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अयोध्या विवाद: सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी

 Written By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Mar 14, 2018 07:04 am IST,  Updated : Mar 14, 2018 05:10 pm IST

इस केस से जुड़े लगभग सभी वकीलों का मानना है कि सारी तकनीकी औपचारिकतायें पूरी हो चुकी है। यानी देश के सबसे बड़े मुकदमे में अब दलील शुरू करने का समय आ चुका है।

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अयोध्या विवाद: सुप्रीम कोर्ट में आज से रोजाना होगी जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले पर सुनवाई

नई दिल्ली: अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी । इससे पहले एक सवाल फिर सबके सामने है कि क्या इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें आज से शुरु हो पायेगी या फिर थोड़ी देर सुनवाई के बाद ये टल जायेगी। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता में तीन जजों की बेंच आज दो बजे से इस पर सुनवाई करने जा रही है। 8 फरवरी को हुई पिछली सुनवाई के दौरान सभी पक्षों ने इस बात को माना था कि मामले से जुड़े लगभग सभी दस्तावेजों का अनुवाद जमा किया जा चुका है। कुछ ही धार्मिक ग्रंथ हैं जिनके जरूरी अनुवाद जमा नहीं हुए हैं। उन ग्रंथों के अनुवाद भी अब सुप्रीम कोर्ट में इस केस से जुड़े पक्षों को मुहैया करवा दिया गया है।

इस केस से जुड़े लगभग सभी वकीलों का मानना है कि सारी तकनीकी औपचारिकतायें पूरी हो चुकी है। यानी देश के सबसे बड़े मुकदमे में अब दलील शुरू करने का समय आ चुका है। दोनों पक्षों के वकीलों को सुप्रीम कोर्ट के सामने ये साबित करना है कि विवादित जमीन पर उनके याचिकाकर्ता का हक है। ये सारे पक्षों को पता है कि सुप्रीम कोर्ट में इस केस की सुनवाई लंबी चलने वाली है। ये सुनवाई कैसे आगे बढेगी ये बात भी सुनवाई में आज साफ हो जायेगी। जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट को अयोध्या केस की नियमित सुनवाई के लिए अगले महीने मई में गर्मी की छुट्टियों का भी इस्तेमाल करना पड़ सकता है।

बता दें कि अयोध्या मामले मे इलाहाबाद हाईकोर्ट के 30 सितंबर 2010 के फैसले के बाद से ये मुकदमा सात साल से अधिक समय से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और अब तक केस में दलीलें शुरू नहीं हो पाई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने विवादित जमीन को भगवान राम का जन्मस्थान बताते हुए विवादित 2.77 एकड़ जमीन को तीन हिस्से में बांटने के लिए आदेश दिया था। इसमें एक तिहाई हिस्सा रामलला को एक पार्टी के तौर पर मिला, एक तिहाई हिस्सा निर्मोही अखाडा को और बाकी एक तिहाई हिस्सा सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को देने का आदेश हुआ था।

यानी दो तिहाई हिस्सा हिंदू पक्ष को और एक तिहाई हिस्सा मुस्लिम संगठन को देने का आदेश हुआ था। हाई कोर्ट के इस फैसले को मामले से जुड़े सभी पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। बीच-बीच में इस केस की सुनवाई की तारीख आती रही है लेकिन दोनों पक्षों की ओर से तकनीकी औपचारिकता पूरी नहीं हो पाने के आधार पर इसकी सुनवाई टलती गयी लेकिन अदालत के बाहर समझौता नहीं होने की वजह से अब इस मामले में बहस में तेजी आएगी। सारे पक्षों को आज की सुनवाई से यही उम्मीद है।

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