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मनरेगा घोटाला: पहले मामले में जमानत मिलने के तुरंत बाद गुजरात के मंत्री का बेटा दूसरे केस में गिरफ्तार

Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav Published : May 30, 2025 10:26 pm IST, Updated : May 30, 2025 10:33 pm IST

गुजरात के मंत्री के बेटे किरण खाबड़ को मनरेगा घोटाले से जुड़े एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है। इससे पहले उन्हें मनरेगा के एक मामले में जमानत मिल गई थी।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
Image Source : ANI सांकेतिक तस्वीर

दाहोदः गुजरात के मंत्री बचुभाई खाबड़ के बेटे को मनरेगा घोटाले से जुड़े मामले में जमानत मिलने के तुरंत बाद दूसरे मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। गुजरात के पंचायत और कृषि राज्य मंत्री के बेटे किरण खाबड़ को पिछले महीने दाहोद में उजागर हुए 71 करोड़ रुपये के मनरेगा घोटाले में कथित संलिप्तता के लिए दो सप्ताह पहले गिरफ्तार किया गया था। 

मनरेगा से जुड़े दूसरे मामले में मंत्री का बेटा गिरफ्तार

किरण खाबड़ को पहली एफआईआर में जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद गुरुवार रात को गिरफ्तार किया गया। उन्हें दाहोद पुलिस द्वारा दर्ज एक नए मामले में गिरफ्तार किया गया। नई एफआईआर के अनुसार, किरण ने मनरेगा के तहत उन्हें आवंटित कार्य पूरा किए बिना सरकार से भुगतान प्राप्त किया। फिलहाल इस मामले में मंत्री की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है। 

मनरेगा का काम किए बिना पैसे लेने का आरोप

दाहोद 'बी' डिवीजन पुलिस द्वारा एजेंसी मालिकों और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ गुरुवार शाम को दर्ज की गई ताजा एफआईआर के अनुसार, दाहोद के लावरिया गांव में मनरेगा के तहत अधूरे काम के बावजूद एजेंसियों को 18.41 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (डीआरडीए) द्वारा 71 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद दाहोद पुलिस ने सरकारी कर्मचारियों सहित अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और विश्वासघात की प्राथमिकी दर्ज करने के बाद दो सप्ताह पहले किरण को उसके भाई बलवंत के साथ गिरफ्तार किया था। 

जाली दस्तावेज जमा कराने का आरोप

एफआईआर के अनुसार, उन्होंने 2021 और 2024 के बीच सौंपे गए काम को पूरा नहीं किया या आवश्यक सामग्री की आपूर्ति नहीं की, लेकिन फर्जी कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र और जाली दस्तावेज जमा करके भुगतान का दावा किया। पुलिस के अनुसार, बलवंत और किरण दाहोद जिले के देवगढ़ बारिया और धनपुर तालुका में किए गए फर्जी मनरेगा प्रोजेक्टों में शामिल एजेंसियों के मालिक हैं। रिमांड समाप्त होने के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और बाद में गुरुवार को स्थानीय अदालत ने उन्हें जमानत दे दी। हालांकि रिहा होने से पहले ही मंत्री के बेटे को एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। 

इनपुट- पीटीआई

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