीन सीमा से लगे म्यांमार के इस शहर पर हो गया जबरन कब्जा, जानें किसके सामने हथियार डालकर लौटी सेना

Latest World News

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Around the world से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें विदेश

Advertisement
Advertisement
Advertisement