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ज्यादा स्क्रीन टाइम से कमजोर हो रहा है बच्चों का हार्ट, हाई बीपी, कोलेस्ट्रॉल और शुगर की बीमारी का खतरा

 Written By: Bharti Singh @bhartinisheeth
 Published : Aug 19, 2025 10:30 am IST,  Updated : Aug 19, 2025 10:30 am IST

Mobile Screen Time For Kids Harmful Effects: अगर आपका बच्चा पूरे दिन में 2 घंटे से ज्यादा स्क्रीन टाइम बिता रहा है, फिर चाहे वो फोन हो या टीवी तो ये खतरनाक हो सकता है। लेटेस्ट स्टडी में पता चला है कि बढ़ते स्क्रीन टाइम से बच्चों का दिल कमजोर हो रहा है।

बच्चों में मोबाइल की लत- India TV Hindi
बच्चों में मोबाइल की लत Image Source : FREEPIK

क्या आप भी अपने बच्चे के खाना ना खाने पर उसे फोन दिखाकर खाना खिलाते हैं। क्या आप बच्चों के रोने पर मोबाइल पर कार्टून लगाकर उनके हाथ में थमा देते हैं। क्या आपके बच्चे भी स्कूल से आकर स्मार्टफोन पर रील्स-वीडियो गेम्स की दुनिया में खो जाते हैं। अगर आपके घर में ऐसा हो रहा है तो समझ लीजिए कि जाने-अनजाने आप अपने बच्चों को आने वाले वक्त में बीमारियों के चक्रव्यूह में धकेल रहे हैं।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने एक रिसर्च पब्लिश की है जो बताती है कि ज़्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों का दिल कमज़ोर कर रहा है। डेनमार्क में हुई इस स्टडी में पाया गया कि स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चों में ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और  इंसुलिन रेज़िस्टेंस के मामले ज़्यादा पाए गए। जिनसे आगे चलकर शुगर और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ता है। आजकल तो वैसे ही हार्ट अटैक के मामले ज़्यादा देखने को मिल रहे हैं।

ज्यादा फोन और टीवी से बढ़ा बीमारियों का खतरा 

रिसर्चर्स ने स्टडी में पाया कि स्क्रीन टाइम में रोज़ एक घंटा एक्स्ट्रा बढ़ाने से बीमारी का खतरा दूसरो के मुकाबले ज़्यादा बढ़ता है। यानि अगर किसी बच्चे ने अपने साथी के मुकाबले 3 घंटे ज़्यादा मोबाइल देखा तो उस पर हार्ट और शुगर की बीमारी का जोखिम करीब 50% तक ज़्यादा बढ़ गया। ज़रा सोचिए सेलफोन पर बिताया हर घंटा बच्चों के लिए कितना खतरनाक है। 

मोबाइल से बढ़ी सुसाइडल टेंडेंसी

यही नहीं जर्नल ऑफ अमेरिकन एसोसिएशन की रिपोर्ट ने तो दुनियाभर के पेरेंट्स की चिंता बढ़ा दी है। क्योंकि रिपोर्ट के मुताबिक 11 साल से ऊपर का हर 3 में से 1 बच्चा मोबाइल एडिक्ट है। इससे ना सिर्फ फिज़िकल हेल्थ खराब हुई है। बल्कि मेंटल हेल्थ पर भी गहरा असर पड़ रहा है। यहां तक कि ऐसे बच्चों में सुसाइडल टेंडेंसी दूसरो के मुकाबले दोगुनी पाई गई। 

3 में से 1 बच्चे मोबाइल एडिक्ट

इस स्टडी को लेकर डॉक्टर्स भी परेशान हैं। भारत की राजधानी में तो 68% बच्चे हर दिन औसतन 4 घंटे स्क्रीन पर बिता रहे हैं। जो 2 घंटे की गाइडलाइन से लगभग डबल है। बच्चे कहीं के भी हो खतरा सब पर बराबर है और अब ये हाई टाइम है कि उनको डिजिटल दुनिया से निकालकर रियल वर्ल्ड में लाया जाए। नए-नए खेल सिखाए जाएं। बच्चों को हेल्दी खाने की आदतों से रूबरू कराएं और उनके दिमाग को तेज बनाएं। 

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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