1. Hindi News
  2. विदेश
  3. एशिया
  4. हर साल 1000 से अधिक पाकिस्तानी लोग मारे जा रहे 'कुत्तों की मौत', एक रिपोर्ट में किया गया दावा

हर साल 1000 से अधिक पाकिस्तानी लोग मारे जा रहे 'कुत्तों की मौत', एक रिपोर्ट में किया गया दावा

 Edited By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : Sep 28, 2025 05:25 pm IST,  Updated : Sep 28, 2025 05:25 pm IST

पाकिस्तान में एक घातक बीमारी के चलते हर साल 1000 से अधिक लोगों की दर्दनाक मौत हो रही है। इलाज में लापरवाही और टीकों की अनुपलब्धता के चलते लोग मारे जा रहे हैं।

प्रतीकात्मक फोटो। - India TV Hindi
प्रतीकात्मक फोटो। Image Source : AP

इस्लामाबाद [पाकिस्तान]): पाकिस्तान में हर साल 1000 से अधिक लोग कुत्तों की मौत मारे जा रहे हैं। पाकिस्तान के डॉन न्यूज ने रविवार को एक रिपोर्ट के हवाले यह जानकारी दी है। इस तरह की मौत पाने वालों में महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और पुरुष शामिल हैं। इस जानलेवा बीमारी का शिकार होने के बाद लोग कुत्तों की तरह भौंकते हैं और उसी तरह हरकतें करते हैं...फिर अंत में दर्दनाक मौत को प्राप्त होते हैं।

 

किस बीमारी के हो रहे शिकार

चाइल्डलाइफ फाउंडेशन के मेडिकल डायरेक्टर मोहम्मद इरफान हबीब ने डॉन को बताया कि रेबीज के चलते 1000 से अधिक पाकिस्तानी लोग मारे जा रहे हैं। यह बीमारी पाकिस्तान के ग्रामीण और कम आय वाले समुदायों में एक गंभीर त्रासदी है, क्योंकि वहां बच्चे अक्सर आवारा कुत्तों के काटने का शिकार होते हैं। इलाज में देरी या इलाज का न मिल पाना ऐसे बचा जा सकने वाले मौतों का कारण बनता है।

 

सबसे ज्यादा बच्चे हैं शिकार

"यह त्रासदी विशेष रूप से पाकिस्तान के ग्रामीण और कम आय वाले इलाकों में गहरी है, जहां बच्चे खेलते समय या स्कूल जाते समय आवारा कुत्तों के काटने का सामना करते हैं। देर से या इलाज न मिलने के कारण जानलेवा मौतें होती हैं। यदि तुरंत सही कदम उठाए जाएं तो रेबीज को 100% रोका जा सकता है। तब यह जानलेवा नहीं होती।

 

माता-पिता को रहना होगा सतर्क

डॉ. हबीब ने डॉन को बताया "हर माता-पिता और देखभाल करने वाले को जीवनरक्षक कदम पता होने चाहिए। कुत्ते के काटने के घाव को कम से कम 15 मिनट तक साबुन और पानी से धोएं, बिना देरी के आपातकालीन चिकित्सा लें, और टीकाकरण पूरा करें। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, रैबीज एक टीका-रोकथाम योग्य, ज़ूनोटिक, वायरल बीमारी है जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। मानव रेबीज के लगभग 99% मामलों में कुत्ते वायरस का स्रोत होते हैं। 5 से 14 वर्ष के बच्चों में यह बीमारी आम है।

 

ऐसे भी फैल सकता है रेबीज

WHO ने बताया कि रेबीज संक्रमित लोगों और जानवरों में लार के जरिए फैलती है, आमतौर पर काटने, खरोंच या आंख, मुंह या खुले घाव जैसे सीधे संपर्क से भी यह बीमारी फैल सकती है। अगर एक बार रेबीज हो जाए यानि जब रोग के लक्षण दिखाई देने लगें तो यह100% घातक होती है। WHO के अनुसार, रेबीज का इनक्यूबेशन पीरियड आमतौर पर 2-3 महीने होता है, लेकिन यह एक सप्ताह से एक वर्ष तक भी हो सकता है, जो वायरस के प्रवेश स्थान और वायरल लोड जैसे कारकों पर निर्भर करता है।

 

क्या हैं रेबीज के लक्षण

रेबीज के शुरुआती लक्षणों में बुखार, दर्द और घाव के आसपास असामान्य या अनजान झुनझुनी, चुभन या जलन शामिल हैं। जैसे-जैसे वायरस केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तक पहुंचता है, मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में तेजी से और घातक सूजन होती है। WHO ने बताया कि रेबीज की वैश्विक लागत सालाना लगभग 8.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, जिसमें खोई हुई जानें और आजीविका, चिकित्सा देखभाल और उससे जुड़ी लागतें, साथ ही अनमापी मानसिक पीड़ा शामिल है। (एएनआई)

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Asia से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें विदेश