Monday, March 02, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. विदेश
  3. अमेरिका
  4. कोरोना के खिलाफ कितनी असरदार है मॉडर्ना की वैक्सीन, ये रही डिटेल

कोरोना के खिलाफ कितनी असरदार है मॉडर्ना की वैक्सीन, ये रही डिटेल

Edited by: IndiaTV Hindi Desk Published : Nov 18, 2020 01:22 pm IST, Updated : Nov 18, 2020 01:23 pm IST

जिस वैक्सीन का इंतजार पूरी दुनिया को है, ट्रायल में वो कितनी प्रभावशाली निकली हैं और इसका पहला टीका लगने में अभी कितनी देर है, इंडिया में ये कब तक आ सकती है और आएगी तो कितनी प्रभावी होगी।

moderna vaccine- India TV Hindi
Image Source : AP moderna vaccine

सावधानी हटी, दुर्घटना घटी! कोरोना के संबंध में ये कहावत हू-ब-हू साबित हो रही है। सरकार लगातार  कर रही है कि कोरोना महामारी अभी खत्म नहीं हुई है। ऐसे में वैक्सीन आने तक लापरवाही बड़ी मुसीबत बढ़ा सकती है। जिस वैक्सीन का इंतजार पूरी दुनिया को है, ट्रायल में वो कितनी प्रभावशाली निकली हैं और इसका पहला टीका लगने में अभी कितनी देर है, इंडिया में ये कब तक आ सकती है और आएगी तो कितनी प्रभावी होगी। आइए इंडिया टीवी की इस खास रिपोर्ट में जानते हैं कि कोरोना संक्रमण से बचने के लिए आपको किस हद तक अलर्ट रहना है। 

पूरी दुनिया में कोरोना की तीसरी लहर के खौफ में है। इस बीच हर कोई यही पूछ रहा है कि कोरोना की यह संजीवनी कब तक बाजार में आ सकती है। एक साथ तीन-तीन वैक्सीन्स के 90% से ज्यादा कारगर होने की खबरें आई हैं। आइए जानते हैं किस वैक्सीन को लेकर क्या दावे किए जा रहे हैं।

कौन सी वैक्सीन कितनी कारगर 

1. अमेरिकी कंपनी फाइजर की वैक्सीन

90% प्रभावी होने का दावा
2- रूस की स्पुतनिक वैक्सीन 
92% प्रभावी होने का दावा
3- अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना की वैक्सीन

moderna vaccine
Image Source : APmoderna vaccine

94.5% प्रभावी होने का दावा

इन दावों के साथ आखिर क्या समझा जाए, दुनिया भर में 13 लाख से ज्यादा लोगों को निवाला बना चुके कोरोना वायरस का काट मिल गया? इन वैक्सिन्स के साथ कोरोना का अंत नजदीक आ चुका है? तो आखिर कब तक...? ये सवाल आपके भी जेहन में होगा, ये जानने की उत्सुकता होगी, कि दुनिया की तीन बड़ी कंपनियों की वैक्सीन की पॉसिबिलिटी और साइंटिफिक पोजीशन क्या है? तो इय रिपोर्ट पर जरा गौर कीजिए। वैक्सिन प्रोजेक्ट में शामिल डॉक्टर्स और वैज्ञानिक आपके हर सवाल का जवाब बताएंगे।

कोरोना वैक्सीन को लेकर ​जिस कंपनी का सफलता प्रतिशत सबस ज्यादा है, वह है अमेरिका की मॉडर्ना कंपनी। इस कंपनी की लैब से बड़ी खबर आई है। इसी लैब में बनी है- कोरोना की अब तक की सबसे सबसे प्रभावी वैक्सीन। 10 महीने के रिसर्च और 3 ह्यूमन ट्रायल के बाद दावा किया जा रहा है कि यह वैक्सीन 94.5% तक प्रभावी है। मॉडर्ना के प्रेसिडेंट डॉ. स्टीफन होग ने कहा कि कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में ये बहुत अहम खबर है, क्योंकि हमारी वैक्सीन के नतीजे बता रहे हैं, कि इससे कोविड-19 के गंभीर से गंभीर संक्रमण को काफी हद तक रोका जा सकता है। ये वाकई एक मील का पत्थर है। हालांकि हमें आगे अभी बहुत काम करना है, वैक्सीन के इफेक्टिव होने के बावजूद हमें और डेटा जुटाना और उसकी स्टडी करनी होगी। इसके बाद हमें बड़े पैमाने पर वैक्सीन बनाने का काम करना शुरु होगा।

बेहतर नतीजों से बढ़ी उम्मीद

मॉडर्ना कंपनी के प्रेसिडेंट डॉक्टर स्टीफन होज ने बताया कि वैक्सीन के रेगुलेटरी प्रोसेस यानी प्रोडक्शन लेवल पर ले जाने से पहले सेफ्टी डेटा की स्टडी में अभी थोड़ा और वक्त लगेगा। लेकिन 10 महीनों की रिसर्च और 3 स्टेज के ट्रायल में अब तक जो नतीजा सामने आया है वो उम्मीद से ज्यादा है। प्रभावी वैक्सीन के लिए जो मानक 50 से 60 फीसदी होता है, उसमें मॉडर्ना के नतीजे करीब 95 फीसदी है और यही बात सबसे ज्यादा उत्साह बढ़ाने वाली है।  

जनवरी से जारी है रिसर्च 

मॉडर्ना की ये वैक्सीन पर रिसर्च जनवरी महीने में ही शुरु कर दिया गया था, जब कोरोना के मामले दुनिया के दूसरे देशों में मिलने शुरु हो गए थे। कोरोना वायरस की जिनोम मैपिंग और 2 महीने की रिसर्च के बाद मार्च में इसका पहला ह्यूमन ट्रायल शुरू किया गया था। इसके बाद जून में दूसरा ट्रायल हुआ। तीसरे फेज के ह्यूमन ट्रायल में 30 हजार लोगों को शामिल किया गया था। इसमें अलग अलग एज ग्रुप और कम्युनिटी के लोगों को रखा गया था। इम्युनिटी के लिहाज से 65 से ज्यादा लोग हाई रिस्क वाले थे।

वॉलेंटियर में नहीं दिखे साइड इफेक्ट 

वैक्सीन ट्रायल की वोलेंटियर जेनिफर हॉलर ने बताया कि वे 16 मार्च को वैक्सीन की ट्रायल में शामिल हुई थी। ये बेहद समान्य था। इसके 4 हफ्ते बाद मुझे दूसरा डोज दिया गया। इसके बाद हर महीने मेरा टेस्ट किया गया। इस दौरान मैं पूरी तरह फिट रही। मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई।जेनिफर हॉलर वही महिला हैं, जिन्हें वैक्सीन के पहले हम्यून ट्रायल में दवा इंजेक्ट किया गया था. हालांकि जेनिफर ने वैक्सीन लेने के बावजूद मास्क, सेनिटाइजर और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे कोरोना गाइडलाइन्स का पालन किया, लेकिन तीन चरणों के ट्रायल के बाद जेनिफर की फिटनेस मॉडर्ना वैक्सीन के कोई साइड इफेक्ट नहीं होने का सबूत है।

10 महीने में कैसे बनी वैक्सीन 

हम आपको बताते हैं मानव शरीर के लिहाज से इतनी सेफ वैक्सीन 10 महीने में कैसे बनी और शरीर में इंजेक्ट करने के बाद असर क्या होता है। 

  • पहला स्टेज: वैज्ञानिकों ने कोविड-19 के जेनेटिक कोड का एक हिस्सा लेकर उसके बाहरी हिस्से पर स्पाइक प्रोटीन बनाई। 
  • दूसरा स्टेज: नए स्पाइक प्रोटीन के साथ बनाए गए कोविड-19 के जेनेटिक कोड को इंजेक्शन के जरिए वोलेंटियर को दिया गया। 
  • तीसरा स्टेज: इसमें ये देखा गया, कि दवा इंजेक्ट होने के बाद मरीज के इम्यून सेल ने कितने नए स्पाइक प्रोटीन का निर्माण किया। 
  • चौथा स्टेज: इंजेक्ट किए गए स्पाइक प्रोटीन से मरीज का इम्यून सिस्टम एक्टिव हो जाता है और वायरस को शरीर में फैलने से रोकने के लिए एंटीबॉडी बनाने लगता है।
  • पांचवा स्टेज: इस चरण में ये देखा गया कि एंटीबॉडी बनाने के बाद मरीज का शरीर कोरोना वायरस के संपर्क में आने पर किस तरह उसे निष्प्रभावी बनाता है।

अभी भी थोड़ा इंतजार

WHO की चीफ साइंटिस्ट डॉ. सौम्या स्वामीनाथन के अनुसार अभी जो शुरुआती विश्लेषण सामने आया है उससे ये साफ है कि वैक्सीन 94 फीसदी से भी ज्यादा इफेक्टिव है। ये बहुत अच्छी बात है। लेकिन हमें और इंतजार करना होगा ताकि सुरक्षा और इसके असर को लेकर फाइनल रिजल्ट आए। ये तब होगा जब पूरे ट्रायल का डेटा एनालाइज किया जाएगा। इसके साथ ट्रायल में शामिल लोगों पर साइड इफेक्ट की जांच के लिए 2 महीने और फॉलो अप करना होगा।

Latest World News

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। US से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें विदेश

Advertisement
Advertisement
Advertisement