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चॉल में बीता बचपन, पहली फिल्म के लिए घिसनी पड़ी एड़ियां, हीरो बनने के लिए चुकानी पड़ी थी ये कीमत

 Written By: Priya Shukla
 Published : Apr 07, 2025 11:16 am IST,  Updated : Apr 07, 2025 11:41 am IST

बॉलीवुड के जंपिंग जैक के नाम से मशहूर जितेंद्र आज अपना 83वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं। आज बॉलीवुड में जितेंद्र का परिवार एक अलग मुकाम रखता है, लेकिन एक समय ऐसा था जब दिग्गज अभिनेता मुंबई के चॉल में रहते थे। चलिए उनके जन्मदिन पर आपको उनसे जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से सुनाते हैं।

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जितेंद्र आज अपना 83वां जन्मदिन मना रहे हैं। Image Source : INSTAGRAM

बॉलीवुड में नाम कमाना कोई आसान बात नहीं है। खासतौर पर पहले ब्रेक के लिए कलाकारों को कई-कई दिनों तक एड़ियां घिसनी पड़ती हैं। आज बॉलीवुड के ऐसे ही एक सुपरस्टार का जन्मदिन है, जिसे उसके करियर की पहली फिल्म बड़ी ही मुश्किलों के बाद मिली थी। फिल्म के लिए एक्टर ने कई महीने सैलरी में कटौती के साथ काम किया। हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड में जंपिंग जैक के नाम से मशहूर जितेंद्र की। आज जितेंद्र का जन्मदिन है। दिग्गज अभिनेता का जन्म 7 अप्रैल 1942 को पंजाब में हुआ। उन्होंने बॉलीवुड में खूब नाम कमाया। उनकी बेटी एकता कपूर आज टीवी से लेकर फिल्मी दुनिया तक पर राज कर रही हैं। लेकिन, नाम और शोहरत कमा चुके जितेंद्र के लिए ये सफर इतना भी आसान नहीं रहा। चलिए उनके जन्मदिन पर आपको उनसे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें बताते हैं।

जितेंद्र का बचपन

जितेंद्र ने अपनी जिंदगी के 18 साल मुंबई की चॉल में गुजारे और अपनी पहली फिल्म के लिए उन्हें ढेरों पापड़ बेलने पड़े। अन्नू कपूर ने अपने शो 'सुहाना सफर' में जितेंद्र से जुड़ा एक किस्सा सुनाया था। उन्होंने जितेंद्र के बारे में बात करते हुए बताया था कि जितेंद्र के पिता और अंकल फिल्मों में जूलरी सप्लाई करने का काम करते थे। जितेंद्र की उम्र तब काफी कम थी, जब उन्हें हार्ट अटैक आ गया। इसके बाद घर पर मुश्किलें आ गईं। घर खर्च भी मुश्किल हो गया। ऐसे में जितेंद्र ने अपने अंकल से कहा कि वह उन्हें वी. शांताराम से मिला दें। जितेंद्र एक्टर बनने का सपना लेकर वी. शांताराम के पास पहुंचे, लेकिन उन्हें उनसे वो रिस्पॉन्स नहीं मिला, जिसकी उन्हें उम्मीद थी।

जितेंद्र से क्या बोले थे वी. शांताराम

जितेंद्र वी. शांताराम से मिले और उनसे फिल्मों में काम देने की गुजारिश की। लेकिन, शांताराम ने जवाब में कहा- 'तुम्हे जितनी कोशिश करनी है कर लो, लेकिन मैं तुम्हे चांस नहीं दूंगा।' दुखी मन से जितेंद्र लौट गए, लेकिन बाद में जितेंद्र को वी. शांताराम के ऑफिस से बुलावा मिला। हालांकि, यहां पहुंचने पर उन्हें पता चला कि उन्हें कोई रोल तब मिलेगा, जब कोई जूनियर आर्टिस्ट नहीं आएगा। एक्टिंग का मौका मिले या ना मिले, उन्हें रोज राजकमल स्टूडियो जाना था और उनकी पगार थी 150 रुपये महीना। जितेंद्र ने बात मान ली और रोजाना राजकमल स्टूडियो पहुंच जाते।

नजरों में आने के लिए करते थे कोशिश

वी. शांताराम तो पहले ही जितेंद्र को झिड़क चुके थे, लेकिन काम के लालच में जितेंद्र रोजाना कुछ ना कुछ ऐसा करते कि वह उनकी नजरों में छा गए। फिर वी. शांताराम ने उन्हें अपनी अगली फिल्म में लेने का मन बनाया। उन्होंने जितेंद्र को स्क्रीन टेस्ट देने को कहा। लेकिन, जब उन्हें बुलाया गया तो वह निराश हो गए, क्योंकि वह एक डायलॉग तक ठीक से नहीं बोल पा रहे थे। करीब 30 टेक दिए, इसके बाद भी कोई सुधार नहीं, लेकिन इसके बाद भी उन्हें स्क्रीन टेस्ट का ऑफर मिल गया। बड़ी मुश्किलों से जितेंद्र ने अपना स्क्रीन टेस्ट क्लियर किया और उन्हें उनके करियर की पहली फिल्म मिली। जितेंद्र की पहली फिल्म 'गीत गाया पत्थरों ने' थी, जो 1964 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में वह मुख्य भूमिका में थे।

हीरो बनते ही घटी सैलरी

जितेंद्र के हाथ करियर की पहली फिल्म तो लग गई, लेकिन इसी के साथ उनकी सैलरी घट गई। फिल्म मिलने से पहले वह 150 रुपये महीना कमा रहे थे, लेकिन हीरो बनने पर उनके पैसे घट गए। उनकी सैलरी घटाकर 150 रुपये से 100 रुपये कर दी गई। उन्हें कहा गया कि क्योंकि उन्हें ब्रेक दिया गया है, इसलिए उनकी सैलरी घटा दी गई है। दूसरी तरफ जितेंद्र भी इसके लिए राजी हो गए, लेकिन अपनी सैलरी के लिए उन्हें 6 महीने का इंतजार भी करना पड़ा।

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