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12 साल में पहला मर्डर, कैसे दोस्त से जानी दुश्मन बना शेरू? जानें कहानी चंदन मिश्रा की

Reported By : Nitish Chandra Edited By : Amar Deep Published : Jul 19, 2025 12:33 pm IST, Updated : Jul 19, 2025 12:59 pm IST

पटना के पारस अस्पताल में चंदन मिश्रा की हत्या कर दी गई। चंदन के दोस्त शेरू ने ही सुपारी देकर उसकी हत्या करवाई। आइये जानते हैं चंदन मिश्रा की पूरी कहानी।

कहानी चंदन मिश्रा की।- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT कहानी चंदन मिश्रा की।

पटना: बिहार में इन दिनों चंदन मिश्रा का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। वजह है चंदन मिश्रा की हत्या। चंदन मिश्रा गैंगस्टर हुआ करता था, लेकिन पटना के पारस अस्पताल में उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। चंदन की हत्या किसी जमाने में उसके ही दोस्त रह चुके शेरू ने करवाई। ये हत्या इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि अपराधियों ने खुलेआम अस्पताल में फायरिंग की और फिर हथियार लहराते हुए मौके से फरार हो गए। चंदन मिश्रा बचपन से ही अपराध की दुनिया में संलिप्त रहा है। आइये जानते हैं चंदन के पहले अपराध से लेकर उसकी हत्या तक की कहानी।

12 साल में पहला मर्डर

दरअसल, कहानी की शुरुआत साल 2007 से होती है, जब चंदन मिश्रा की उम्र सिर्फ 12 साल थी। उसके पिता मंटू मिश्रा उस समय पंचायत के मुखिया थे। इसी समय क्रिकेट खेलने के दौरान चंदन का झगड़ा अपने एक पाटीदार शशिकांत से हो गया। शशिकांत ने चंदन के मुखिया पिता को चोर और भ्रष्ट कह दिया था। इसके बाद चंदन अपने घर गया, पिता का लाइसेंसी हथियार लिया और शशिकांत को गोली मार दी, जिससे शशिकांत की मौत हो गई। घटना के बाद शशिकांत के भाइयों ने चंदन को पकड़कर उसकी पिटाई कर दी। हालांकि शशिकांत की मां ने चंदन को बचा लिया। चंदन इकलौता बेटा था, यह कहकर शशिकांत की मां ने उसे बचा लिया अन्यथा उसी दिन चंदन मारा जाता।

चंदन और शेरू की दोस्ती

चंदन के बचने के बाद पिता मंटू मिश्रा उसे थाने ले गए और पुलिस के हवाले कर दिया। नाबालिग होने की वजह से चंदन को रिमांड होम भेजा गया। यहां चंदन ढाई साल तक यहां हिरासत में रहा। हिरासत में शेरू सिंह से उसकी दोस्ती हुई थी, जिसे एक व्यक्ति की बेटी के साथ छेड़खानी के आरोप में रिमांड पर लाया गया था। यहां लाए जाने से पहले शेरू को इतना पीटा गया था कि रिमांड में उसकी तबीयत काफी खराब हो गई थी। उसका चलना-फिरना तक मुश्किल था। इस दौरान चंदन ने शेरू की काफी मदद और देखभाल की।

एक ही दिन में तीन हत्याएं

रिमांड के दौरान चंदन के पिता मंटू मिश्रा ने भी शेरू की काफी मदद की। कानूनी लड़ाई में भी उसका साथ दिया। दोनों की दोस्ती गहरी हो गई। इसी दौरान शेरू ने वहां भागने की योजना बनाई। चन्दन को भी इसके लिए तैयार किया और दोनों रिहाई के सिर्फ दो दिन पहले रिमांड होम से भाग गए। फरार होने के कुछ ही दिन बाद दोनों ने एक ही दिन में तीन हत्याएं की। दोनों ने मिलकर नौशाद मुखिया, इस्लाम मियां का लड़का और सुरेश खरवार इन तीनों की हत्या सिर्फ एक दिन में कर दी। तीनों से इनका कोई व्यक्तिगत झगड़ा नहीं था।

शेरू ने चंदन के दिमाग में भरी जातीय नफरत

दरअसल, कुछ दिन पहले जब ये दोनों हिरासत में थे, उस दौरान खरहाटांड़ के सरपंच संतोष ओझा की हत्या हो गयी थी। यादव और मुस्लिम अपराधियों ने संतोष ओझा की हत्या की थी। राजपूत समाज से आने वाले शेरू ने उसी समय ब्राह्मण समाज के व्यक्ति संतोष ओझा की हत्या को लेकर चंदन के दिमाग में जातीय नफरत भड़काने की कोशिश की। शेरू ने चंदन को कहा- "आपके समाज के एक अच्छे व्यक्ति को मार दिया, इसका जवाब देना चाहिए।" इसलिए हिरासत से निकलते ही एक दिन में दोनों ने तीन हत्याएं कीं। नौशाद मुखिया का नाम संतोष ओझा की हत्या में साजिशकर्ता के तौर पर आ रहा था, इसी तरह सेमरी के प्रमुख सुरेश खरवार और इस्लाम मियां की भूमिका भी सामने आयी थी। चन्दन और शेरू ने एक दिन में ही तीनों की हत्या कर दी।

हलवदार और सिपाही की हत्या

उस समय से हत्या का जो सिलसिला चालू हुआ वो 7-8 महीने तक लगातार चलता रहा। एक साल बाद दोनों कोलकाता में पकड़े गए और फिर दोनों बक्सर जेल आ गए। कुछ समय बाद पेशी के दौरान शेरू ने कोर्ट में हवलदार को गोली मार दी और भाग गया, लेकिन चंदन जेल में ही रह गया। शेरू ने जेल से भागने के बाद आरा में एक व्यक्ति की हत्या कर दी। ये वही व्यक्ति था, जिसने अपनी बेटी से छेड़खानी के आरोप में शेरू की पिटाई की थी और वो रिमांड होम भेजा गया था। दूसरी तरफ चंदन यहां से अपने परिवार के करीब होता गया। जेल में परिवार के लोग उससे आकर मिलते रहे। कुछ दिन बाद शेरू आरा में पकड़ा गया और आरा जेल में शिफ्ट हुआ। यहां शेरू ने जेल गेट पर तैनात एक सिपाही की हत्या करा दी। उस सिपाही की वजह से उसे मोबाइल का इस्तेमाल करने में काफी दिक्कत हो रही थी। इसके बाद शेरू को भागलपुर जेल शिफ्ट किया गया।

चंदन और शेरू में बढ़ी दूरियां

इसी समय शेरू का किसी बात को लेकर चंदन से विवाद हो गया। उम्र और क्राइम की दुनिया में शेरू जूनियर था और चंदन सीनियर था। 2014 में शुरू हुआ विवाद आगे बढ़ता गया। शेरू को एक हत्या मामले में पहले फांसी और फिर आजीवन कारावास की सजा हुई, जबकि चंदन को आजीवन कारावास की सजा हुई। चंदन के परिवार के अनुसार चंदन पर जेल में रहते कोई हत्या का आरोप नहीं लगा था। उसे उम्मीद थी कि उम्रकैद की सजा पूरी कर लेने के बाद वो रिहा हो जायेगा।

वर्चस्व बना चंदन पर हमले की वजह

हाल ही में अपने पिता और खुद के इलाज को लेकर ज़ब चंदन पैरोल पर बाहर आया, तो शेरू को लगा कि यदि ये बाहर आ गया तो फिर उसका वर्चस्व खत्म हो जायेगा। चंदन के रील और वीडियो देखकर उसे इस बात का और एहसास हुआ। पैरोल के दौरान चंदन के साथ काफी संख्या में लोग मिलने आ रहे थे, जिसका वीडियो भी सामने आ रहा था। चंदन के गांव से सिर्फ 2 किमी दूर शेरू का गांव था। पुरुलिया जेल में उसे सब जानकारी हो रही थी। चंदन के पिताजी को लीवर की प्रॉब्लम थी। एम्स अस्पताल में पिता का इलाज कराने के बाद चंदन अपना इलाज पारस में कराने आया था। डॉक्टर पिंटू ने चंदन का ऑपरेशन किया था। 16 जुलाई को उसे रिलीज होना था, लेकिन डॉक्टर पिंटू ने कहा कि एक दिन और रुक जाएं, 17 जुलाई को रिलीज कर देंगे। चंदन को पेरोल खत्म होने पर 18 जुलाई को जेल में हाजिर भी होना था।

हत्या से पहले चंदन को किया वीडियो कॉल

शेरू ने सबसे पहले चंदन का भरोसा जीतने की योजना बनाई। जब जेल से चंदन निकला तो शेरू ने चंदन को वीडियो कॉल किया। शेरू ने कहा- "का बाबा तू बड़ी घूम तार, पटना हम ना घूमेम, हम अंदरे रहेम? (आप बाहर घूम रहे हैं हैं, पटना हम नहीं घूमेंगे, हम अंदर ही रहेंगे?)। इसके बाद 15 जुलाई को जिस दिन चंदन का ऑपरेशन हुआ था, उस दिन भी शेरू ने वीडियो कॉल किया। शेरू ने इस दिन अपनी पत्नी से भी चंदन की बात करवाई, फिर बेटे को भी कॉल पर जोड़ा। शेरू ने कहा- "बेटा के भी आशीर्वाद दे दीं"। चंदन ने उस दिन शेरू से कहा- "तुम भी बाहर जब निकलोगे, हम लोगों को जो करना था वो हमने कर लिया, अब ये सब छोड़ देना है, अब आगे का जो काम है वह करना है।" चंदन के करीबी लोगों का कहना है कि शेरू ने हत्या से पहले चंदन का भरोसा जीतने की कोशिश की।

सुपारी देकर करवाई चंदन की हत्या

चंदन के परिवार के अनुसार शेरू ने 10 लाख में तौसीफ को सुपारी दी थी। शेरू ने बक्सर के अपने 3 लड़के भी तौसीफ को दिए थे। तौसीफ़ ने अपने 2 लड़कों को साथ रखा। चंदन के परिवार के अनुसार चंदन को 32 गोली मारी गई थी। हॉस्पिटल में कमरे का गेट अंदर से लॉक नहीं होता था। इस वजह से सभी आरोपी अस्पताल के कमरे में घुसे और चंदन की गोली मारकर हत्या कर दी। घटना को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। आरोपियों की तस्वीर सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। फिलहाल पुलिस इन सभी की तलाश में जुटी हुई है। 

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