Explainer: भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला जल्द ही इतिहास रचने वाले हैं। वे Axiom Mission 4 (Ax-4) के तहत SpaceX के Dragon Capsule में बैठकर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की उड़ान भरने वाले हैं। यह पहली बार है जब कोई भारतीय पायलट किसी निजी अंतरिक्ष मिशन में हिस्सा ले रहा है। आइए जानते हैं कि यह ड्रैगन कैप्सूल आखिर है क्या, यह कैसे काम करता है और शुभांशु शुक्ला इस मिशन में क्या-क्या करने जा रहे हैं।
ड्रैगन (Dragon) एक पुनः उपयोग होने वाला अंतरिक्ष यान (capsule) है, जिसे एलन मस्क की SpaceX कंपनी ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों और सामान को पृथ्वी से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) तक ले जाना और सुरक्षित वापस लाना है। यह एक स्पेसक्रॉफ्ट है। इसका आकार कैप्सूल की तरह होता है। इसलिए इसे ड्रैगन कैप्सूल भी कहते हैं। हाल ही में ड्रैगन कैप्सूल के जरिये ही भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स 8 महीने तक अंतरिक्ष में फंसे रहने के बाद धरती पर वापस लौटी थीं। उनके साथ 3 अन्य साथी भी थे।
शुभांशु शुक्ला जिस कैप्सूल में यात्रा करेंगे, वह Crew Dragon है।
ड्रैगन कैप्सूल को SpaceX का Falcon 9 (फैलकॉन-9) रॉकेट लॉन्च करता है। रॉकेट ऊंचाई तक पहुंचने के बाद Dragon कैप्सूल को कक्षा (orbit) में छोड़ देता है। यह कैप्सूल पूरी तरह स्वचालित (autonomous) है। इसका मतलब है कि यह खुद से ISS से डॉक करता है और उड़ान नियंत्रित करता है। हालांकि, पायलट (जैसे शुभांशु शुक्ला) की ज़रूरत आपात स्थिति में हस्तक्षेप के लिए होती है।
Dragon ISS से जुड़ता है, अंतरिक्ष यात्री बाहर आते हैं, प्रयोग करते हैं और कुछ हफ्तों के बाद उसी कैप्सूल से लौटते हैं।
वापसी पर कैप्सूल वायुमंडल में प्रवेश करता है और पैराशूट की मदद से समुद्र में उतरता है।
शुभांशु शुक्ला कितने दिन अंतरिक्ष में रहेंगे?
शुभांशु शुक्ला ISS पर लगभग 14 दिन रहेंगे। वे मिशन के पायलट की भूमिका निभाएंगे और Dragon कैप्सूल के लॉन्च, डॉकिंग और रिटर्न की निगरानी करेंगे। उनके साथ अमेरिका, हंगरी और पोलैंड के अंतरिक्ष यात्री भी रहेंगे। यह मिशन पूरी तरह निजी है और इसका संचालन Axiom Space कर रही है।
अंतरिक्ष यात्री अपने साथ कुछ जरूरी और निजी चीजें ले जाते हैं। इनमें व्यक्तिगत किट जिसमें फोटो, धार्मिक प्रतीक, झंडा, पारिवारिक स्मृतियां आदि हो सकती हैं। इसके अलावा वैज्ञानिक उपकरण होते हैं, जिनसे वे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पर प्रयोग करेंगे। इसमें माइक्रो ग्रैविटी से जुड़ी जैविक और भौतिक प्रयोग शामिल हैं। इसके अलावा खाद्य सामग्री भी होती है। हालांकि अंतरक्षि यात्रियों को मुख्य भोजन स्टेशन से मिलता है, लेकिन यात्री कुछ व्यक्तिगत पसंद के स्नैक्स या टेस्टी फूड साथ ले जाते हैं। इसके अलावा प्राथमिक चिकित्सा के लिए कुछ दवाइयां भी रहती हैं।
शुभांशु शुक्ला भारत के दूसरे ऐसे व्यक्ति होंगे जो अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) तक पहुंचेंगे। उनसे पहले एक अन्य भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने सोयूज में 1984 में उड़ान भरी थी। हालांकि अब यह पहली बार होने जा रहा है, जब कोई भारतीय Private International Space Mission में पायलट के रूप में जाएगा। इससे भारत की अंतरिक्ष नीति में निजी साझेदारी और वैश्विक सहयोग को बल मिलेगा। मूलरूप से लखनऊ निवासी शुभांशु शुक्ला की यह उड़ान भारत के लिए गर्व का क्षण है और आने वाले समय में निजी अंतरिक्ष उड़ानों में भारत की बड़ी भूमिका का संकेत भी देती है। उनकी सफलता देश के युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान में करियर चुनने के लिए प्रेरित करेगी।
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