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Amalaki Ekadashi 2026 Vrat Katha: आमलकी एकादशी पर जरूर करें इस कथा का पाठ, श्री विष्णु की कृपा से मिलेगी सभी पापों से मुक्ति

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Feb 25, 2026 06:32 pm IST,  Updated : Feb 25, 2026 06:32 pm IST

Amalaki Vrat Katha in Hindi: फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी का व्रत किया जाता है। इस दिन श्रीहरि की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा के समय आमलकी एकादशी कथा का पाठ करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

Amalaki Vrat Katha in Hindi- India TV Hindi
आमलकी एकादशी व्रत कथा Image Source : INDIA TV

Amalaki Vrat Katha in Hindi: रंगभरी एकादशी जिसे आमलकी के नाम से भी जाना जाता है। फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी या आंवला एकादशी भी कहा जाता है। पंचांग के अनुसार, साल 2026 में आमलकी एकादशी का व्रत 27 फरवरी 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा। यह पावन तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन का शुभ फल पाने के लिए श्रीहरि विष्णु और मां लक्ष्मी के संग आंवले के पेड़ की पूजा करने का विधान है। इस दिन पूजा के समय आमलकी एकादशी व्रत कथा का पाठ करना चाहिए। मान्यता है कि कथा का पाठ करने से एकादशी व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होता है और साधक के सभी पापों का नाश होता है। यहां पढ़िए आमलकी एकादशी व्रत कथा।

आमलकी एकादशी व्रत कथा (Amalaki Ekadashi Vrat Katha)

पुराणों में वर्णित है कि वैदिक नामक नगर में चंद्रवंशी राजा राज्य करते थे। इस नगर के लोग भगवान विष्णु के परम भक्त थे और हर एकादशी का व्रत विधिपूर्वक रखते थे।फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष में आमलकी एकादशी का व्रत बड़े श्रद्धा और भक्ति से किया जाता था। उसी समय नगर में एक महापापी शिकारी आया। वह शिकारी नगर में रुककर भगवान विष्णु की कथाएं सुनने लगा। उसने पूरी रात जागरण किया और व्रत के महत्व को समझा। इसके बाद वह अपने घर लौटकर सो गया।

कुछ ही दिनों बाद उसका देहांत हो गया। पापों के कारण उसे नरक में जाना पड़ा। लेकिन याददाश्त में बचा कि उसने एक बार अनजाने में आमलकी एकादशी व्रत कथा सुनी थी और जागरण भी किया था। इस कारण उसे उस व्रत का शुभ फल मिला। उसने फिर राजा विदूरथ के घर जन्म लिया और उसका नाम वसुरथ रखा गया। वसुरथ बड़े होकर एक दिन जंगल में भटक गया और एक पेड़ के नीचे सो गया। अचानक कुछ डाकुओं ने उस पर हमला कर दिया। लेकिन उनके सारे अस्त्र-शस्त्र का उस पर कोई असर नहीं हुआ और राजा निश्चिंत होकर सोते रहे।

जब राजा की नींद खुली, तो उसने देखा कि आसपास कई लोग जमीन पर गिर पड़े हैं। इस पर उसे समझ आया कि यह हमला उसके जीवन के लिए खतरा था। तभी आकाशवाणी हुई, "हे वसुरथ! जगत के पालनहार भगवान विष्णु ने तेरी रक्षा की है। पिछले जन्म में तुमने आमलकी एकादशी व्रत रखा था और कथा का पाठ किया था। यही व्रत तुम्हारे जीवन की रक्षा करने वाला फल बनकर आया है।"

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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