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Dasvi Movie Review: अभिषेक बच्चन हुए पास मगर फिल्म 'दसवीं' फेल

 Published : Apr 07, 2022 12:10 pm IST,  Updated : Apr 07, 2022 12:56 pm IST

एक उचित शिक्षा प्रणाली की कमी को टारगेट में रख कर आगे बढ़ने वाली 'दसवीं' में वास्तविक समस्या कहीं खो सी गई हैं।

Dasvi Movie Review

Dasvi Movie Review

Photo: MOVIE POSTER
  • फिल्म रिव्यू: Dasvi
  • स्टार रेटिंग 2/5
  • पर्दे पर: APR 07, 2022
  • डायरेक्टर: तुषार जलोटा
  • शैली: सोशल कॉमेडी

अभिषेक बच्चन, यामी गौतम और निम्रत कौर स्टारर फिल्म 'दसवीं' नेटफ्लिक्स पर रिलीज कर दी गई है। इस फिल्म का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार था, क्योंकि फिल्म में अभिषेक बच्चन एक ऐसे राजनेता के किरदार में हैं जो दसवीं की परीक्षा पास करने की मशक्कत करते हैं। क्या अभिषेक बच्चन इस फिल्म में 'दसवीं' पास हो जाते हैं? इसे जानने के लिए आपको यह फिल्म देखनी होगी लेकिन उससे पहले ये जान लें कि आखिर एक बेहतर फिल्म होने की परीक्षा में इस फिल्म को कितने अंक मिले हैं?

कहानी

एक घोटाले में मुख्यमंत्री गंगाराम चौधरी (अभिषेक बच्चन) का नाम सामने आने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत की सजा सुनाई गई है। हरियाणवी राजनेता ने जेल की सजा के दौरान अपनी कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में बैठने का फैसला किया। वह कसम खाते हैं कि जब तक वह दसवीं पास नहीं होंगे, वह फिर से सीएम नहीं बनेंगे। इस बीच, जेल में गंगाराम को एक पुलिस ऑफिसर, ज्योति देसवाल (यामी गौतम) से मुलाकात होती है, जो गंगाराम चौधरी सनक और उनके फरमानों के आगे झुकने से इनकार करती है। दूसरी ओर, गंगाराम की पत्नी विमला देवी (निम्रत कौर) को कुर्सी और सत्ता की चाह होती है। परिवार में सीएम का पद बरकरार रखने के लिए, वह अपने पति की सीट हासिल करती हैं बाद में अपने पद को फिरे पाने के लिए राजनीति का सहारा लेती हैं।

कैसी है फिल्म 'दसवीं'? 
'दसवीं' एक साधारण फिल्म है जो जिसका उद्देश्य 'शिक्षा का अधिकार' को बढ़ावा देना है हालांकि, इसमें फोकस और एंटरटेनमेंट की कमी है। अच्छे नोट पर बनाई गई फिल्म में लेखकों रितेश शाह, सुरेश नायर और संदीप लेज़ेल ने कहानी को बेहतर तरह से पिरोने में कहीं कसर छोड़ दी है। फिल्म के पहले हाफ में आपको फिल्म की अपनी कहानी और फोकस पर भटकाव नजर आता है। हालांकि, इंटरवल के बाद जब उम्मीद बंधती है लेकिन लंबे और भारी भरकम डायलॉग फिल्म को बोरियत से भर देते हैं। बात करें अभिषेक बच्चन और निम्रत कौर की केमिस्ट्री की तो दोनों का ऑन-स्क्रीन इक्वेशन बहुत बेसिक लेवल का नजर आता हैं, उनके बीच कोई केमिस्ट्री नहीं दिखाई देती है। 'दसवीं' ने एक सोशल कॉमेडी होने का वादा तो किया था लेकिन फिल्म में कॉमेडी के पंच बहुत पुराने लगे। फिल्म जिस तरह के कॉन्सेप्ट के साथ कॉमेडी की आशा की गई थी यह उस मुताबिक नहीं पूरी हो पाई।

एक्टिंग
अभिषेक बच्चन कई बार एक सेलुलर नेटवर्क के विज्ञापन में हरयाणवी रोल में नजर आए हैं। फिल्म में उन्होंने अपने अनुभव का इस्तेमाल किया है और घणे चौधरी के रूप में अपने रौब के जरिए फिल्म में जान डालने की कोशिश की लेकिन निर्देशन की कमियों में उनकी एक्टिंग को वो एज नहीं मिल पाया जैसा वह अपनी मौजूदगी से करते रहे हैं। 'बॉब बिस्वास' की बेहतर एक्टिंग के सफर को उन्होंने कायम रखा है। फिल्म में यामी गौतम को और बेहतर स्पेस मिल सकता था। हालांकि, उन्हें अपने किरदार के साथ बेहतर करने की हमेशा कोशिश की। निम्रत कौर ने भी अपनी पुरानी परफॉर्मेंस को एक नया आयाम देने की कोशिश की। बेहतरीन कलाकारों की टीम लेने बाद भी निर्देशक ने इनसे वह काम नहीं करवाया जैसे ये कलकार काम आ सकते थे। 

कुल मिलाकर, एक उचित शिक्षा प्रणाली की कमी को टारगेट में रख कर आगे बढ़ने वाली 'दसवीं' में वास्तविक समस्या कहीं खो सी गई हैं। यहां तक कि शिक्षा के महत्व के बारे बताई गई बातें भी दर्शकों को उन्हें गंभीरता से नहीं लेने देती। फिल्म ने हमें एक बात जरूर सिखाई कि - कुछ नया सीखने में कभी देर नहीं होती! हालांकि, अपने नए विज्ञापन के जरिए ये बात अमिताभ बच्चन भी समझाने की कोशिश कर रहे हैं।

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