आज की Gen Z जनरेशन दिखने में जितने कॉन्फिडेंट, डिजिटल-स्मार्ट और खुलकर अपनी बात रखने वाले है, अंदर से उतनी ही प्रेशर और अनिश्चितताओं से जूझ भी रही है। सोशल मीडिया पर परफेक्ट लाइफ की रेस, करियर की टफ कॉम्पिटिशन, रिश्तों में अस्थिरता और हर समय ऑनलाइन रहने की आदत, ये सब मिलकर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रहे हैं। नतीजा, छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन, ओवरथिंकिंग और एंग्जायटी जैसी परेशानियां तेजी से बढ़ती दिख रही हैं। फरीदाबाद स्थित फोर्टिस अस्पताल में निदेशक न्यूरोलॉजी, डॉ. विनीत बंगा, बता रहे हैं कि आखिर Gen Z में चिड़चिड़ापन और एंग्जायटी तेजी से क्यों बढ़ रहा है?
Gen Z में चिड़चिड़ापन और एंग्जायटीबढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण है डिजिटल लाइफस्टाइल। सोशल मीडिया पर लगातार तुलना, लाइक्स-फॉलोअर्स की दौड़ और परफेक्ट दिखने का दबाव युवाओं में असुरक्षा और तनाव बढ़ाता है। हर समय नोटिफिकेशन आने से दिमाग को आराम नहीं मिल पाता, जिससे चिड़चिड़ापन बढ़ता है।
दूसरा कारण है करियर और भविष्य की अनिश्चितता। बढ़ती प्रतिस्पर्धा, नौकरी की अस्थिरता और आर्थिक दबाव युवा मन में चिंता पैदा करते हैं। कई युवाओं को लगता है कि उन्हें बहुत कम उम्र में ही “सफल” होना है, वरना वे पीछे रह जाएंगे।
तीसरा महत्वपूर्ण कारण है सामाजिक अलगाव। ऑनलाइन कनेक्टेड रहने के बावजूद वास्तविक रिश्तों में दूरी बढ़ी है। आमने-सामने बातचीत कम होने से भावनात्मक सहारा घटता है, जिससे अकेलापन और एंग्जायटी बढ़ती है। इसके अलावा, नींद की कमी, असंतुलित दिनचर्या, शारीरिक गतिविधि में कमी और परिवारिक अपेक्षाएँ भी मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालती हैं।
समाधान के रूप में डिजिटल डिटॉक्स, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, खुलकर संवाद और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग लेना बेहद सहायक हो सकता है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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