Saturday, January 31, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. मनोरंजन
  3. बॉलीवुड
  4. धुरंधर को लेकर क्या बोले अनुराग कश्यप? बैंगलुरु इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बताई फिल्म की खासियत

धुरंधर को लेकर क्या बोले अनुराग कश्यप? बैंगलुरु इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बताई फिल्म की खासियत

अनुराग कश्यप ने 17वें बेंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में धुरंधर को लेकर बात की। साथ ही उन्होंने इस फिल्म को लेकर कुछ अपनी असहमति भी जाहिर की।

Written By: Shyamoo Pathak
Published : Jan 31, 2026 11:32 pm IST, Updated : Jan 31, 2026 11:32 pm IST
Anurag Kashyap- India TV Hindi
Image Source : IMAGE SOURCE-ANI अनुराग कश्यप

बॉलीवुड अभिनेता-निर्देशक अनुराग कश्यप ने 17वें बेंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में 'निडर फिल्म निर्माण' शीर्षक से आयोजित एक चर्चा में अपने विचार साझा किए। इस चर्चा का संचालन प्रख्यात फिल्म समीक्षक बरदवाज रंगन ने किया। उन्होंने सिनेमा, राजनीति और प्रौद्योगिकी के वर्तमान रुझानों पर चर्चा की। अनुराग कश्यप ने कहा, 'आज के दौर में गैंग्स ऑफ वासेपुर या ब्लैक फ्राइडे जैसी फिल्में बनाना नामुमकिन है। कुछ विषय राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गए हैं और विवादों को जन्म देते हैं।' उन्होंने आगे कहा, ईरान या रूस जैसे देशों के निर्देशक हमसे कहीं अधिक प्रतिबंधों का सामना करते हुए भी फिल्में बना रहे हैं। भारतीय निर्देशकों को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'धुरंधर' के बारे में बात करते हुए निर्देशक अनुराग कश्यप ने कहा, 'यह एक साहसी मुख्यधारा फिल्म का अच्छा उदाहरण है। मुझे फिल्म पसंद आई, लेकिन कुछ विचारधाराएं मुझे पसंद नहीं आईं। तीन दृश्यों में से 'यह नया भारत है' वाला संवाद और एक लंबा राजनीतिक एकालाप अनावश्यक थे, इनके बिना भी फिल्म का प्रभाव कम नहीं होता।'

धुरंधर को लेकर क्या बोले अनुराग कश्यप

कश्यप ने टिप्पणी की कि फिल्मों को 'प्रचार' या 'प्रचार' कहना अपने आप में एक प्रकार का प्रचार है। उन्होंने आगे कहा, 'हॉलीवुड की मार्वल फिल्में अमेरिकी वर्चस्व का प्रचार करती हैं, लेकिन कोई भी उस दृष्टिकोण से उनकी आलोचना नहीं करता।' कन्नड़ फिल्म 'टॉक्सिक' के टीजर के बारे में उन्होंने इसकी बेहद साहसिक कोशिश बताते हुए प्रशंसा की। उन्होंने निराशा व्यक्त करते हुए कहा, 'टीजर के खिलाफ व्यक्त किया गया आक्रोश हमारे सांस्कृतिक पाखंड को उजागर करता है। जब पुरुष अभिनेता बिना शर्ट के स्क्रीन पर दिखाई देते हैं या अत्यधिक मर्दानगी का प्रदर्शन करते हैं, तो कोई सवाल नहीं उठाता। लेकिन जब कोई महिला अपनी कामुकता का जश्न मनाती है, तो इसे स्वीकार करना मुश्किल हो जाता है।' कन्नड़ साहित्य के प्रति अपना प्रेम व्यक्त करते हुए अनुराग कश्यप ने घोषणा की कि वे प्रसिद्ध लेखक विवेक शानबाग के उपन्यास 'घाचर घोचर' का कन्नड़ फिल्म रूपांतरण बना रहे हैं। फिल्म फिलहाल पटकथा लेखन के चरण में है और बाद में इसे हिंदी में भी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि निर्देशक और कलाकारों के बारे में जल्द ही जानकारी दी जाएगी।

कहानियों का होता है अपना समय

उन्होंने कहा कि आजकल के दर्शक मोबाइल फोन पर फिल्में देखना पसंद करते हैं और धीमी गति वाली फिल्मों में ध्यान बनाए रखना मुश्किल होता है। उन्होंने विश्लेषण करते हुए कहा, 'यह तकनीक में बदलाव का नतीजा है, दर्शकों की गलती नहीं।' राजनीतिक फिल्मों से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने मार्मिक ढंग से कहा, 'जर्मनी में हिटलर के खिलाफ फिल्में हिटलर की मृत्यु के बाद ही आईं। हर चीज का अपना समय होता है।'

ये भी पढ़ें- बढ़ने लगी मर्दानी 3 की कमाई, दूसरे दिन दिखा शानदार उछाल, इतने करोड़ पहुंचा आंकड़ा

कान्स फेस्टिवल में अनुराग कश्यप की इस फिल्म का बजा था डंका, अब ओटीटी रिलीज के लिए है तैयार, धांसू है सनी लियोनी का रोल

Latest Bollywood News

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Bollywood से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें मनोरंजन

Advertisement
Advertisement
Advertisement