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Aap Ki Adalat: आत्महत्या में भी फेल हो गए थे कैलाश खेर! कम पड़ गया था गंगा का पानी, जानें कैसे बदला नसीब का खेल

Written By: Jaya Dwivedie @JDwivedie Published : Jun 28, 2025 10:11 pm IST, Updated : Jun 28, 2025 11:48 pm IST

आप की अदालत में आज कैलाश खेर ने शिरकत की। उन्होंने अपने जिंदगी के कई पन्ने लोगों के सामने खोले हैं। करियर की शुरुआत से लेकर शिखर तक पहुंचने की दास्तां उन्होंने बयां की। इस दौरान उनकी जिंदगी का अहम किस्सा भी सामने आया।

Kailash kher- India TV Hindi
Image Source : INSTAGRAM कैलाश खेर और रजत शर्मा।

देश के चर्चित और लोकप्रिय टीवी शो 'आप की अदालत' में इस बार रजत शर्मा के मेहमान बनकर आए हैं जाने माने गायक, संगीतकार और विचारक कैलाश खेर। कैलाश खेर का बॉलीवुड में लंबा सफर रहा है। कई विवादित बयानों से लेकर एक स्प्रिचुअल जर्नी तय करने वाले कैलाश खेर ने आद अपने दिल की बात बयां की हैं। इंडिया टीवी के एडिटर इन चीफ रजत शर्मा के तीखे सवालों का जवाब देते हुए कैलाश खेर ने अपनी लाइफ के मुश्किल दौर पर भी बात की। उन्होंने बताया कि किस तरह उनकी जिंदगी में मुश्किल दौर आए और उन्हें कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा। संगीत और सवालों की जुगलबंदी के बीच ही उन्होंने खुलासा किया गंगा में आत्महत्या के लिए उन्होंने छलांग लगाई थी, वो भी असफल हुई। यहीं से उनकी कामयाबी के शिखर पर पहुंचने की यात्रा शुरू हुई। 

छह साल में बन जाते पुरोहित

रजत शर्मा ने जब कैलाश खेर से सवाल किया, लेकिन यह सच है कि जब हर चीज में फेल हो गए तो फिर आपको लगा नहीं। इससे तो पुरोहित बनना ठीक है और कर्मकांड सीखने के लिए ऋषिकेश चले गए? इसका जवाब देते हुए कैलाश खेर ने कहा, 'जी जब मैं पक चुका था सारी चीजों से तब मुझे पिताजी की बात याद आई कि पिताजी आप सही कहते थे शायद। और एक महात्मा जी पिताजी के मित्र भी मिले। सफदरजंग एनक्लेव में आश्रम अभी भी है उनका तो उन्होंने बताया तुम मेरे साथ चलो परमार्थ निकेतन ऋषिकेश और वहीं सीखना। स्वामी परिपूर्णानंद जी थे, वहां कर्मकांड सीखना और छह साल में तुम पुरोहित हो जाओगे।' 

पंडित बनने पहुंचे थे ऋषिकेश

उन्होंने आगे कहा, 'तुमको कहीं मैं भेज दूंगा। चाहे मॉरीशस या कहीं एक दो जगह का नाम लिया सिंगापुर या मॉरीशस तो मुझे अचानक लगा हर चीज में तो विफल हुआ ही हूं। अब क्या पता कर्मकांड सीख के पता था कि विदेश में जाकर पंडित बनेंगे तो इसमें पिताजी जैसे 100-150 नहीं कमाएंगे। दिन की कुछ अच्छी इनकम होगी तो चलो कोई नहीं। लौट के बुद्धू घर को आ गए तो वैसा हुआ साहब। जब हम कर्मकांड सीख रहे थे तो उस वक्त हमारे जो साथी थे, हमारे क्लासमेट्स कहे जिनको वो हमसे 7, 8,9 साल छोटे, अब हम किस टाइप के हो गए हैं? 12 13 की आयु से निकले, धक्के खाए यहां वहां अब हम 21 के होके पंडित बन गए हैं। अच्छा हमारे जो साथी हैं वो 13 -14 साल वाले हैं तो थोड़ा वहां कांप्लेक्स मन में आया यार, अब मैं ये कर रहा हूं। भगवान मैं क्या हर जगह में विफल होता हूं। दाता ने अब मेरी यहां परीक्षा लेने भेज दिया आपने तो उसी वक्त सब सारी चुनौतियां जब इकट्ठी हुई थी तभी हमने अपने आप को समाप्त करने का भी निर्णय लिया था।'

डूब गए थे कैलाश खेर

आगे कैलाश खेर ने कहा, 'पूरा डूब गए थे और कुदरतन बात है कि हम अब जिंदा हैं। आज आपके समक्ष हैं और किस रूप में हैं, यह भी आप बड़ों का आशीर्वाद है। ये हुआ साहब। एक बात। और मन में कुलबुला रहा था जो जिससे मन, वो यह थी कि परमात्मा में ऐसे समय में ऐसी जगह पर जन्मा हूं जहां बहुत ही असंवेदनशील लोग रहते हैं और उसके बाद भी आपको बन के रहना। हो के नहीं इन सब के साथ बन के दिखाना है।

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