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क्या है CNAP? DoT की इस खास सर्विस से पूरी तरह बंद हो जाएंगे फर्जी कॉल्स?

दूरसंचार विभाग टेलीकॉम ऑपरेटर्स को जल्द से जल्द CNAP लागू करने के लिए कह रहा है। दूरसंचार कंपनियां फिलहाल इस खास सर्विस का ट्रायल कर रही हैं। ट्रायल पूरा होने के बाद ही इसे लागू किया जा सकेगा। TRAI के मुताबिक, इस सर्विस के लागू होने से फर्जी कॉल्स को रोका जा सकेगा।

Written By: Harshit Harsh @HarshitKHarsh
Published : Sep 05, 2025 03:42 pm IST, Updated : Sep 05, 2025 03:45 pm IST
CNAP, TRAI- India TV Hindi
Image Source : UNSPLASH क्या है CNAP?

TRAI और दूरसंचार विभाग (DoT) लंबे समय से मोबाइल यूजर्स के नंबर पर आने वाले फर्जी कॉल्स को रोकने के लिए काम कर रहे हैं। पिछले साल दूरसंचार नियामक ने कॉलर नेम प्रजेंटेशन यानी CNAP सर्विस की सिफारिश की थी। TRAI ने अपनी सिफारिश में कहा था कि CNAP सर्विस लागू होने से स्कैम कॉल की समस्या पूरी तरह से खत्म हो जाएगी और आए दिन होने वाले फाइनेंशियल फ्रॉड को काफी हद तक रोका जा सकेगा। आखिर क्या है CNAP, जिसे लेकर ट्राई पिछले साल से ही लागू करने पर जोर दे रहा है?

क्या है CNAP?

जैसा कि नाम से साफ है कि CNAP यानी कॉलर नेम रिप्रजेंटेशन, जिसमें फोन पर आने वाले इनकमिंग कॉल्स में कॉलर का नाम दिखाई देगा। हालांकि, यह ट्रू-कॉलर या अन्य कॉलर आईडी ऐप्स से बिलकुल अलग है। इसमें यूजर को कॉल करने वाले कॉलर का वही नाम दिखाई देगा, जिस आईडी से सिम कार्ड खरीदा गया है। हालांकि, इस सर्विस को लागू करने में कई तकनीकी समस्याएं भी हैं और प्राइवेसी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

रिपोर्ट्स की मानें तो पिछले दिनों टेलीकॉम कंपनियों ने इंटर और इंट्रा-सर्किल में CNAP का ट्रायल शुरू कर दिया गया है। टेलीकॉम कंपनियां टेस्टिंग के दौरान यूजर के फोन पर आने वाले इनकमिंग कॉल्स में कॉलर का नाम दिखाएंगे। हालांकि, टेलीकॉम कंपनियां अभी भी दूरसंचार विभाग से इसे लेकर हो रहे कंफ्यूजन पर क्लियरिटी के इंतजार में है।

CNAP, TRAI

Image Source : UNSPLASH
CNAP

टेलीकॉम ऑपरेटर्स का कहना है कि यूजर्स को फोन पर उसका नाम दिखना चाहिए, जिसने कॉल किया है न कि जिसके नाम पर सिम खरीदा गया है। ET Telecom की रिपोर्ट के मुताबिक, Airtel, Jio, Vi, BSNL का कहना है कि हमें दूरसंचार विभाग से बिजनेस और फैमिली कनेक्शन को लेकर क्लियरिटी का इंतजार है।

TRAI की सिफारिशें

दूरसंचार नियामक वहीं दूसरी तरफ टेलीकॉम ऑपरेटर्स को जल्द ही CNAP सर्विस लागू करने के लिए कह रहा है। नियामक का कहना है कि CNAP सर्विस में कॉलर के नाम पर CAF यानी कंज्यूमर अप्लिकेशन फॉर्म में दिए गए नाम को डिस्प्ले किया जाएगा, ताकि रिसीव करने वाले यूजर को यह आसानी से पता चल जाएगा कि ये कॉल किसने किया है। इस तरह से स्कैम या फ्रॉड वाले कॉल्स को पूरी तरह से रोका जा सकेगा।

इस समय इंटरनेट बेस्ड कॉल्स भी यूजर्स को किए जाते हैं, जिसमें 10 अंक के मोबाइल नंबर से यूजर को कॉल रिसीव होते हैं। हालांकि, ये नंबर टेलीकॉम ऑपरेटर्स के पास रजिस्टर्ड नहीं होते हैं। स्कैमर्स VoIP यानी इंटरनेट बेस्ड वॉइस कॉल का इस्तेमाल करते हैं ताकि उन्हें ट्रैक नहीं किया जा सके। CNAP लागू होने पर कॉल रिसीव करने वाले यूजर को जेनुइन कॉलर और इंटरनेट बेस्ड कॉलर की पहचान करने में आसानी होगी और वो स्कैम होने से बच सकते हैं।

क्या है दिक्कत?

टेलीकॉम ऑपरेटर्स का कहना है कि बिजनेस कनेक्शन में बल्क में सिम कार्ड खरीदे जाते हैं, जो कंपनी के नाम पर जारी किए जाते हैं। इसमें किसी इंडिविजुअल यूजर का नाम दर्ज नहीं होता है। ऐसे कनेक्शन के लिए CNAP लागू होने से पहले कॉलर के नाम पर किसका नाम डिस्प्ले किया जाए - कंपनी, ब्रांड नेम या फिर इंडिविजुअल यूजर?

इसी तरह फैमिली पोस्टपेड प्लान वाले कनेक्शन में एक ही आईडी पर कई सिम कार्ड जारी किए जाते हैं। ऐसे में कॉलर नेम में किसका नाम डिस्प्ले करना चाहिए, इसे लेकर भी कंफ्यूजन बना हुआ है। टेलीकॉम ऑपरेटर्स द्वारा इसे लेकर दूरसंचार विभाग की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है।

CNAP, TRAI

Image Source : UNSPLASH
कॉल्स

पिछले दिनों केंद्रीय संचार राज्यमंत्री पेम्मासानी चंद्र शेखर ने संसद में जानकारी देते हुए कहा था कि टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स द्वारा किए गए ट्रायल और असेसमेंट के आधार पर मोबाइल नेटवर्क के लिए CNAP सर्विस इंप्लिमेंट करने को लेकर फैसला लिया जाएगा। दूरसंचार विभाग टेलीकॉम ऑपरेटर्स को इस सर्विस को जल्द से जल्द लागू करने के लिए कह रहा है।

DoT की योजना हर इनकमिंग कॉल्स के लिए कॉलर का नाम डिस्प्ले करना अनिवार्य कर देना चाहिए। हालांकि, टेलीकॉम ऑपरेटर्स को 2G नेटवर्क में इसे इंप्लिमेंट करने में तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में इसका सॉल्यूशन निकाले जाने पर ही इस सर्विस को इंप्लिमेंट किया जा सकेगा।

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