भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने गुजरात में अपनी संगठनात्मक संरचना को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पार्टी ने अपने 'संगठन सृजन अभियान' के तहत गुजरात के 40 जिला और शहर कांग्रेस कमेटियों (डीसीसी) के लिए नए अध्यक्षों की नियुक्ति की घोषणा की है। यह कदम 2027 में होने वाले गुजरात विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिए उठाया गया है, जिसका उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को कड़ी टक्कर देना है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इन नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से मंजूरी दी है। संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा, "ये नियुक्तियां दो महीने से अधिक समय तक चली गहन संगठनात्मक कवायद का परिणाम हैं। बूथ से जिला स्तर तक पार्टी की संरचना को पुनर्जनन करने के लिए शुरू किया गया यह अभियान पारदर्शी, समावेशी और विचारधारा-आधारित नेतृत्व चयन पर केंद्रित है।"
'संगठन सृजन अभियान' की शुरुआत गुजरात से की गई, जिसमें 43 अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) और 183 प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) पर्यवेक्षकों ने हिस्सा लिया। इन पर्यवेक्षकों ने गुजरात के 26 लोकसभा क्षेत्रों, 182 विधानसभा क्षेत्रों और 235 ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों में जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं, नागरिक समाज और स्थानीय समुदायों के साथ संवाद किया। इस प्रक्रिया में सार्वजनिक संवाद, आमने-सामने की बैठकें और प्रेस कॉन्फ्रेंस शामिल थे। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की पहल पर शुरू हुए इस अभियान का लक्ष्य जिला कांग्रेस कमेटियों को पार्टी की नींव के रूप में स्थापित करना है। वेणुगोपाल ने कहा कि नवनियुक्त अध्यक्ष गुजरात की सामाजिक और क्षेत्रीय विविधता का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन्हें उनके जमीनी जुड़ाव, वैचारिक स्पष्टता और संगठनात्मक क्षमता के आधार पर चुना गया है।
कांग्रेस ने इस नियुक्ति प्रक्रिया में नए और अनुभवी नेताओं के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है। लगभग 50% नियुक्तियां पहली बार जिला या शहर अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने वाले नेताओं को दी गई हैं, जबकि कुछ अनुभवी नेताओं को उनके पदों पर बरकरार रखा गया है। उदाहरण के लिए, अहमदाबाद शहर में सोनल पटेल को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि वडोदरा शहर और जिले में पुराने नेताओं पर भरोसा जताया गया है।
गुजरात में कांग्रेस की स्थिति पिछले कुछ वर्षों में कमजोर रही है। वर्तमान में, पार्टी के पास 26 लोकसभा सीटों में से केवल बनासकांठा सीट और 182 विधानसभा सीटों में से मात्र 12 सीटें हैं। इस संगठनात्मक बदलाव के जरिए कांग्रेस का लक्ष्य बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक अपनी उपस्थिति को मजबूत करना है। पार्टी ने यह भी घोषणा की है कि भविष्य में विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों का चयन करते समय जिला अध्यक्षों की राय को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
नियुक्तियों की घोषणा के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने सोशल मीडिया पर उत्साह व्यक्त किया है। एक कार्यकर्ता ने लिखा, "यह संगठन सृजन अभियान सिर्फ बदलाव नहीं, बल्कि भविष्य की बुनियाद है।" कई नेताओं ने नवनियुक्त अध्यक्षों को बधाई दी और विश्वास जताया कि यह नई टीम गुजरात में कांग्रेस को नई ऊर्जा प्रदान करेगी।
कांग्रेस ने संकेत दिया है कि इस अभियान को जल्द ही अन्य राज्यों में भी लागू किया जाएगा। गुजरात में इस बदलाव को पार्टी के लिए एक 'पायलट प्रोजेक्ट' के रूप में देखा जा रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कदम कांग्रेस को जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच नई उम्मीद और जोश पैदा करने में मदद कर सकता है, लेकिन बीजेपी की मजबूत पकड़ को चुनौती देना अभी भी एक बड़ी चुनौती होगी। कुल मिलाकर, यह संगठनात्मक फेरबदल गुजरात में कांग्रेस के लिए एक नई शुरुआत का संकेत देता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ये नवनियुक्त अध्यक्ष पार्टी को कितनी मजबूती और दिशा प्रदान कर पाते हैं।
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