चने को भिगोकर या भूनकर किसी भी रूप में खाया जा सकता है। लेकिन, अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है की सेहत के लिए क्या ज़्यादा फायदेमंद है भुना या भिगोया हुआ चना? ऐसे में यह जानने के लिए हमने एक्सपर्ट से बातचीत की। द्वारका में स्थित ब्लूम क्लिनिक में आयुर्वेदिक डॉक्टर और पोषण विशेषज्ञ डॉ. अंजना कालिया के अनुसारा भुने और भिगोए दोनों ही चने के अपने-अपने फायदे हैं। भुना चना कुरकुरा नाश्ता है, जबकि भिगोया हुआ चना पाचन में आसानी के कारण पसंद किया जा सकता है। इसके अलावा भी कई फायदे हैं।
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भीगे हुए चने के फायदे:
चने भिगोने से पोषक तत्वों का अवशोषण बढ़ता है, जिससे वे प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिजों से भरपूर हो जाते हैं। भिगोने से पाचनशक्ति में सुधार होता है और गैस कम होती है। भिगोए चने उच्च प्रोटीन और फाइबर सामग्री के कारण वजन प्रबंधन में मदद करते हैं। भिगोए हुए चने मैग्नीशियम और पोटेशियम जैसे खनिजों का एक अच्छा स्रोत हैं, जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद कर सकते हैं। भीगे हुए चने में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो मुक्त कणों से लड़ते हैं और त्वचा को होने वाले नुकसान को रोकते हैं। साथ ही भीगा हुआ चना का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम है जो रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है।
भुने हुए चने के फायदे:
भुने हुए चने में प्रोटीन, फाइबर और आवश्यक विटामिन भरपूर मात्रा में होते हैं। भुने चने वजन प्रबंधन में मदद करते हैं। भुने हुए चने मांसपेशियों की मरम्मत और विकास में मदद करते हैं, जो समग्र मांसपेशियों के स्वास्थ्य में योगदान देता है। भुने हुए चने प्रोटीन और फाइबर सामग्री के कारण निरंतर ऊर्जा स्तर प्रदान कर सकते हैं। भुने हुए चने इंसुलिन संवेदनशीलता का समर्थन कर सकते हैं और टाइप 2 मधुमेह के प्रबंधन में मदद कर सकते हैं। भुने हुए चने हड्डियों के स्वास्थ्य को बढ़ावा दे सकते हैं। यानी, भीगे हुए और भुने हुए दोनों ही चना का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद है। अब यह लोगों की व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर करता है कि वो क्या खाना चाहते हैं।