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इश्क नहीं, मौत का जश्न है कैलाश खेर का ये हिट गाना, जिस पर अपनी शादी में दूल्हे की बलैया लेती हैं नई-नवेली दुल्हनें

Written By: Priya Shukla Published : Jan 03, 2026 05:04 pm IST, Updated : Jan 03, 2026 05:04 pm IST

क्या आप कैलाश खेर के उस गाने के बारे में जानते हैं, जो उन्होंने किसी खुशी नहीं बल्कि गम में गाया था और अब उनका ये गाना हर शादी की शान होता है। नई-नवेली दुल्हनें थिरकते हुए इस गाने पर एंट्री लेती हैं।

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Image Source : INSTAGRAM/@KAILASHKHER कैलाश खेर।

कैलाश खेर ने अपने करियर में हर तरह के गाने दिए हैं। उनका कोई गाना लोगों के चेहरे पर मुस्कान ले आता है तो कोई आंखें नम कर देता है। कैलाश खेर ने सूफी से लेकर क्लासिकल सॉन्ग्स तक के जरिए फैंस के दिल जीते हैं। उनके हर गाने का ही नहीं, गाने की हर लाइन, हर शब्द का वजूद होता है। यही वो वजह है कि उनके हर गाने दिल को छू जाते हैं। कैलाश खेर अब तक 700 से ज्यादा गानों को आवाज दे चुके हैं और कुछ तो ऐसे गाने हैं, जिनके बजते ही दिल के तार छिड़ जाते हैं। लेकिन, क्या आप इस महान सिंगर के उस गाने के बारे में जानते हैं जो उन्होंने इश्क नहीं मौत के जश्न में गाया था, लेकिन अब उनका ये गाना आए दिन शादियों में सुनने को मिलता है।

क्या है 'आज मेरे पिया घर आवेंगे' का इतिहास?

हम यहां कैलाश खेर के सुपरहिट गाने 'आज मेरे पिया घर आवेंगे' की बात कर रहे हैं। यूं तो कैलाश खेर ने 'अल्लाह के बंदे हंस दे' और 'रब्बा इश्क न होवे' जैसे सुपरहिट गाने दिए हैं, लेकिन 'आज मेरे पिया घर आवेंगे' की पॉपुलैरिटी किसी और ही लेवल की है। मगर आपको जानकर हैरानी होगी कि ये एक रोमांटिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक सॉन्ग है, जो शादी-ब्याह में खूब बजाया जाता है।

क्या थी  'आज मेरे पिया घर आवेंगे' की प्रेरणा?

कैलाश खेर ने खुद इस बात का खुलासा किया था कि उन्हें 'आज मेरे पिया घर आवेंगे' की प्रेरणा प्यार से नहीं बल्कि मौत से मिली थी। उन्होंने शुभांकर मिश्रा के साथ बातचीत में इस पूरी रचना के बारे में बात की थी। उन्होंने इस बारे में बात करते हुए कहा था- 'मेरे पिता 21 नवंबर को जोर-जोर से हरे राम और भगवान के भजन गा रहे थे। ये देखने में सामान्य नहीं लग रहा था। वो अपने भगवान में लीन थे और उनके मुख पर सिर्फ ईश्वर का नाम था। मैंने उनसे पूछा- पिताजी, आप ठीक हैं? और तभी उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए। मगर जब उनका निधन हुआ, उनके चेहरे पर एक शांति, एक खुशी थी। जैसे वो अपने परमात्मा से मिलकर पूर्ण हो गए हों।'

पिता के एहसास को पंक्ति में उतारा

कैलाश खेर कहते हैं- 'मुझे लगता है, मेरे पिता को एहसास हो गया था कि वह आज परमात्मा में लीन होने वाले हैं, वह बहुत खुश और सुकून में थे।' इसी के बाद कैलाश खेर ने इस गाने की रचना की थी। बता दें, कैलाश खेर ने अपने पिता से ही संगीत का ज्ञान लिया था,वह उनके लिए एक पिता होने के साथ-साथ उनके गुरु भी थे। ऐसे में अपने पिता के निधन से वह पूरी तरह टूट गए थे।

आत्मा और परमात्मा के मिलन को दिखाता है ये गाना

शादी-ब्याह में बजने वाले  'आज मेरे पिया घर आवेंगे' को लेकर अवधारणा है कि ये गाना एक दुल्हन अपने पति के लिए गा रही है। वो श्रृंगार कर रही है और अपने पिया का इंतजार कर रही है। हालांकि, ऐसा नहीं है। इस गाने की लाइन है 'हे री सखी मंगल गाओ री, धरती अंबर सजाओ री, तरेगी आज मेरे पी की सवारी', जिसका मतलब है 'एक आत्मा, जो शरीर को त्याग चुकी है। ये आत्मा, अपने परमात्मा यानी अपने पिया से मिलने के लिए उत्साहित है, वह  अपना श्रृंगार कर रही है, खुद को बुरे कर्मों से मुक्त कर रही है और अब अपने पिया से मिलने के लिए तैयार है, उत्साहित है।'

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