डॉक्टर से जानें किन बीमारियों के बाद विकलांगता का खतरा बढ़ जाता है?
डॉक्टर से जानें किन बीमारियों के बाद विकलांगता का खतरा बढ़ जाता है?
कई बीमारियों में इलाज में देरी या फिर सही ट्रीटमेंट नहीं मिलने से मरीज विकलांगता हो सकते है। ऐसे में चलिए जानते हैं वो बीमारियां कौन सी हैं जिनका सही इलाज नहीं होने से विकलांगता का खतरा बढ़ जाता है?
Published : Dec 03, 2025 05:01 pm IST, Updated : Dec 03, 2025 05:03 pm IST
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कई बीमारियों में इलाज में देरी या फिर सही ट्रीटमेंट नहीं मिलने से मरीज विकलांगता हो सकते है। पीएसआरआई अस्पताल में आपातकालीन विभागाध्यक्ष, डॉ. प्रशांत सिन्हा, कहते हैं कि अगर सही समय पर मरीज फिजियोथेरेपी या दवाइयाँ नहीं लेता है तो उस वजह से शरीर की मूवमेंट क्षमता कम होती जाती है। इससे शरीर के टिश्यू, मांसपेशियों और जॉइंट्स लम्बे समय तक डैमेज रहते है जो आगे चलकर विकलांगता की वजह बन सकते हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं वो बीमारियां कौन सी हैं जिनका सही इलाज नहीं होने से विकलांगता का खतरा बढ़ जाता है?
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आर्थराइटिस: अगर लंबे समय से आर्थराइटिस से जुड़ी परेशानी है तो इस वजह से चलने फिरने में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। आर्थराइटिस में घुटने, कूल्हे और रीढ़ पर कई बार सूजन आने लगता है जिस वजह से चलना मुश्किल हो जाता है। जब घुटने एकदम जवाब दे जाते हैं तब कई बार सर्जरी भी करनी पड़ता है। इसलिए समय पर जॉइंट केयर, एक्सरसाइज और फिजियोथेरेपी से इसे कंट्रोल करना चाहिए।
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स्ट्रोक : ब्रेन स्ट्रोक होने पर विकलांगता का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। अगर मरीज को स्ट्रोक आया है तो उसके बाद दिमाग में ब्लड सर्कुलेशन सही से नहीं होता है जिस वजह से हाथ-पैरों में लकवा, बोलने में कठिनाई और बैलेंस खराब होने जैसी कई गंभीर समस्याएँ हो सकती हैं।
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स्पाइनल कॉर्ड इंजरी: स्पाइनल कॉर्ड इंजरी होने पर भी व्यक्ति विकलांग हो सकता है। इस स्थिति में शरीर का निचला हिस्सा काम नहीं करता है और वह पूरी तरह से नियंत्रण खत्म हो सकता है। ऐसे मामलों में नियमित थेरेपी ही मरीज को बेहतर मूवमेंट देती हैं।
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ऐसी में विकलांगता का खतरा न बढ़े इसलिए मरीज़ों को शुरू में ही बीमारियों का अच्छी तरह से इलाज करना चाहिए। सही इलाज, नियमित फिजियोथेरेपी और स्वस्थ जीवनशैली से विकलांगता को रोका जा सकता है।